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एलईडी स्ट्रीट लाइट के लिए 8 लाख मिले, 2 लाख में काम पूरा, नेता व अफसर गटक गए 6 लाख रुपए

चरणजीत सिंह

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 02:35 AM IST
चरणजीत सिंह
उत्तरी कीताडीह पंचायत में एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने में लाखों बर्बाद कर दिए गए हैं। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों में इसे लेकर रोष भी है। मुखिया ने इस कार्य में मनमानी की है। विभागीय अधिकारियों की मिली भगत से 8 हजार 614 रुपए में एक एलईडी खरीदी गई। उत्तरी कीताडीह पंचायत में ही केवल 94 एलईडी लगाई गई हैं। दबी जुबां में जनप्रतिनिधि कहते हैं कि 22 सौ रुपए में हेवल्स कंपनी की अच्छी और टिकाउ स्ट्रीट एलईडी लगाई जा सकती थी।

इस कार्य के लिए न तो टेंडर निकाला गया। प्रावधान है कि ढाई लाख की ऊपरी योजना के लिए टेंडर किया जाना पड़ता है। इसके लिए पंचायत के सभी सदस्य, उप-मुखिया के साथ बैठक कर प्रस्ताव पारित किया जाना है लेकिन लाखों की योजना पर सारे नियमों की धज्जियां उड़ा दी गई।

दर्जनों से ज्यादा लाइटें खराब

दर्जनों से ज्यादा लाइटें जलती ही नहीं। वे खराब हो चुकी है। जबकि मूल्य में ही छह रुपए मेंटनेंस चार्ज सालाना लिया गया था। मामला उठता है कि जब लाइटें खराब हैं तो उन्हें बनवाना किसकी जिम्मेदारी है।

DB Star EXPOSE

सेंसर गायब, स्विच लगाए गए

एलईडी लाइट की कीमत में सात सौ रुपए सेंसर के लिए इनक्ल्यूड किए गए हैं। इससे ऑटोमेटिक लाइट चालू व बंद होती हैं। जब डीबी स्टार टीम ने शिकायत पर इसकी जांच की तो पाया गया कि उसमें सेंसर है ही नहीं। स्विच लगाकर उन्हें ऑफ आन करना पड़ता है।

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जांच होगी तो फंसेंगे अधिकारी व प्रतिनिधि

यह तो केवल उत्तरी कीताडीह पंचायत का मामला है। बताया जाता है कि 55 पंचायतों में कुछ को छोड़ लगभग सभी पंचायतों में एलईडी स्ट्रीट लाइट की खरीददारी की गई। सभी में अलग-अलग रेट से खरीददारी दिखाई गई है। यह सब कमीशन के चक्कर में जन प्रतिनिधियों ने ब्लॉक के अधिकारियों से सांठगांठ कर किया। जिस तरह सोलर लाइट खरीददारी में अनियमितता पकड़ी गई थी उसी तरह इस मामले की भी जांच होती है तो कई अधिकारी व जनप्रतिनिधि फंसेंगे।

लाइट के मिले आठ लाख, लेकिन दो लाख में हुई खरीदी : उत्तरी कीताडीह पंचायत में 8 लाख 9 हजार 716 रुपए की स्ट्रीट लाइट खरीदी गई है। स्थानीय जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों ने सांठगांठ कर मात्र दो लाख रुपए खर्च कर सस्ती एलईडी लाइट लगाकर पैसे गटक लिए। प्रखंड कार्यालय परिसर में मंडराने वाले बिरसानगर निवासी गुप्ता जी की मौजूदगी में लाइट खरीदी गई है।

छुटभैये नेता और ठेकेदार मिलकर करते हैं गड़बड़ी

जांच में यह बात सामने आई है कि स्थानीय छुटभैये नेता और ठेकेदार की मिलीभगत से कागजों पर एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने का काम पूरा कर लिया गया है। खरीददारी के नाम पर जमकर गड़बड़झाला हुआ है। इसकी जानकारी अफसरों को है, मगर कार्रवाई के नाम पर नतीजा सिफर है। सस्ती कीमत वाली एलईडी लगा दी गई है। एलईडी के नाम पर भ्रष्टाचार हुआ है। जिला प्रशासन के आलाधिकारी मामले की जांच की बात कह रहे हैं।

एलईडी लाइट का कैशमेमो।

शुरुआत में जेई बनाते हैं ओवर इस्टीमेट

जेई किसी भी योजना के लिए ओवर इस्टीमेट बना देतेे हैं। हंगामा होने के बाद जब मामला फंसता है तो तत्काल इस्टीमेट रद्द कर दिया जाता है। इसके बाद नया इस्टीमेट बनाया जाता है। हर इस्टीमेट में 50 हजार से एक लाख रुपए ज्यादा भरा जाता है। इसकी भी जांच होने से दूध मामले का उद्भेदन होगा।

दोषियों को नहीं छोड़ेंगे

 उत्तरी कीताडीह पंचायत में एलईडी स्ट्रीट लाइट लगाने की जांच की जाएगी। इस मामले में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।  विश्वनाथ महेश्वरी, डीडीसी

मुझे जानकारी नहीं है

सभी योजना दो लाख के आसपास है। इसके लिए टेंडर नहीं होता। गड़बड़ी के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है।  रीना जारिका, मुखिया, उत्तरी कीताडीह पंचायत