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मानगो रेप मामला :पुलिस जांच से असंतुष्ट पीड़िता की मां ने HC में लगाई याचिका

मामले में तीन आरोपी इंद्रपाल सैनी, शिवकुमार महतो और श्रीकांत को पहले ही जेल भेजा जा चुका है।

Dainik Bhaskar

Mar 14, 2018, 02:54 AM IST
Mango misbehavior case Victim Mother petition filed in HC

जमशेदपुर. मानगो सहारा सिटी की नाबालिग से दुष्कर्म का मामला रांची हाई कोर्ट पहुंच गया है। डेढ़ महीने से चल रही पुलिस जांच से असंतुष्ट होकर पीड़िता की मां ने मंगलवार को हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। उन्होंने तत्कालीन पटमदा डीएसपी अजय केरकेट्टा, एमजीएम के पूर्व थानेदार इमदाद अंसारी के अलावा शहर के अन्य 15 प्रभावी लोगों के नाम का खुलासा करते हुए इनके खिलाफ केस दर्ज करने की फरियाद की।

पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग भी की। पीड़िता की मां ने झारखंड सरकार, गृह सचिव, डीजीपी, एसएसपी जमशेदपुर, पूर्व डीएसपी पटमदा अजय केरकेट्टा, एमजीएम के तत्कालीन थानेदार मो. इमदाद अंसारी सहित सीबीआई को पार्टी बनाया है। दुष्कर्म के मामले में तीन आरोपी इंद्रपाल सैनी, शिवकुमार महतो और श्रीकांत को पहले ही जेल भेजा जा चुका है। आवेदन में पीड़िता की मां ने कहा कि पुलिस अफसर, पूर्व विधायक के अलावा राज्य के बड़े नेता के भाई ने भी दुष्कर्म किया लेकिन पुलिस उन्हें बचा रही है। राजस्व मंत्री के पीएस से भी धमकी मिली। इससे पीड़िता और उसके अभिभावक नानक सेठ व परिवार की जान को खतरा है।

इन पर केस की फरियाद


दिनेश अग्रवाल, उपेन्द्र सिंह, तसमीश अहमद उर्फ टुसू, लड्डन खान व उनके भाई मुमैन (राहुल कंस्ट्रक्शन के मालिक), करीम (केरबाल वाला), अभिषेक मिश्रा, शंभू त्रिवेदी, अजीज बुलेट मिस्त्री, गुड्डू गुप्ता, राजेश, मुन्ना धोबी, अमित सिंह (टेल्को), शाहिद, सोनू नैयर उर्फ निशांत।

अफसरों से मिल रही धमकी

पुलिस अधिकारियों से लगातार धमकी मिल रही है। राजस्व मंत्री के पीएस, आरोपी डीएसपी और इंस्पेक्टर फोन पर धमकी दे रहे हैं। इंद्रपाल सैनी, शिवकुमार महतो व श्रीकांत के अलावा किसी और का नाम नहीं लेने को कहा जा रहा है। राजस्व मंत्री के पीएस की बातचीत का ऑडियो टेप उपलब्ध है।
- पीड़िता की मां ने याचिका में बताया

पुलिस अफसरों को लाइन क्लोज के बाद मामला था ठंडे बस्ते में

आरोप है कि बच्ची के साथ पूर्व डीएसपी पटमदा अजय केरकेट्टा, एमजीएम के तत्कालीन थानेदार मो. इमदाद अंसारी सहित कई लोगों ने दुष्कर्म किया। 25 नवंबर 2017 को शिकायत की गई, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। दबाव बढ़ा तो 18 जनवरी 2018 को मानगो थाना में केस दर्ज हुआ। डीआईजी, सिटी एसपी व डीएसपी ने जांच की। इंद्रपाल सैनी, शिवकुमार महतो व श्रीकांत काे जेल भेजा गया। पूर्व डीएसपी को रांची मुख्यालय व एमजीएम थानेदार को चाईबासा लाइन क्लोज कर दिया गया है।

तीन आरोपियों से आगे नहीं बढ़ पाई पुलिस थानेदार-डीएसपी के खिलाफ नहीं जुटाए साक्ष्य

मानगो सहारा सिटी की नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में प्राथमिकी दर्ज हुए 54 दिन बीत चुके हैं, लेकिन आरोपी थानेदार, डीएसपी और सफेदपोश लोगों के खिलाफ पुलिस साक्ष्य नहीं जुटा सकी है। कार्रवाई के नाम पर पुलिस ने अब तक तीन आरोपी क्रमश: इंद्रपाल सैनी, शिव कुमार महतो व श्रीकांत महतो को गिरफ्तार कर जेल भेजा है, जबकि पीड़िता ने एमजीएम के तत्कालीन थानेदार इमदाद अंसारी, पटमदा डीएसपी अजय केरकेट्टा समेत 15 लोगों के नाम पुलिस को बताए थे। इस मामले में इमदाद अंसारी को चाईबासा में लाइन क्लोज और अजय केरकेट्टा को रांची पुलिस मुख्यालय क्लोज कर पुलिस ने जांच का दायरा सीमित कर दिया।

पीड़िता ने पुलिस को उस स्थल के बारे में बताया, थाना और होटल के उस कमरे को दिखाया, जहां उसके साथ ज्यादती की गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। मामले में पीड़िता और मानगो सहारा सिटी निवासी नानक सेठ का कहना है- पुलिस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। पुलिस इंद्रपाल सैनी, शिव कुमार महतो और श्रीकांत महताे तक मामले को समेटने के लिए दबाव बना रही है। नानक सेठ के अनुसार, पीड़िता ने उस नर्सिंग होम के बारे में बताया था, जहां चार बार उसका गर्भपात कराया गया। लेकिन पुलिस ने नर्सिंग होम की जांच नहीं की। जो महिला उसे इंजेक्शन देती थी उसकी भी पहचान कराई, पर पुलिस ने उसे पूछताछ के बाद छोड़ दिया। एेसे में पुलिस की जांच पर भरोसा करना मुश्किल है। दूसरी एजेंसी से जांच कराई जाए, तभी सच सामने आएगा।

तीन-तीन बार जांच नतीजा शून्य

मानगो सहारा सिटी की नाबालिग से दुष्कर्म मामले की जांच तीन-तीन बार पुलिस अधिकारियों ने की, लेकिन नतीजा शून्य रहा। मानगो थाने में प्राथमिकी के बाद सिटी एसपी प्रभात कुमार ने मामले की जांच शुरू की। सिटी एसपी को पीड़िता ने बताया- थाना परिसर के अंदर एक कमरे में थानेदार, उनके सर व अन्य दो लोगों ने दुष्कर्म किया था। शहर के कुछ होटल व रेस्टोरेंट में बिल्डर, नेता व कुछ प्रभावशाली लोगों ने उसके साथ ज्यादती की। नए एसएसपी अनूप बिरथरे ने डीएसपी (हेड क्वार्टर-1) केएन मिश्रा की अगुवाई में जांच टीम का गठन किया। टीम ने एमजीएम थाना में तत्कालीन 16 पुलिसकर्मियों का बयान कलमबद्ध किया। इस दौरान जांच टीम ने थानेदार व डीएसपी को क्लीन चिट दे दी। मामले को पुलिस मुख्यालय ने गंभीरता से लिया और तीसरे चरण में जोनल आईजी नवीन कुमार सिंह ने कोल्हान डीआईजी साकेत कुमार सिंह को जांच का जिम्मा सौंपा। डीआईजी ने भी पीड़िता से पूछताछ की। उन्होंने गिरफ्तार आरोपियों के बयान लिए, लेकिन पुलिस अबतक किसी के खिलाफ साक्ष्य नहीं जुटा सकी है।

पुलिस की जांच पर उठ रहे सवाल

पुलिस की जांच पर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस ने पीड़िता की मेडिकल जांच कराई, जिसमें साफ था कि उसके साथ ज्यादती हुई है। ज्यादती करने वाला कौन है, पुलिस इसका पता नहीं लगा सकी है। पीड़िता ने ज्यादती करने वालों की तस्वीर व कई लोगों के नाम भी बताए। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ की, लेकिन उन्होंने मामले में संलिप्तता से इनकार कर दिया। ऐसी चर्चा है कि मामले में जब पुलिस अधिकारी, नेता और बिल्डर के नाम आए तो उनकी संलिप्तता की जांच की जा रही है। दूसरी ओर आरोपी इंद्रपाल सैनी, शिव कुमार महतो और श्रीकांत महतो को बिना जांच के ही गिरफ्तार कर लिया गया।

तीन आरोपियों का होगा ब्रेन मैपिंग

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार इंद्रपाल सैनी, शिव कुमार महतो और श्रीकांत महतो का गुजरात के गांधीनगर विधि विज्ञान प्रयोगशाला में ब्रेन मैपिंग और लाई डिटेक्टर जांच कराई जाएगी। कोर्ट से अनुमति मिल गई है।

बड़ा सवाल : तीन की ब्रेन मैपिंग तो पुलिस अधिकारियों की क्यों नहीं

इस मामले की जांच में बड़ा सवाल यह है कि इंद्रपाल सैनी, शिव कुमार महतो और श्रीकांत महतो की ब्रेन मैपिंग कराई जा रही है। पीड़िता ने पुलिस अधिकारियों सहित 15 लोगों के नाम बताए हैं। आरोपी पुलिस अधिकारी, बिल्डर व नेता पर रहम क्यों? पुलिस उनकी ब्रेन मैपिंग व लाई डिटेक्टर से जांच क्यों नहीं करवा रही है।

दोषी कितना भी बड़ा हो, बख्शा नहीं जाएगा : आईजी
जोनल आईजी नवीन कुमार सिंह ने बताया कि गिरफ्तार तीन आरोपियों की ब्रेन मैपिंग कराई जाएगी। अन्य आरोपियों की जांच की जा रही है। दोषी कितने भी बड़े हाें, उन्हें किसी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। जल्द जांच का रिजल्ट सामने आएगा।

साइंटिफिक तरीके से कराई जा रही जांच
एसएसपी अनूप बिरथरे ने बताया कि आरोपियों का 20 दिनों में ब्रेन मैपिंग टेस्ट हो जाएगा। बयान भी कलमबद्ध किया गया है। पीड़िता और आरोपियों के बयान अलग-अलग मिले हैं इसी कारण ब्रेन मैपिंग की आवश्यकता पड़ी।

ब्रेन मैपिंग व लाई डिटेक्टर टेस्ट को कोर्ट से मान्यता
वकील सुधीर कुमार पप्पू ने बताया कि ब्रेन मैपिंग व लाई डिटेक्टर टेस्ट को कोर्ट से मान्यता दी गई है। कोर्ट के आदेश पर ही ब्रेन मैपिंग कराई जाती है। जांच साइंटिफिक तरीके से हो, इसलिए इसका उपयोग किया जाता है।

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