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रिम्स पीजी स्टूडेंट को उम्र कैद की सजा, मेडिकल स्टूडेंट की हत्या के मामले में दोषी

इस संबंध में मृतका के पिता के बयान पर जादूगोड़ा थाना में 27 जून 2013 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

Bhaskar News| Last Modified - Mar 15, 2018, 02:17 AM IST

RIMS PG student sentenced to life imprisonment for murder
रिम्स पीजी स्टूडेंट को उम्र कैद की सजा, मेडिकल स्टूडेंट की हत्या के मामले में दोषी

घाटशिला/जमशेदपुर.    एमजीएम मेडिकल कॉलेज की छात्रा मधुलता कुमारी (27)  की हत्या के मामले में अतिरिक्त जिला व सत्र न्यायाधीश आलोक कुमार दुबे की अदालत ने बुधवार को  यूसील,जादूगोड़ा के पूर्व डॉक्टर रिपुसूदन प्रसाद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई  है।  इसके अलावा 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। जुर्माने की राशि नहीं जमा करने पर नौ माह अतिरिक्त कारावास की सजा काटनी पड़ेगी। 

 

ये है पूरा मामला

 

हबीबगंज (डालटनगंज)  निवासी मृतका के पिता रामप्रीत राम ने पुलिस को बताया था कि उनकी बेटी एमजीएम मेडिकल कॉलेज में फिजियोथेरेपी का कोर्स कर रही थी। इसी दौरान जादूगोड़ा यूसील अस्पताल के डॉ रिपुसुदन प्रसाद (गुमला के दुनडुरिया) के साथ दोस्ती हुई थी। 27 जून 2013 को  वह एमजीएम में परीक्षा देने के बाद डॉक्टर के साथ बाइक पर उसके यूसील के  क्वार्टर (नं केसी 1-3) में गई थी। अगले दिन  क्वार्टर में पंखे से लटकता हुआ उसका शव मिला था। आरोप था कि किसी बात को लेकर दोनों में  अनबन होने पर उसकी हत्या कर शव को डॉ रिपुसूदन ने पंखे से लटका दिया था।  पंखे के सहारे फांसी लगाने की जानकारी उन्हें पुलिस ने दी थी। उसके बाद उन्होंने जादूगोड़ा थाना में डॉक्टर के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया था। डॉक्टर के घर से छात्रा  का शव पुलिस ने बरामद किया था।   

 

2013 में दर्ज की गई थी प्राथमिकी

 

इस संबंध में मृतका के पिता के बयान पर जादूगोड़ा थाना में  27 जून 2013 को  प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसमें डॉ रिपुसूदन प्रसाद को हत्या का आरोपी बनाया गया था। डॉ. रिपुसूदन फिलहाल रांची, रिम्स में पीजी  सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रहा है। हत्या के बाद आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उसके बाद यूसील कंपनी ने उसे यूसील अस्पताल से निलंबित कर दिया था। उसने दो साल पूर्व एक युवती से    शादी कर ली है।   इस मामले में करीब 14 गवाहों की गवाही  के बाद कोर्ट ने तथ्यों के आधार पर डॉ रिपुसूदन को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।  

 

इन बिंदुओं पर डॉक्टर को पाया गया दोषी  

 

- मृत्यु पूर्व अंतिम बार डॉ. रिपुसूदन को मधुलता के साथ देखा गया था  
- फंदे पर लटकते समय युवती का पैर जमीन को छू रहा था  
- कमरे में किसी तरह का टेबल या कुर्सी नहीं था
- आरोपी ताला खोलकर रूम में प्रवेश किया था  
- घटना की सूचना आरोपी ने पुलिस को नहीं दी थी 
- इसके अलावा अन्य बिंदुओं को सजा के लिए आधार माना गया।

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