--Advertisement--

SDO ने गुरमुखी का अनुवाद कर रिपोर्ट मांगी, कन्वेनर बोले- हिंदी नहीं आती, समय लगेगा

सीजीपीसी का चुनाव कराने की मांग पर सोमवार को नौवें दिन भी गुरमुख सिंह मुखे और उनके समर्थकों का धरना जारी रहा।

Danik Bhaskar | Mar 13, 2018, 03:23 AM IST
गुरमुख सिंह मुखे से पूछताछ करतीं एसडीओ माधवी मिश्रा। गुरमुख सिंह मुखे से पूछताछ करतीं एसडीओ माधवी मिश्रा।

जमशेदपुर. सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (सीजीपीसी) के चुनावी विवाद में सोमवार को जिला प्रशासन ने हाथ डाला। प्रधान पद के तीनों उम्मीदवार गुरमुख सिंह मुखे, हरविंदर सिंह मंटू, हरमिंदर सिंह मिंदी व चुनाव कन्वेनर हरनेक सिंह को जांच कमेटी ने तलब किया। सीएम के आदेश पर एसडीओ माधवी मिश्रा के नेतृत्व में बनी चार सदस्यीय टीम के सिटी डीएसपी अनुदीप सिंह, कार्यपालक दंडाधिकारी अनिता केरकेट्टा व सहायक निबंधन सहकारिता विभाग अशोक तिवारी ने अलग-अलग पूछताछ की।

मुखे समर्थकों के साथ दोपहर एक बजे पहुंचे। उन्होंने एसडीओ को सात पन्नों पर चुनाव पर संविधान की अवहेना के तहत आपत्ति जताई। डेढ़ बजे हरविंदर सिंह मंटू ने पक्ष रखा। दोपहर दो बजे हरमिंदर सिंह मिंदी, कन्वेनर हरनेक सिंह, सीजीपीसी के पूर्व प्रधान इंदरजीत सिंह व अन्य ने मुलाकात की। हरनेक सिंह से कमेटी ने चुनाव संविधान के तहत कराए जाने का स्पष्टीकरण मांगा, जबकि मिंदी ने बताया कि वे स्क्रूटनी में अकेले बच गए थे इसलिए निर्विरोध चुने गए। टीम ने चुनाव कन्वेनर हरनेक सिंह से गुरमुखी में उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों का अनुवाद हिंदी में कराकर देने को कहा है, ताकि आसानी से समझा जा सके। हरनेक सिंह ने कहा इसमें समय लगेगा। मुझे हिंदी लिखनी नहीं आती है। मैं किसी व्यक्ति से सभी दस्तावेजों का हिंदी रूपांतरण कराऊंगा। इसमें एक दिन लगने की संभावना है। प्रयास करूंगा जल्द दस्तावेजों का अनुवाद हिंदी में कराकर सौंप दूं। इधर, सीजीपीसी का चुनाव कराने की मांग पर सोमवार को नौवें दिन भी गुरमुख सिंह मुखे और उनके समर्थकों का धरना जारी रहा।

विपक्ष के सवालों का हरनेक सिंह ने ऐसे दिया जवाब

सीजीपीसी चुनाव में दो उम्मीदवारों का नामांकन अलग-अलग कारणों से रद्द कर हरमिंदर सिंह मिंदी को निर्विरोध प्रधान चुने जाने पर तख्त श्री हरमिंदरजी पटना साहिब के वरीय उपाध्यक्ष शैलेंद्र सिंह द्वारा उठाए गए पांच सवालों का जवाब चुनाव कन्वेनर हरनेक सिंह ने दिया है। उन्होंने कहा यह जवाब शैलेंद्र सिंह के शोकॉज का नहीं बल्कि इसके नाम पर ये लोग दुष्प्रचार कर रहे हैं। उनके सभी सवालों का मैं जवाब दूंगा।

सवाल: 1- सेंट्रल गुरुद्वारा कमेटी के संविधान की धारा 7 क के अनुसार सेंट्रल कमेटी जनरल बॉडी की बैठक में किसी एक सदस्य को प्रधान बनाएगी। एक से ज्यादा उम्मीदवार होने पर बहुमत के आधार पर प्रधान का चुनाव होगा। क्या इस नियम का पालन किया गया है? आपको सेंट्रल कमेटी की किस आम सभा की बैठक में चुनाव कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई?


जवाब : मैने जनरल बॉडी की बैठक बुलाई गई थी। लेकिन विपक्ष के लोग ऐसे विवादित गुरुद्वारों के प्रतिनिधियों को शामिल कराना चाहते थे। इस वजह से यह बैठक नहीं हो पायी। इसके बाद इसकी दूसरी तिथि तय की गई। अगर इन्हें मेरे चुनाव पदाधिकारी रहने पर आपत्ति थी तो इसका विरोध पहले क्यों नहीं किया। जब नामांकन रद्द हो गया तब इनका विरोध देखने को मिला रहा है। यह सही नहीं है।

सवाल: 2- चुनाव प्रक्रिया शुरू करने के पहले नियम के मुताबिक आपको सेंट्रल कमेटी की आम सभा की बैठक बुलानी चाहिए थी। क्या आपने बैठक बुलाई है? प्रमाण पत्र उपलब्ध कराएं।
जवाब : एजीएम की दूसरी तिथि 8 अक्टूबर निर्धारित की गई थी। इसमें जिन गुरुद्वारों को वोट का अधिकार था उनके प्रतिनिधियों को बैठक में शामिल होने के लिए आईकार्ड भी जारी किया। लेकिन विपक्ष के लोग सख्त प्रक्रिया से घबराकर पुलिस के माध्यम से बैठक पर ही रोक लगवा दी। इसके बाद तीनों प्रत्याशियों को एक साथ बैठाकर चुनाव कराने की बात मैने की तब तीनों इस पर राजी हो गए।

सवाल: 3- जब गुरमुख सिंह मुखे का नामांकन पत्र नहीं था तो स्क्रूटनी के लिए उन्हें क्याें बुलाया गया?
जवाब : स्क्रूटनी में गुरमुख सिंह मुखे को इसलिए बुलाया गया था, ताकि उन्हें यह बताया जा सके कि किस अधूरे दस्तावेज की वजह से उनका नामांकन रद्द किया गया। उन्हें बुलाने का दूसरा कोई कारण नहीं था।

सवाल: 4- चुनाव परिणाम की घोषणा 11 मार्च को होनी थी। लेकिन अाप ने 4 मार्च को ही प्रधान की घोषणा क्यों कर दी?
जवाब : स्क्रूटनी के दिन हरमिंदर सिंह मिंदी निर्विरोध प्रधान चुने गए। इससे संबंधित जानकारी उन्हें दी गई। प्रधान बनने से संबंधित शेष प्रक्रिया 11 को ही होनी थी। लेकिन इसी बीच गुरमुख सिंह मुखे ने सीजीपीसी कार्यालय में तालेबंदी कर दी। इसकी वजह से इन दिन शेष प्रक्रिया पूरी नहीं हो पायी।

सवाल: 5- आपके द्वारा उम्मीदवार गुरमुख सिंह मुखे व हरविंदर सिंह मंटू के उम्मीदवारी पत्र को रद्द किया गया तो दोनों को स्पष्टीकरण देने का मौका क्यों नहीं दिया गया?
जवाब : अधूरे पत्रों की वजह से नामांकन रद्द किए जाने पर संबंधित उम्मीदवार को स्पष्टीकरण के लिए समय या मौका देने का कही प्रावधान नहीं है। जब नामांकन ही रद्द हो गया तो स्पष्टीकरण किस बात की। उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए था कि नामांकन भरते समय सभी दस्तावेज प्रस्तुत करें लेकिन ऐसा उन्होंने नहीं किया।

जांच पर भरोसा, अब दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा

हरमिंदर सिंह मिंदी ने कहा कि जांच कमेटी को चुनावी प्रक्रिया से अवगत करा दिया गया है। प्रशासन जो भी दस्तावेज मांग रही है उन्हें मुहैया कराएं जाएंगे। सरकार पर पूरा भरोसा है। अब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

जांच कमेटी काे संविधान के साथ रिपोर्ट उपलब्ध करा दी

गुरमुख सिंह मुखे ने बताया कि प्रशासन पर भरोसा है। जांच कमेटी को चुनावी प्रक्रिया में जो भी धांधली की गई है उसकी रिपोर्ट संविधान के साथ मुहैया करा दी गई है। उम्मीद है कि न्याय मिलेगा।

साजिश के तहत नामांकन रद्द किया, अब न्याय मिलेगा

हरविंदर सिंह मंटू ने बताया कि साजिश के तहत नामांकन रद्द किया गया था। छह माह से इसकी योजना हरनेक, इंदरजीत व उनके समर्थक बना रहे थे। हमारी लड़ाई अन्याय के खिलाफ है। जो न्याय मिलने तक जारी रहेगी।

चार दिनों के अंदर डीसी को सौंपी जाएगी जांच रिपोर्ट

एसडीओ माधवी मिश्रा ने बताया कि सभी पक्षों को बुलाया गया था। जांच टीम के समक्ष सभी ने अपना पक्ष रखा। कुछ कागजात भी दिए हैं। सबों का आकलन कर चार दिनों में डीसी को जांच रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।