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भक्ति से ही मनुष्य को मिलता है संपूर्ण आनंद

भक्ति एक ऐसी प्रक्रिया है जो मानव को संपूर्ण सुख की प्राप्ति करा सकता है। तुलसीदास जी ने कहा भी है कि भक्ति एक ऐसा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 14, 2018, 02:30 AM IST

भक्ति एक ऐसी प्रक्रिया है जो मानव को संपूर्ण सुख की प्राप्ति करा सकता है। तुलसीदास जी ने कहा भी है कि भक्ति एक ऐसा तंत्र है, जिसको अपनाकर सारे सुख प्राप्त किए जा रहे सकते हैं। उक्त बातें दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से 9 अप्रैल से जयनगर दुर्गा मंडप प्रांगण में चल रहे पांच दिवसीय श्री राम चरित मानस व गीता विवेचना के चौथे दिन गुरुवार की रात आशुतोष जी महाराज के शिष्य स्वामी धनंजयानंद जी महाराज ने कही। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि आज मानव का अंत: कारण दुर्विकारों से भरा हुआ है, इसलिए अशांति बनी हुई है। अब भक्ति का अर्थ जुड़ना होता है। उन्होंने कहा कि ईश्वरीय गुण मनुष्य में, सत्य, संतोष, शील, दया, क्षमा, पाशविक गुण, काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार की जगह लेना और शांति का आना, इसी को वास्तविक भक्ति शास्त्रों में कही गई है । परंतु आज मानव वास्तविक भक्ति को भूल बाहरी दिखावे को भक्ति समझने लगा है ।इसलिए स्वयं सुख या आनंद से कोसों दूर हैं। भावार्थ जिस दिन मनुष्य के चित में सत्य का प्रगटन हो जाय उस क्षण आनंद जन्म लेगा। यही मनुष्य का वास्तविक लक्ष्य है ।कार्यक्रम कि चौथे शिक्षाविद अर्जुन चंद्र यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर राजीव मोदी, सुरेंद्र मोदी, अर्जुन मोदी, सुनील मोदी सहित कई लोग मौजूद थे।

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