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CBI ने कहा था, सरकारी गवाह बन जाओ, अगर बनता तो लालू के लोग मरवा देते

चाईबासा ट्रेजरी से अवैध निकासी के दौरान अकाउंटेट रहे भारतेश्वर नारायण लालदास से खास बातचीत।

Dainik Bhaskar

Jan 25, 2018, 07:19 AM IST
चंद्रभूषण सिंह फिलहाल पश्चिम सिंहभूम के जिला पशुपालन पदाधिकारी हैं।। चंद्रभूषण सिंह फिलहाल पश्चिम सिंहभूम के जिला पशुपालन पदाधिकारी हैं।।

जमशेदपुर. चाईबासा ट्रेजरी से अवैध निकासी के दौरान अकाउंटेट रहे भारतेश्वर नारायण लालदास ने दैनिक भास्कर से चर्चा करते हुए खुलासा किया। उनके मुताबिक, सीबीआई ने सरकारी गवाह बनाने के लिए कई बार दबाव डाला पर मैंने गवाह बनने की बजाय आरोपी बनना पसंद किया है। सीबीआई का तर्क था कि गवाह बनकर जेल जाने से बच जाओगे। पशुपालन घोटाला उजागर होने के बाद हालात बिगड़े हुए थे। कब-किसकी हत्या कर दी जाएगी, इसका हमेशा डर बना रहता। अगर गवाह बनता तो लालू यादव के लोग मेरी भी हत्या करा देते। मरने की बजाय मैंने जेल जाना अच्छा समझा। सन 2000 में पहली बार गिरफ्तारी हुई तो 10 माह तक पटना के बेऊर जेल में रहा। इसके बाद जमानत पर रिहा हुआ।

काउंटेट होने के नाते उन्हें भी घोटाले का जिम्मेदार माना गया

- भारतेश्वर नारायण लालदास अब 82 साल के हो गए हैं। वे फिलहाल चाईबासा के मैरी टोला में अपने खपरैल मकान में रह रहे हैं। जहां उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ चार मामले दर्ज किए गए। चाईबासा ट्रेजरी से संबंधित तीन मामलों में उन्हें 15 साल सश्रम कारावास और एक करोड़ 10 लाख रुपए के जुर्माने की सजा दी गई है।

- उन्होंने बताया कि कैसे ट्रेजरी, जिला पशुपालन पदाधिकारी कार्यालय व उपायुक्त कार्यालय के अधिकारियों व कर्मचारियों की साजिश से सरकारी लूट हुई। अकाउंटेट होने के नाते उन्हें भी घोटाले का जिम्मेदार माना गया था।

मौजूदा पशुपालन पदाधिकारी बोले, अब तो सब हीन दृष्टि से देखते हैं, पद की कोई इज्जत नहीं रही

- चंद्रभूषण सिंह फिलहाल पश्चिम सिंहभूम के जिला पशुपालन पदाधिकारी है। दैनिक भास्कर से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा साहब, अब तो इस कुर्सी को हर कोई हीन दृष्टि से देखता है। पद की कोई इज्जत नहीं करता। इज्जत करेगा भी क्यों, इस कुर्सी पर बैठे अफसरों ने इतने बड़े घोटाले को अंजाम दिया कि पूरा देश स्तब्ध हो गया। बल्कि घोटाले की नींव यहीं से रखी गई।

- पहले चरण में 900 करोड़ का घोटाला सामने आया था। चंद्रभूषण 31 दिसंबर 2016 से इस पद पर पदस्थ है। वे बताते है कि सरकारी महकमा व आम जनता उनके विभाग को घोटालेबाज विभाग के तौर पर देखते है। उन्हें ग्लानि होती है, फिर कार्यालय में लगे उत्तराधिकारी पट्ट की ओर देखते हुए वे कहते है- दो- तीन अधिकारियों ने पशुपालन विभाग को बर्बाद कर दी।

चाईबासा के राजवंशी, गौरीशंकर व ब्रजनंदन की तिकड़ी ने की थी पशुपालन घोटाले की शुरुआत
- राजवंशी, गौरीशंकर और ब्रजनंदन की तिकड़ी ने पशुपालन घोटाले की शुरुआत की थी। लालदास के अनुसार फर्जी बिल के आधार पर सबसे ज्यादा राशि की निकासी चाईबासा ट्रेजरी पदाधिकारी राजवंशी प्रसाद के कार्यकाल में हुई थी। यह वही दौर था जब डॉ गौरी शंकर प्रसाद व डॉ ब्रजनंदन शर्मा जिला पशुपालन पदाधिकारी थे।

- डॉ गौरीशंकर प्रसाद अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर दो बार चाईबासा के जिला पशुपालन पदाधिकारी बने थे। पहली बार प्रसाद 15 जनवरी 1986 से एक जुलाई 88 तक जिला पशुपालन पदाधिकारी रहे। दूसरी बार 19 जुलाई 05 को जिला पशुपालन पदाधिकारी बने, इन्हीं के कार्यकाल में पशुपालन घोटाला उजागर हुआ।

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चंद्रभूषण सिंह फिलहाल पश्चिम सिंहभूम के जिला पशुपालन पदाधिकारी हैं।।चंद्रभूषण सिंह फिलहाल पश्चिम सिंहभूम के जिला पशुपालन पदाधिकारी हैं।।
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