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जमशेदजी टाटा की जयंती का जश्न: गलियां, चौराहे, पार्क, खेल मैदान... सब सतरंगी रोशनी से नहाए

टाटा समूह के 150 साल पूरे होने पर संस्थापक जमशेदजी टाटा की जयंती का जश्न जमशेदपुर में मनाया गया।

Dainik Bhaskar

Mar 04, 2018, 05:46 AM IST
जमशेदजी टाटा की जयंती के मौके पर पोस्टल पार्क से गुजरता दैनिक भास्कर का नो-नेगेटिव रथ। जमशेदजी टाटा की जयंती के मौके पर पोस्टल पार्क से गुजरता दैनिक भास्कर का नो-नेगेटिव रथ।

जमशेदपुर. टाटा समूह के 150 साल पूरे होने पर संस्थापक जमशेदजी टाटा की जयंती का जश्न जमशेदपुर में मनाया गया। टाटा समूह के रतन टाटा, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन, ग्रुप के यूरोप पार्टनर हेनरिक हिजेंजर, टाटा यूरोप के एमडी हेन्स फिशर, ग्लोबल एमडी टीवी नरेंद्रन खास तौर पर मौजूद रहे। टाटानगर की गलियां, चौराहे, पार्क, खेल मैदान... सब आकर्षक व सतरंगी रोशनी से नहा उठे। सुबह-सुबह जनरल ऑफिस गेट से लेकर गोपाल मैदान तक झांकियों का चल समारोह निकाला गया। दैनिक भास्कर ने ‘जियो नो नेगेटिव लाइफ’ थीम पर झांकी निकाली। इसमें ‘बुरा मत देखो’, ‘बुरा मत सुनो’, ‘बुरा मत बोलो’ प्ले से सकारात्मक सोच का संदेश दिया।

टाटा के 150 साल जगमगाया जमशेदपुर

टाटा समूह के 150 साल पूरे होने पर संस्थापक जमशेदजी टाटा की जयंती का जश्न जमशेदपुर में मनाया गया। टाटा समूह के रतन टाटा, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन, ग्रुप के यूरोप पार्टनर हेनरिक हिजेंजर, टाटा यूरोप के एमडी हेन्स फिशर, ग्लोबल एमडी टीवी नरेंद्रन खास तौर पर मौजूद रहे। टाटानगर की गलियां, चौराहे, पार्क, खेल मैदान... सब आकर्षक व सतरंगी रोशनी से नहा उठे। शुक्रवार शाम 6.30 बजे रतन टाटा और चंद्रशेखरन ने लाइटिंग का शुभारंभ किया। शनिवार को 25 हजार से ज्यादा लोग लाइटिंग देखने पहुंचे। आम लोगों के लिए यह 5 मार्च तक खुला रहेगा।

कभी जमशेदपुर धीमा, शांत, बोरिंग हुआ करता था, अब स्मार्ट हो गया- रतन टाटा

टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन रतन टाटा ने कहा टाटा स्टील और यहां के लोग मिलकर जमशेदपुर को संस्थापक जेएन टाटा के सपनों का शहर बनाएंगे। समाज और संस्कृति में किसी तरह का मनमुटाव हो तो भी इस शहर का विघटन नहीं होना चाहिए। टाटा स्टील अब मॉडर्न कंपनी बन चुकी है। जैसे-जैसे कंपनी का विकास हुआ, वैसे-वैसे यह शहर विकसित होता गया। उम्मीद है कि भविष्य में इस शहर के प्रति यहां के नागरिक और गर्व महसूस करेंगे। एक समय था जब इस शहर को बेहद धीमा, शांत और बोरिंग कहा जाता था, मगर अब इसकी पहचान स्मार्ट सिटी के नाते है। मिश्रित सभ्यता व संस्कृति का यह जीवित शहर है। यह लोगों के सहयोग से संभव हुआ है। हम सब मिलकर इस शहर को और अच्छा बना सकते हैं।’

- फोटो| अनूप मिश्रा।

टाटानगर की गलियां, चौराहे, पार्क, खेल मैदान... सब आकर्षक व सतरंगी रोशनी से नहा उठे। टाटानगर की गलियां, चौराहे, पार्क, खेल मैदान... सब आकर्षक व सतरंगी रोशनी से नहा उठे।
जुबिली पार्क में प्रदर्शनी के दौरान रतन टाटा और चंद्रशेखरन ने एक-दूसरे से बैठने का अाग्रह किया। जुबिली पार्क में प्रदर्शनी के दौरान रतन टाटा और चंद्रशेखरन ने एक-दूसरे से बैठने का अाग्रह किया।
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जमशेदजी टाटा की जयंती के मौके पर पोस्टल पार्क से गुजरता दैनिक भास्कर का नो-नेगेटिव रथ।जमशेदजी टाटा की जयंती के मौके पर पोस्टल पार्क से गुजरता दैनिक भास्कर का नो-नेगेटिव रथ।
टाटानगर की गलियां, चौराहे, पार्क, खेल मैदान... सब आकर्षक व सतरंगी रोशनी से नहा उठे।टाटानगर की गलियां, चौराहे, पार्क, खेल मैदान... सब आकर्षक व सतरंगी रोशनी से नहा उठे।
जुबिली पार्क में प्रदर्शनी के दौरान रतन टाटा और चंद्रशेखरन ने एक-दूसरे से बैठने का अाग्रह किया।जुबिली पार्क में प्रदर्शनी के दौरान रतन टाटा और चंद्रशेखरन ने एक-दूसरे से बैठने का अाग्रह किया।
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