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करंट से बच्ची छटपटा रही थी, गुजर रहे लोगों ने देखा तक नहीं; बॉक्सिंग कोच ने बचाई जान

नर्सिंग होम के डॉक्टर ने जांच के बाद बताया- अगर 10 मिनट और देर होती तो बच्ची की जान बचा पाना मुश्किल हो जाता।

Bhaskar News | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:27 AM IST

  • करंट से बच्ची छटपटा रही थी, गुजर रहे लोगों ने देखा तक नहीं; बॉक्सिंग कोच ने बचाई जान
    घायल बच्ची के साथ उसकी मां, सुनील प्रसाद व शिल्पी।

    जमशेदपुर.बड़ा गोविंदपुर बस्ती में बिजली तार की चपेट में आकर आठ साल की शकीला बेसरा जमीन पर छटपटा रही थी। कई लोग वहां से गुजरे, लेकिन न तो किसी ने बच्ची को उठाया और न ही उसके छटपटाने का कारण जानने का प्रयास किया। सुबह करीब 7.30 बजे टेल्को खड़ंगाझार में रहने वाले बॉक्सिंग कोच सुनील प्रसाद और शिल्पी पोटका जाने के क्रम में वहां से गुजरे तो बच्ची पर नजर पड़ी तो उन्होंने बच्ची की जान बचाई। इसके बाद गोविंदपुर स्थित केयर नर्सिंग होम में बच्ची को भर्ती कराया गया।

    सुनील प्रसाद के अनुसार, वे शिल्पी के साथ कोचिंग कराने पोटका जा रहे थे। बड़ा गोविंदपुर बस्ती के पास शिल्पी ने बच्ची को छटपटाते देखा, तो गाड़ी रोकने को कहा। शिल्पी को लगा- बच्ची को मिर्गी का दौरा पड़ा है। लेकिन जैसे ही उसने बच्ची को छुआ, करंट का झटका लगने से थोड़ी दूर जा गिरी। मामला समझ में आने के बाद वे (सुनील) ट्रांसफॉर्मर से लाइन काटने गए, लेकिन उसका हैैंडल नहीं था। फिर उन्होंने बांस से तार हटाने का प्रयास किया तो उन्हें भी झटका लगा। इसके बाद पास के एक घर से प्लास लेकर आए और तार काटकर हटाया। इसी दौरान बच्ची की मां सुरबली बेसरा और पास में रहने वाले उसके चाचा राजेश बेसरा पहुंचे। फिर बच्ची को निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया।


    10 मिनट देर होती तो बच्ची का हाथ काटना पड़ता : डॉक्टर


    नर्सिंग होम के डॉक्टर ने जांच के बाद बताया- अगर 10 मिनट और देर होती तो बच्ची की जान बचा पाना मुश्किल हो जाता। हाथ काटने तक की नौबत आ सकती थी। करंट लगने से बच्ची की हथेली झुलस गई है। उसके शरीर के अन्य हिस्सों पर भी जलने से गहरे जख्म हुए हैं। देर शाम बच्ची को छुट्‌टी दे दी गई।

    सभी देखकर गुजर रहे थे, कोई नहीं रुक रहा था : शिल्पी
    शिल्पी ने बताया- जब वे लोग बच्ची को करंट से बचाने का प्रयास कर रहे थे, उस दौरान भी गांव के कई लोग वहां से गुजरे। लेकिन कोई नहीं रुका। अगर कोई ने पहले प्रयास किया होता तो बच्ची को इतने जख्म नहीं होते। जब तक उन्होंने बच्ची को देखा- करंट से कपड़े जल चुके थे।

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