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अंचल व प्रखंड कार्यालय परिसर में लगे थे सागवान के पौधे

एक ओर जहां सरकार वन पर्यावरण को बचाये रखने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर पेड़-पौधे लगा रही है, वहीं दूसरी ओर जगन्नाथपुर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 21, 2018, 03:10 AM IST

अंचल व प्रखंड कार्यालय परिसर में लगे थे सागवान के पौधे
एक ओर जहां सरकार वन पर्यावरण को बचाये रखने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर पेड़-पौधे लगा रही है, वहीं दूसरी ओर जगन्नाथपुर प्रखंड मुख्यालय के नया भवन निर्माण को लेकर वन विभाग से बगैर अनुमति के ही संवेदक ने लाखों रुपए के पेड़ काट डाले गए। इनमें से ज्यादातर पेड़ लिप्टस व सागवान के हैं। सूत्रों के अनुसार, पेड़ काटने के बाद इसे वन विभाग के पास जमा कराने के बजाय लाखों रुपए की लकड़ी दो हजार टन के हिसाब से बेच दिए। अब जब मामले की छानबीन शुरू हो गयी तो प्रखंड कार्यालय के पीछे आनन- फानन में महज एक टेंपो लकड़ी गिरा कर रख दिया गई है। गौरतलब है कि जब तक वन विभाग पेड़ काटने की अनुमति नहीं देता है तब तक पेड़ को काटना एक हत्या के समान अपराध माना जाता है। अब इस मामले को लेकर प्रखंड व अंचल के अधिकारी एक दूसरे पर को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं व छींटाकशी करने लगे हैं।

हजारों टन की जगह मात्र एक छोटे वाहन पर लदे पेड़ को वन विभाग ने प्रखंड परिसर में रखवाया, बिना अनुमति के ही काट डाले 30 पेड़

क्या है मामला

भवन निर्माण विभाग निगम, रांची द्वारा जगन्नाथपुर प्रखंड में पुराने प्रखंड कार्यालय को धवस्त कर नये प्रखंड सह अंचल कार्यालय का निर्माण करने की निविदा निकाली गई थी। निविदा होने पर यह काम जमशेदपुर के एक संवेदक को दिया गया है। संवेदक द्वारा प्रखंड विकास पदाधिकारी से जमीन खाली कर देने की मांग की गई।

भास्कर न्यूज |जगन्नाथपुर

एक ओर जहां सरकार वन पर्यावरण को बचाये रखने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर पेड़-पौधे लगा रही है, वहीं दूसरी ओर जगन्नाथपुर प्रखंड मुख्यालय के नया भवन निर्माण को लेकर वन विभाग से बगैर अनुमति के ही संवेदक ने लाखों रुपए के पेड़ काट डाले गए। इनमें से ज्यादातर पेड़ लिप्टस व सागवान के हैं। सूत्रों के अनुसार, पेड़ काटने के बाद इसे वन विभाग के पास जमा कराने के बजाय लाखों रुपए की लकड़ी दो हजार टन के हिसाब से बेच दिए। अब जब मामले की छानबीन शुरू हो गयी तो प्रखंड कार्यालय के पीछे आनन- फानन में महज एक टेंपो लकड़ी गिरा कर रख दिया गई है। गौरतलब है कि जब तक वन विभाग पेड़ काटने की अनुमति नहीं देता है तब तक पेड़ को काटना एक हत्या के समान अपराध माना जाता है। अब इस मामले को लेकर प्रखंड व अंचल के अधिकारी एक दूसरे पर को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं व छींटाकशी करने लगे हैं।

वन विभाग के अधिकारी ने कहा

पेड़ काटने की अनुमति के लिए वन विभाग के पास आवेदन आया है, लेकिन विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसे काटने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि इसी बीच नोवामुंडी वन क्षेत्र के वन पदाधिकारी अनिल बिहारी का तबादला कोडरमा हो गया है और श्री यादव नये रेंजर के रूप में पदस्थापित हुए हैं, लेकिन अब तक योगदान नहीं दिया है।

एक दूसरे को बता रहे जिम्मेदार - इधर, मामला गड़बड़ते देख प्रखंड व अंचल के पदाधिकारी एक दूसरे की जिम्मेदारी बताने लगे हैं। जब वन विभाग द्वारा पेड़ काटने के लिए अनुमति दी ही नहीं गयी तो पेड़ काटने के लिए संवेदक का चयन कैसे कर लिया गया।

जमीन अंचल का है और भवन परिसर हमारा है। मुझे कुछ मालूम नहीं है कि कौन पेड़ किसके आदेश पर काटा गया है। इस सबंध में अंचलाधिकारी से जानकारी ली जा सकती है। रामनारायण खलखो, बीडीओ

इस सबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी से पूछें। पेड़ काटने की अनुमति मिली या नहीं और किसके आदेश पर सभी पेड़ काटे गये हैं, यह वहीं बताएंगे। तृप्ती विजया कुजूर, अंचलाधिकारी

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