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नए साल की शुरुआत ‘सुपरमून’ से, 14% ज्यादा बड़ा होगा, इनके लिए शानदार मौका

“सुपरमून’ को “पेरिगी मून’ और “बिग मून’ भी कहते हैं। खास बात यह भी है कि नए साल में चांद का हर रंग और रूप नजर आएगा।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 27, 2017, 03:21 AM IST

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    चाईबासा.साल 2018 का पहला “सुपरमून’ एक जनवरी को नजर आएगा। वहीं, 31 जनवरी को भी आप इसका दीदार कर पाएंगे। सुपरमून को फुलमून भी कहा जाता है। इस दौरान चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी के निकटतम बिंदु पर होता है। चूंकि चंद्रमा की कक्षा अंडाकार है, जिसका एक हिस्सा (एपोजी, चंद्रमा की कक्षा का वह बिंदु जिस पर वह पृथ्वी से सर्वाधिक दूर है) दूसरे हिस्से (पेरिजी, ग्रह की कक्षा का वह बिंदु जिस पर वह ग्रह पृथ्वी से निकटतम होता है) की तुलना में पृथ्वी से लगभग 50,000 किलोमीटर दूर है।

    नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के एक शोध वैज्ञानिक के मुताबिक, “सुपरमून उन लोगों के लिए एक शानदार अवसर है, जो चंद्रमा के बारे में जानना और उसका अन्वेषण करना चाहते हैं।’ सुपरमून के कारण चांद हर दिन के मुकाबले 14 फीसदी बड़ा और 30 फीसदी ज्यादा चमकदार दिखाई देता है। यह एक व 31 जनवरी को दिखेगा।

    इसे ‘पेरिगी मून’ भी कहते हैं

    “सुपरमून’ को “पेरिगी मून’ और “बिग मून’ भी कहते हैं। खास बात यह भी है कि नए साल में चांद का हर रंग और रूप नजर आएगा। यानी चांद के जितने नाम हैं, उन सभी नामों के अनुरूप दर्शन देगा। भारतीय तारा भौतिकी संस्थान, बेंगलुरू के प्रोफेसर रमेश कपूर ने बताया कि पिछली बार सुपरमून 3 दिसंबर 2017 अौर इससे पहले 14 दिसंबर 2016 को दिखा था। 3 दिसंबर को चंद्रमा पृथ्वी से 3 लाख 64 हजार 421 किलोमीटर तक पहुंचा था। वहीं, 1 जनवरी का चंद्रमा 3 लाख 63 हजार 147 किलोमीटर तक पहुंच जाएगा।

    कैसे घटती-बढ़ती है चंद्रमा-पृथ्वी की दूरी

    प्रो. कपूर ने बताया कि वास्तव में चंद्रमा की कक्षा गोलाकार नहीं बल्कि थोड़ी चपटी है। इसी वजह से इसकी पृथ्वी से दूरी घटती-बढ़ती रहती है। एक जनवरी के सुपरमून की खासियत यह भी है कि तब पृथ्वी अपने कक्ष में सूर्य के निकट पहुंच रही होगी यानी चांद की शोभा और भी ज्यादा होगी। निकटतम स्थिति में चंद्रमा की दूरी 3 लाख 56 हजार 556 किलोमीटर और अधिकतम स्थिति में 4 लाख 6 हजार 601 किलाेमीटर होती है। यानी दोनों के बीच लगभग 50 हजार किलोमीटर का अंतर है। यह बदलाव ऐसा है कि हम आसानी से महसूस नहीं कर पाते।

    31 जनवरी को ब्लू मून का ग्रहण लगेगा, गलत असर नहीं


    प्रोे. कपूर के अनुसार, सुपरमून का समुद्र में उठने वाले ज्वार को कोई अलग से प्रभाव नहीं पड़ता। न ही इसके कारण कोई सुनामी या भूकंप आ सकता है। सुपरमून अमावस्या का भी होता है लेकिन इसे देख नहीं सकते। 31 जनवरी को बड़े चांद का ग्रहण लगेगा।

    एक महीने में दो पूर्णिमा तो दूसरे चांद का नाम ब्लू मून


    2018 के पहले महीने में दो पूर्णिमा है। 1 जनवरी और 31 जनवरी। दिलचस्प बात यह है कि यदि एक महीने में दो पूर्णिमाएं हों तो दूसरी पूर्णिमा के चांद को “ब्लू मून’ कहते हैं। यानी 31 जनवरी का चांद “ब्लू मून’ होगा। इसके बाद फरवरी में कोई पूर्णिमा नहीं है।

    ‘सुपरमून’ शब्द ऐसे आया

    ‘सुपरमून’ शब्द का इस्तेमाल 1979 में साइंटिस्ट रिचर्ड नोल ने किया था। आमतौर पर जब चंद्रमा का केंद्र, पृथ्वी के केंद्र से 360,000 किलोमीटर दूर होता है, तब उसे सुपरमून कहा जाता है।

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Web Title: New Year Will Start From Super Moon
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