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कभी फैक्ट्री में बैलगाड़ी से लाते थे पानी, अब यहां हैं एशिया की सबसे आधुनिक मशीन

एक डॉक्टर और एक हॉस्पिटल था, अब हैं 40 बड़े हॉस्पिटल-1200 डॉक्टर

Bhaskar News | Last Modified - Mar 01, 2018, 06:26 AM IST

  • कभी फैक्ट्री में बैलगाड़ी से लाते थे पानी, अब यहां हैं एशिया की सबसे आधुनिक मशीन
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    जमशेदजी का उद्योग विजन।

    जमशेदपुर. टाटा उद्योग समूह 150 साल के होने पर टाटा समूह जश्न मना रहा है। 3 मार्च को समूह के संस्थापक जेएन टाटा की 179वीं जयंती इस बार भव्यता से मनाई जा रही है। जेएन टाटा के सपनों का शहर है जमशेदपुर। साकची गांव कोे जमशेदपुर नाम मिले भी 100 साल हो रहे हैं। औद्योगिक और कर्मचारियों के विकास और शहर की अाधुनिकता पर पढ़िए दैनिक भास्कर की खास रिपोर्ट...

    चार कदम जो सबसे पहले टाटा ने उठाया, फिर पूरे देश ने अपनाया

    जेएन टाटा, एक ऐसे कर्मवीर जिन्होंने सपना देखा और देश का पहला व सबसे बड़ा स्टील उद्योग साकार हो गया। वे कभी आए नहीं और सपनों का शहर जमशेदपुर के रूप में आकार ले लिया। जेएन टाटा सफल उद्योगपति के साथ उदार व्यक्ति थे। यह जेएन टाटा के दूरदर्शिता का परिणाम है कि उन्होंने उद्योग और कर्मचािरयों के हित में जो कदम उठाए उसे पूरे देश ने अपनाया। ये हैं वो 4 कदम जो पहले टाटा ने उठाए...

    पहला स्टील प्लांट- पानी, लौह अयस्क, कोयला, चूना पत्थर व रेलवे लाइन सब एक साथ

    1904 में अमेरिकी विशेषज्ञ सीएम वेल्ड, सहयोगी निवास राव स्टील प्लांट के लिए उपयुक्त जगह की तलाश में थे। सीनी में उद्योग लगाने की बात तय थी। वहां पानी की दिक्कत महसूस की जा रही थी। इसी दौरान वेल्ड और निवास राव घोड़े से घूम रहे थे। वे सुवर्णरेखा और खरकई नदी के संगम तट पर पहंुचे। इस जगह का नाम था साकची, जो उन्हें बेहद पसंद आया। उद्योग के लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था थी। अायरन अयस्क, कोयला व चूना पत्थर की खदान ज्यादा दूर नहीं थी। परिवहन के लिए पास में कालीमाटी स्टेशन था। वेल्ड ने दोराबजी टाटा को जानकारी दी और देश केे पहले स्टील उद्योग ने अाकार लिया।

    पहली स्कॉलरशिप- देश के हर 5वें आईसीएस को मिलती है टाटा छात्रवृत्ति

    आज शिक्षा के प्रचार-प्रसार पर सरकारें नई-नई योजनाएं चला रही हैं। उस दौर में जेएन टाटा का मानना था कि देश की प्रगति के लिए सर्वोत्तम व सर्वाधिक प्रतिभाओं को प्रकाश में लाना चाहिए ताकि युवाओंं को देश की बड़ी सेवा करने के लायक बनाया जा सके। इस भावना से प्रेरित हाेकर उन्होंने 1892 में जेएन टाटा एंडाउमेंट छात्रवृत्ति योजना की शुरुआत की। यह छात्रों के लिए देश की पहली कल्याणकारी योजना थी। 1924 में हुए एक आकलन के अनुसार, उस समय देश के हर पांचवें आईसीएस अधिकारी को जेएन टाटा एंडाउमेंट स्कॉलरशिप प्राप्त थी। इस स्काॅलरशिप का परिणाम रहा कि अनगिनत प्रतिभाओं ने देश को गौरवान्वित किया।

    फिक्स ड‌‌‌्यूटी टाइम-टाटा ने काम के लिए निर्धारित की थी 8 घंटे की दैनिक मजदूरी

    आठ घंटे की दैिनक मजदूरी सबसे पहले टाटा ने ही शुरू की थी। ड्यूटी के लिए फिक्स टाइम। 19वीं सदी के अारंभ काल में उन दिनों अमेरिका में श्रम शोषण के खिलाफ मजदूर आंदोलन चल रहा था। इनकी आंच कई देशों तक जा पहुंची थी। जेएन टाटा दूरदर्शी थे। वे जानते थे कि कोई भी उद्योग तभी मजबूत होगा, जब उसके कर्मचारी स्वस्थ होंगे। तरोताजा रहेंगे। इसके लिए समय को निर्धारित करना होगा। टाटा ग्रुप में 1912 में आठ घंटे की दैिनक मजदूरी की योजना लाई गई, जिसे देश ने भी अपनाया और 1948 में फैक्टरीज एक्ट बनाकर सरकार ने लागू किया। काम के दौरान घायल मजदूरों के लिए 1915 में नि:शुल्क चिकित्सा शुरू की।

    कर्मचारियों के भविष्य के लिए प्रोविडेंट फंड व पेंशन स्कीम

    टाटा ने कर्मचारियों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की। जेएन टाटा की सोच थी कि नौकरी के दौरान मजदूरों को अार्थिक दिक्कत नहीं होगी, लेकिन जब वे रिटायर हो जाएंगे तो घर चलाना मुश्किल होगा। उनकी सोच पर अमल करते हुए 1920 में प्रोविडेंट फंड योजना लाई गई। इसमें एक निर्धािरत राशि मजदूरों के वेतन से काटी जाती थी और उतना ही हिस्सा कंपनी देती थी। योजना को देश ने भी अपनाया और 1952 में इम्प्लाइज प्रोविडेंट फंड एक्ट बना। जेएन टाटा ने 1885 में मजदूरों के दुर्घटनाग्रस्त होने पर मुआवजा योजना लागू की थी। उन्हें कर्मचारियों के भविष्य की चिंता थी इसलिए 1886 में पेंशन फंड योजना की शुरुआत की थी।

    1921 की जनगणना में जमशेदपुर की आबादी 57 हजार थी जो 2018 में 14 लाख पार कर गई

    जेएन टाटा के सपनों के शहर जमशेदपुर ने 100 साल में काफी तरक्की की। व्यवस्था में सुधार और खुद में बदलाव लाने की कला शहर से सीखी जा सकती है। आैद्योगिक उन्नति के साथ शहर ने लंबी विकास यात्रा तय की। चौड़ी सड़कें, पार्क, हरियाली, विश्वस्तरीय नागरिक सुविधाएं जो यहां हैं वो कहीं और नहीं मिलेंगी। अंग्रेजी लेखक लोबार्ट फ्रेजर ने 1908 में लिखा था ‘यह दुनिया के उच्च कोटि के शहरों में एक होगा।’

    भास्कर टीम : संयोजन - राकेश परिहार, डिजाइन - दीपक सिंह, फोटो - सुदर्शन शर्मा

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    यातायात : स्टेशन से साकची तक बैलगाड़ी से आए थे वायसराय

    2 जनवरी 1902 को भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड चेल्म्स फोर्ड साकची आए थे। तब मोटरगाड़ी नहीं थी। उन्हें कालीमाटी स्टेशन से साकची बैलगाड़ी से लाया गया था। जमशेदजी टाटा के सम्मान में चेल्म्स फोर्ड ने शहर का नाम जमशेदपुर रखा था।

    हवाई सफर : सोनारी से कॉमर्शियल विमान सेवा की शुरुअात

    जमशेदपुर ने 100 सालों में काफी तरक्की की है। 1919 में कालीमाटी स्टेशन आने-जाने के लिए बैलगाड़ी सहारा थी। आमलोगों को पैदल जाना होता था। अब कोलकाता के लिए कॉमर्शियल विमान सेवा शुरू हो रही है। चौथी रेल लाइन का सर्वे हो रहा है।

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    कालीमाटी स्टेशन : इक्का-दुक्का पैसेंजर गाड़ियां ही रुकती थी तब और अब

    हावड़ा-मुंबई मुख्य रेलमार्ग पर स्थित कालीमाटी जंक्शन 1910 में एक छोटा सा स्टेशन था। गिनती के पैसेंजर होते थे। इक्का-दुक्का गाड़ियां रुका करती थीं। इसे तब झंडी दिखाने वाले स्टेशन के रूप में जाना जाता था। 2 जनवरी 1919 को इस स्टेशन को नई पहचान मिली। भारत के तत्कालीन वायसराय लार्ड चेल्म्स फोर्ड ने जमशेदजी टाटा के नाम पर ‘कालीमाटी’ रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर ‘टाटानगर’ रखा था।

    टाटानगर : यहां से होकर गुजरती हैं 66 जोड़ी ट्रेन

    टाटानगर आज साउथ ईस्टर्न रेलवे के प्रमुख स्टेशन में शामिल हैं। इसे मॉडल स्टेशन का दर्जा प्राप्त है। यहां से होकर 49 जोड़ी एक्सप्रेस व 19 जोड़ी पैसेंजर ट्रेन गुजरती हैं। 25 हजार से ज्यादा यात्री प्रतिदिन सफर करते हैं। देश के हर कोने के लिए यहां से गाड़ियां मिलती हैं। चक्रधरपुर रेल मंडल में यह आयरन ओर सहित खनिजों की ढुलाई में सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला स्टेशन है। फिलहाल थर्ड लाइन का विस्तार किया जा रहा है।

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    टीएमएच : 1908 में बना टेंट अस्पताल, डाॅ. शांतिराम थे पहले डॉक्टर

    1922 में साकची हॉस्पिटल की क्षमता बढ़ाकर 72 बेडों की गई। वही अस्पताल ‘टीएमएच’ के रूप में विख्यात है। फिलहाल इस अस्पताल की क्षमता 750 बेड की है। टीएमएच में 200 से ज्यादा डॉक्टर और करीब 400 कर्मचारी हैं। इसे ईस्ट जोन के बड़े अस्पतालों में शामिल किया जाता है। बर्न केस के लिए यह अस्पताल झारखंड में ऊंचा स्थान रखता है। यहां झारखंड-बिहार का एकमात्र कैंसर अस्पताल है।

    बर्न में ख्यात : 200 डॉक्टर, बिहार-झारखंड का एकमात्र कैंसर अस्पताल भी

    1922 में साकची हॉस्पिटल की क्षमता बढ़ाकर 72 बेडों की गई। वही अस्पताल ‘टीएमएच’ के रूप में विख्यात है। फिलहाल इस अस्पताल की क्षमता 750 बेड की है। टीएमएच में 200 से ज्यादा डॉक्टर और करीब 400 कर्मचारी हैं। इसे ईस्ट जोन के बड़े अस्पतालों में शामिल किया जाता है। बर्न केस के लिए यह अस्पताल झारखंड में ऊंचा स्थान रखता है। यहां झारखंड-बिहार का एकमात्र कैंसर अस्पताल है।

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    जमशेद जी टाटा

    जमशेदजी का विजन : शहर

    नगर बनाते समय इस बात का ध्यान रखना कि सड़कें चौड़ी हों। उनके किनारे तेजी से बढ़ने वाले छायादार पेड़ लगाये जाएं। इस बात की भी सावधानी बरतना कि बाग़-बगीचों के लिए काफ़ी जगह छोड़ी जाए। फुटबॉल, हॉकी के लिए भी काफ़ी स्थान रखना। हिन्दुओं के मंदिरों, मुस्लिमों की मस्जिदों तथा ईसाईयों के गिरजाघरों के लिए नियत जगह मत भूलना।

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Web Title: 150 Years Of Tata Group And 100 Years Of Jamshedpur
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