--Advertisement--

दबदबे को लेकर हुई लड़ाई में हत्या, 12 लोगों ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया

निरंजन की हत्या की वारदात को 12 लोगों ने मिलकर अंजाम दिया था।

Danik Bhaskar | Dec 28, 2017, 09:02 AM IST
हत्याकांड में गिरफ्तार बाएं से संतोष पांडेय, संतोष सिंह। हत्याकांड में गिरफ्तार बाएं से संतोष पांडेय, संतोष सिंह।

जमशेदपुर. साकची में जुगसलाई निवासी निरंजन सिंह की हत्या बागबेड़ा के नए अपराधी गिरोह ने किया था। हत्याकांड की साजिश नीरज दुबे ने रची थी, जबकि उसे 19 साल के अमन मिश्रा और उसके साथी रोहित सिंह उर्फ पटपट ने अंजाम दिया। रोहित ने ही निरंजन सिंह पर फायरिंग की थी। घटना को अंजाम देने के बाद सभी बाइक से फरार हो गए।

12 लोगों ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया था

- बुधवार को मामले का खुलासा करते हुए एसएसपी अनूप टी मैथ्यू ने बताया कि हत्याकांड का मुख्य षड्यंत्रकारी नीरज दुबे है। टाटानगर स्टेशन के पार्किंग ठेका को लेकर नीरज दुबे और निरंजन के बीच विवाद शुरू हुआ था, जो बाद में वर्चस्व की लड़ाई में बदल गया। इसी कारण निरंजन की हत्या करवाई। 12 लोगों ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया था।

- इसमें नीरज दुबे, संतोष पांडेय, संतोष सिंह के अलावा अमन मिश्रा, गौतम सिंह, सुमित श्रीवास्तव, रोहित सिंह उर्फ पटपट, आदित्य पासवान, अंकित सिंह, मो. आलमगीर व मो. आरिफ शामिल हैं। इनमें हत्यारे को सुरक्षित ढंग से शहर से भगाने में सहयोग करने वाले भी शामिल हैं।

वर्चस्व की लड़ाई में हुई हत्या
- बकौल एसएसपी, निरंजन सिंह और नीरज दुबे पहले दोस्त थे। संतोष पांडेय के नाम से पार्किंग का टेंडर लेकर उसे नीरज दुबे संचालित करता था। नीरज के सहयोगी के तौर पर निरंजन, मो. आरिफ, आलमगीर, आलोक भगत, मनोज भगत व रेहान खान रहते थे। पैसे को लेकर नीरज और निरंजन के बीच विवाद शुरू हुआ। इसे लेकर पार्किंग स्टैंड पर ही निरंजन और नीरज गुट के बीच मारपीट हुई। फिर मामला बढ़ता गया।

- निरंजन व नीरज ने अलग-अलग गुट बना लिया। एक का नाम जेएसआर टाइगर क्लब (नीरज दुबे) और दूसरे का जेएसआर बादशाह क्लब (निरंजन सिंह) था। दोनों गुटों के बीच शहर के विभिन्न इलाकों में कई बार मारपीट की घटना हुई। इसके बाद नीरज ने निरंजन की हत्या का फैसला लिया। उसने साथ में रहने वाले बागबेड़ा क्षेत्र के नौजवानों को साथ लेकर साजिश रची।

18 दिसंबर को मिथिला समाज भवन में बैठक, 19 को वारदात
- 18 दिसंबर को बागबेड़ा के मिथिला समाज भवन में नीरज दुबे ने गौतम, सुमित, आदित्य, रोहित, अंकित व अमन के साथ बैठक की। तय हुआ- 19 दिसंबर को निरंजन साकची शीतला मंदिर में हनुमान चालिसा पाठ करने जाएगा, तभी उस पर हमला किया जाएगा। 19 दिसंबर की सुबह करीब 6.30 बजे नीरज दुबे ने अमन को तीन गोली के साथ पिस्टल सौंपी।

- सुबह 8 बजे अमन ने गौतम, सुमित, आदित्य व रोहित के साथ बागबेड़ा वायरलेस मैदान में बैठक की। फिर सभी रोहित के घर गए और एक गोली चलाकर पिस्टल की जांच की। शाम 4 बजे से अमन और गौतम सिंह अंकित के साथ उसकी बाइक (जेएच05जेड-5783) पर, जबकि आदित्य व रोहित सुमित की बाइक (जेएच05बीएक्स-6497) से निरंजन सिंह को खोजने निकले।

- निरंजन की तलाश में सभी गुजराती समाज के सामने एक पान दुकान के बाद जुबिली पार्क रोड होते हुए आगे बढ़े। वहां एक दुकान के सामने निरंजन स्कूटी पर बैठ चाय पीते दिखा। वहां से सभी निरंजन के पीछे लग गए और शाम 5.30 बजे नागरमल के पास रोहित ने निरंजन को पीछे से गोली मार दी। निरंजन के गिरने पर रोहित ने दूसरी गोली चलाई। इसके बाद सभी बाइक से भाग निकले।

- इस दौरान नीरज को फोन पर पल-पल की जानकारी दी जाती रही। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी बागबेड़ा के मिथिला समाज भवन पहुंचे। वहां नीरज को पिस्टल सौंपने के बाद सभी अपने-अपने घर चले गए। इसके बाद संतोष पांडेय ने अपनी कार (जेएच05जी- 1043) से नीरज और अमन को चांडिल स्थित अपने लाइन होटल शीतल छाया में छोड़ा।

- उनके साथ संतोष सिंह भी था। 20 दिसंबर को पूर्वाह्न 11.30 बजे आरिफ व आलमगीर अपने साथियों के साथ चांडिल स्थित होटल से दोनों को साथ ले गए। वहां से अमन, नीरज, आरिफ व आलमगीर बलरामपुर चले गए। 20 दिसंबर की रात ही अमन, नीरज व आरिफ आसनसोल निकल गए। फिर सियालदह, रामगढ़-रांची होते हुए नीरज व अमन शहर पहुंचे।

हत्याकांड में गिरफ्तार बाएं से अमन मिश्रा व गौतम कुमार सिंह। हत्याकांड में गिरफ्तार बाएं से अमन मिश्रा व गौतम कुमार सिंह।