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5 बार एमपी अौर 4 बार एमएलए, कितनी शादियां कीं गिनती तक याद नहीं

बागुन सुंबरुई की लव स्टोरी ऐसी है कि कई फिल्में बन जाएं।

Danik Bhaskar | Dec 12, 2017, 09:04 AM IST
पत्नी अनीता कुमारी के साथ बागुन बाबू। बागुन मानते हैं कि इतनी शादी कर उन्होंने कई लड़कियों को अपना नाम और नई जिंदगी दी। पत्नी अनीता कुमारी के साथ बागुन बाबू। बागुन मानते हैं कि इतनी शादी कर उन्होंने कई लड़कियों को अपना नाम और नई जिंदगी दी।

जमशेदपुर. बागुन सुंबरुई 1967 से 5 बार झारखंड के चाईबासा से सांसद और 4 बार विधायक रहे। 83 साल के बागुन की झारखंड-बिहार से दिल्ली तक दो खास पहचान है- सर्दी, गर्मी हो या बरसात, वे एक धोती लपेटकर रहते हैं और कितनी शादियां की, गिनती याद नहीं। हालांकि, बताया जाता है कि उन्होंने 58 शादियां कीं। बहरहाल पहली बार इस बात का खुलासा किया कि उन्होंने इतनी शादियां क्यों की?

कहा- कई पत्नियां तो मुझे छोड़कर भी चली गईं

बागुन इतनी शादियों के सवाल पर कहते हैं- "पहले यहां हाट या मेला लगा करते थे। इनमें शामिल होने के लिए आने वाले कारोबारी आदिवासी लड़कियों का हैरेसमेंट करते थे। कई लड़कियां प्रेग्नेंट हो जाती थीं। बहुत झमेला होता था। ऐसी लड़कियों को मैंने अपना नाम देना शुरू किया। उनको सहारा दिया। कई लड़कियों ने मुझे पति बताकर नौकरी की। उनको कोई साथी मिला तो मुझे छोड़कर भी चली गईं। कई लड़कियां जिंदगी में आईं और गईं। कितनों का नाम याद रखें..? न किसी के आने पर एतराज था और न ही किसी के जाने पर।"

1946 अ लव स्टोरी : रेंजर की बेटी से किया प्रेम विवाह

- कोल्हान डिविजन के हेडक्वार्टर चाईबासा के गांधी टोला में रहनेवाले बागुन सुंबरुई की लव स्टोरी ऐसी है कि कई फिल्में बन जाएं। 7वीं पास बागुन और उस वक्त चक्रधरपुर रेलवे स्कूल से मैट्रिक पास दशमती सुंडी की कहानी '1946 अ लव' स्टोरी है।

- दशमती करकट्‌टा की रहने वालीं थीं और बागन बुहथा के। दोनों के परिवारों को रिश्ता कबूल नहीं था। दशमती के पिता रेंजर थे। उन्होंने गांव के लोगों को बागुन की पिटाई करने को कहा। बागुन को ग्रामीणों ने घेर लिया, लेकिन दशमती काे लेकर बागुन चतुराई से चल दिए। दोनों घरों में हंगामा हुआ, फिर शादी कर ली।

- रेंजर ने बागुन के पिता मानकी सुंबरुई पर केस कर दिया। फिर बागुन ने एक केस में ससुरजी को ऐसा फंसाया कि उन्हें पंचायत में 8 बार दामाद- दामाद... कहना पड़ा। इसके बाद दशमती के पिता ने उन्हें दामाद मान लिया। बागुन ने मुक्तिदानी सुंबरुई और अनिता सोय से भी शादी की। अनिता टीचर हैं और अभी वही साथ रहती हैं।

मैं भंवरा भी हूं क्योंकि मुझे फूलों से प्यार है

बागुन ने कहा कि मेरे नाम का अर्थ सारगर्भित है। हो भाषा में 'बा’ यानी फूल और 'गुन’ मतलब गुण। मेरे भीतर भी फूल का गुण है इसलिए नाम है बागुन। मैं भंवरा भी हूं क्योंकि मुझे फूलों से प्यार है। मेरे घर के आंगन में गुलाबी और सफेद गुलाब हैं। इन पौधों को रोपने वाले का नाम भी फूल है। फूलसिंह सोय। वह आज भी मेरे साथ ही रहती है।

बाबा रामदेव से मिलकर मेरे खुले शरीर का राज बताऊंगा

बागुन के शरीर पर सालोंभर धोती रहती है। बागुन कहते हैं कि एक धोती पहन गांधीजी ने देश को आजाद करा दिया। बिनोवा भावे भी खुले बदन रहे। मैंने बिहार, छत्तीसगढ़, प. बंगाल, ओडिशा को मिलाकर झारखंड की लड़ाई की थी, तबसे खुला बदन रहने लगा। बाबा रामदेव ने मेरे खुले शरीर का राज पूछा था। उनसे मिलकर यह राज बाबा को बताऊंगा।

सुम्ब्रुई, 16108 शादियां करने वाले भगवान कृष्ण को अपना प्रेरणा का स्त्रोत मानते हैं। सुम्ब्रुई, 16108 शादियां करने वाले भगवान कृष्ण को अपना प्रेरणा का स्त्रोत मानते हैं।
चाहे सर्दी हो या गर्मी या फिर बरसात का मौसम; बागुन बाबू सिर्फ धोती ही पहनते हैं। चाहे सर्दी हो या गर्मी या फिर बरसात का मौसम; बागुन बाबू सिर्फ धोती ही पहनते हैं।
अपने दो कमरों के बाहर आंगन में खड़े हुए पूर्व सांसद बागुन सुम्ब्रुई। अपने दो कमरों के बाहर आंगन में खड़े हुए पूर्व सांसद बागुन सुम्ब्रुई।
बागुन बाबू की पहली शादी 1942 में हुई थी और अब उनके कई बेटे-बेटियां और पोते-पोतियां हैं। बागुन बाबू की पहली शादी 1942 में हुई थी और अब उनके कई बेटे-बेटियां और पोते-पोतियां हैं।
खराब सेहत के चलते बागुन सुम्ब्रुई ने 2004 में जीतने के बाद कोई चुनाव नहीं लड़ा। खराब सेहत के चलते बागुन सुम्ब्रुई ने 2004 में जीतने के बाद कोई चुनाव नहीं लड़ा।
उन्हें झारखंड राज्य के पहले विधानसभा उपाध्यक्ष बनने का भी गौरव प्राप्त हुआ था। उन्हें झारखंड राज्य के पहले विधानसभा उपाध्यक्ष बनने का भी गौरव प्राप्त हुआ था।