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दहेज के लिए ससुरालवालों ने निकाला, अब कारोबार खड़ा कर कमा रही सालाना लाखों

शादी के 8 महीने बाद ही ससुराल से निकाले जाने से नई नवेली दुल्हन घबराई नहीं।

राजेश सिंह | Last Modified - Jan 22, 2018, 04:04 AM IST

घाटशिला.शादी के बाद महज एक लाख रुपए दहेज नहीं देने पर आठ माह बाद ही शहर की एक लड़की को ससुरालवालों ने घर से निकाल दिया। इससे नई नवेली दुल्हन घबराई नहीं। उसने ससुरालवालों के सामने गिड़गिड़ाने के बजाय अपने पैरों पर खड़े होकर महज चार साल में बड़ा कारोबार खड़ा कर लिया। अब वह किसी परिचय की मोहताज नहीं, बल्कि सालाना 21 लाख रुपए का कारोबार कर रही है। यहीं नहीं उसने अपने साथ 85 महिलाओं को सीधे रोजगार से जोड़ रखा है। वह महिलाओं को प्रशिक्षण भी दे रही है।

2014 में की कारोबार की शुरुआत, कई महिलाओं को जोड़ा
शहर के गोपालपुर मुहल्ला निवासी रिटायर शिक्षक प्रबोध कुमार साव की बेटी मधुमिता साव ( 22) की 2012 में पश्चिम बंगाल के गोपीबल्लभपुर में शादी हुई। ससुरावालों ने दहेज के लिए उसे काफी प्रताड़ित किया। एक शिक्षक की बेटी इतना दहेज कहां से लाती। नतीजतन ससुरालवालों ने उसे घर छोड़ कर जाने को विवश कर दिया। मायके में बैठने के बजाय मधुमिता ने कुछ करने की ठानी। यहां पर उसने वुड हैंडीक्राफ्ट का बिजनेस शुरू किया। 2014 में कारोबार शुरू की तथा उसका नाम पीपल ट्री दिया। इस बैनर तले उसने महिलाओं को रोजगार से जोड़ना शुरू किया। धीरे-धीरे 85 महिलाएं उसके साथ जुड़ गईं। इस काम में उसका छोटा भाई उत्पल साव ने भी भरपूर मदद की। उसके जुड़ने के बाद बिजनेस न केवल शहर से बढ़ा, बल्कि मेट्रो सिटी में भी अमिट छाप छोड़ रहा है।

महिलाओं को रोजगार के साथ मिल रही शोहरत
पत्तों की ज्वेलरी, घास से बने आकर्षक बर्तन, लकड़ी से निर्मित खूबसूरत गिफ्ट आइटम, काले पत्थर से बने शिवलिंग व पशु …..यह सब एेसे आइटम हैं जिन्हें देखने वाला बस देखता ही रह जाता है। नजर इससे हटती नहीं है। हस्तनिर्मित वस्तुएं हर किसी का मन मोह लेती हैं। मधुमिता की हस्तकला कलाकारों को न सिर्फ आजीविका प्रदान करती है, बल्कि उन्हें शोहरत भी दिलाती है। इससे जुड़ी महिलाएं स्क्रैप लकड़ियों को खूबसूरत रूप देने में जुटी हैं। गम्हार, सागवान, आदि से आकर्षक वॉल हैंगिंग, की रिंग, पेन स्टैंड, टेबल स्टैंड व कई अन्य तरह के गिफ्ट आइटम तैयार कर महिलाओं ने स्वावलंबन की राह चुनी है। इस ग्रुप में स्कूल जानेवाली लड़की से लेकर गृहिणी तक जुड़ी हुई है। महिलाएं कच्चा माल घर लेकर जाती हैं और आर्डर के अनुसार उसे बनाती हैं। मधुमिता की संस्था की ओर से चार स्टॉल रांची, जमशेदपुर, बोकारो तथा धनबाद में लगाया गया है। अब खास बात यह है कि वुड हैंडीक्राफ्ट का प्रशिक्षण देने के साथ-साथ महिलाओं के लिए बड़े-बड़े शहरों के शॉपिंग मॉल में स्टॉल खोल कर रोजगार दिया जा रहा है। वुड हैंडीक्राफ्ट में प्रोडक्ट का मेकिंग के साथ-साथ डिजाइनिंग भी खुद महिलाएं करती हैं। यही कारण है की ढाई साल में यह संस्था 3 महिलाओं से शुरू की गई। अब उनकी संख्या 85 तक पहुंच गई। इस संबंध में मधुमिता ने बताया कि शुरुआती दिनों में डोर टू डोर जाकर भी सेल करना पड़ा। मेले में किसी एक कोने में छोटा सा टेबल लेकर लोग.ों को प्रोडक्ट के बारे में और अपनी संस्था के बारे में जानकारी दी गई।

ढाई साल में मधुमिता के कामों का परिणाम

- ग्रामीण महिलाओं को अपने ही गांव में बैठकर रोजगार मिला
- महिला सशक्तिकरण हुआ एवं पलायन रुका
- ग्रामीण आर्थिक व्यवस्था में सुधार आया
- स्किल एंड टेक्नोलॉजी गांव गांव तक पहुंचाने का काम किया

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Web Title: dhej ke liye ssuraaloveaalon ne nikalaa, ab karobaar khada kar kmaa rhi saalaanaa laakhon
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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