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नीलगाय और जंगली सुअर की झुंड की मार झेल रहे हैं किसान

प्रखंड के डंडाडीह और लोहाडंडा ग्राम की खेती नीलगाय और जंगली सुअर की मार से प्रभावित हो रही है। नजदीकी वन क्षेत्र...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 02:45 AM IST
प्रखंड के डंडाडीह और लोहाडंडा ग्राम की खेती नीलगाय और जंगली सुअर की मार से प्रभावित हो रही है। नजदीकी वन क्षेत्र से शाम ढलते ही नीलगाय और जंगली सुअर के झुंड निकलते है और देखते ही देखते फसल चट कर जाते है। दोनों गांव वन क्षेत्र की सीमा से लगती है। यहां के अधिकतम किसान खेती पर निर्भर है और बड़ी मात्रा में सब्जी सहित अन्य फसल उपजाते है। अब वे जंगली जानवरों की मार से बेबस नजर आ रहे है।

बर्बाद फसल की क्षतिपूर्ति तथा वन सीमा को तार से घेरने की मांग पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में कई किसान रोजी रोटी के लिए पलायन करने को मजबूर है। लोहाडंडा निवासी किसान राजकुमार सिंह की पहचान एक सफल किसान के रूप में होती थी, जिन्हें 2010 में गुजरात में आयोजित राष्ट्रीय कृषि मेला में तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने सम्मानित कर 50 हजार रुपए का चेक भी दिया था। वे अब खेती छोड़कर जीवनयापन के लिए पलायन कर गए है। उन्होंने दूरभाष पर बताया कि विगत तीन वर्षों से जंगली जानवरों की मार से वे कर्ज में डूब गए थे। लिहाजा रोजी रोटी के लिए बाहर जाना पड़ा है। गांवों के प्रभावित किसान छोटन राणा ने बताया कि इस वर्ष लगभग एक एकड़ में गेहूं व चना की फसल लगाए थे, लेकिन जंगली जानवरों द्वारा फसल को बर्बाद कर दिया गया। वहीं सबिया देवी और बालेश्वर यादव व वकार अली ने बताया कि कृषि विभाग की ओर से उपलब्ध चना का बीज लगभग पांच कट्ठा में लगाया था। जिसे नीलगाय व सुअर की झूंड ने खाकर बर्बाद कर दिया। इससे वे बर्बादी के कगार पर पहुंच गए है।