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बर्न वार्ड में मरीज की मौत: मेरी ड्यूटी एडमिट करने तक : डॉक्टर, यूनिट हेड बोले- मेरी छुट्टी थी

बर्न वार्ड में 60 घंटे तक इलाज शुरू नहीं होने पर मरीज की मौत का मामला।

Dainik Bhaskar

Dec 13, 2017, 07:02 AM IST
मेन गेट बंद कर शव रख किया हंगाम मेन गेट बंद कर शव रख किया हंगाम

जमशेदपुर. एमजीएम अस्पताल में डाॅक्टरों की लापरवाही से सरजामदा निधि टोला निवासी 25 वर्षीय सूरज नायक की मौत के मामले में मंगलवार को दिनभर हंगामा चला। जांच के लिए अस्पताल पहुंची बीडीओ पारुल सिंह को भी लोगों के गुस्से का शिकार होना पड़ा। मरीज को भर्ती करने वाले इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर से सवाल-जवाब किए। उनका जवाब था कि उनकी ड्यूटी केवल मरीज को भर्ती करने तक थी। बर्न यूनिट के एचओडी ने कहा रविवार को छुट्टी होने से वह मरीज को 60 घंटे बाद देख पाए।

अधीक्षक से बीडीओ ने कहा- रवैया बदलें वर्ना मुसीबत में पड़ जाओगे

अस्पताल की बदहाल व्यवस्था देख बीडीओ ने अस्पताल अधीक्षक डॉ. भारतेंदु भूषण से कहा- रवैया बदलिए वर्ना मुसीबत हो जाएगी, मामले की जांच कराइए। एमजीएम अस्पताल में हंगामा कर रहे मृतक के परिजन बीडीओ से कार्रवाई का आश्वासन पाकर शांत हुए। अधीक्षक के चैंबर में बीडीओ ने मृतक के परिजनों की मौजूदगी में डाॅक्टर, नर्स, परिजन व दवा विक्रेता से पूछताछ की। बर्न यूनिट के एचओडी डॉ. ललित मिंज ने गलती मानी, लेकिन अधीक्षक का मानना है कि डॉक्टर से किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई। स्टोव से झुलसे सूरज नायक की सोमवार को मौत हो गई थी।

सफाई... सोमवार को मुझे किसी ने बताया नहीं कि ऐसा कोई मरीज भर्ती है: डॉ. मिंज

मामले में बीडीओ ने बर्न यूनिट के एचओडी डॉ. ललित मिंज से पूछताछ की। डॉ. मिंज से पूछा कि आपने मरीज को देखा था? डाॅ. मिंज ने कहा रविवार को छुट्टी थी। सोमवार को मुझे किसी ने बताया नहीं कि इस तरह का मरीज एडमिट हुआ है। भर्ती होने केे 60 घंटे बाद मरीज को देखा था। वह 55% से अधिक डीप बर्न केस था। मरीज को टॉनिक की दवा लिखी थी। बीडीओ ने परिजनों से पूछा तो बताया कि डाॅक्टर साहब ने 2500 रु. की दवा खरीदवाई थी। दवा दी जाती इससे पहले ही मौत हो गई।

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बीडीओ ने एडमिट करने वाले डाॅक्टर को बुलाया। डाॅक्टर ने कहा: मरीज को डीप बर्न था इसलिए एडमिट कराया। दुकानदार काे भी बुलवाया गया, जिसकी दुकान से दवा खरीदी गई। उसने बताया डाॅक्टर की लिखी दवा के बदले कमीशन मिलता है। बीडीओ ने कहा: तुम्हारा लाइसेंस रद्द होगा। अंत में बीडीओ ने अधीक्षक डॉ. भूषण से कहा- रवैया बदलें, नहीं तो परेशानी होगी। चूक कहां हुई? जांच कराएं।

मेन गेट बंद कर शव रख किया हंगामा

मृतक के परिजनों व बस्ती के लोगों ने सुबह 8 बजे अस्पताल का मेन गेट बंद कर दिया अौर शव रखकर हंगामा करने लगे। चार घंटे तक अस्पताल का मेन गेट बंद रहा। डीसी अमित कुमार ने बीडीओ पारुल सिंह को एमजीएम अस्पताल भेजा। बीडीओ सुबह 10 बजे वहां पहुंची तो लोग और उग्र हो गए। दो घंटे की मशक्कत के बाद बीडीओ ने अस्पताल अधीक्षक डॉ. भारतेंदु भूषण से वार्ता और लापरवाह डाॅक्टर के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिलाया तो दोपहर 12 बजे लोग हटे। अधीक्षक के चैंबर में अंदर वार्ता होती रही और बाहर दोपहर तीन बजे तक हंगामा करते रहे। वार्ता के दौरान मृतक सूरज के भाई शिव नायक ने कहा शनिवार को छोटे भाई की पत्नी गुड़िया नायक स्टोव पर खाना बना रही थी। स्टोव फटने से उसके शरीर में आग लग गई। मेरा भाई सूरज पत्नी को बचाने गया और वह भी झुलस गया। शनिवार को उन्हें एमजीएम अस्पताल लाया गया। अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में जांच के बाद दोनों को बर्न वार्ड में भर्ती किया गया। रविवार-सोमवार उन्हें देखने कोई डाॅक्टर नहीं आया।

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