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एचआरडी की लेटलतीफी के कारण 24 हाई स्कूल, 12 प्लस टू स्कूलों को फंड के लिए करना होगा एक साल इंतजार, शिक्षकों का वेतन फंसा

एजुकेशन रिपोर्टर | जमशेदपुर राज्य मानव संसाधन विकास विभाग (एचआरडी) की लेटलतीफी की वजह से जिले के स्थापना अनुमति...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:40 AM IST

एचआरडी की लेटलतीफी के कारण 24 हाई स्कूल, 12 प्लस टू स्कूलों को फंड के लिए करना होगा एक साल इंतजार, शिक्षकों का वेतन फंसा
एजुकेशन रिपोर्टर | जमशेदपुर

राज्य मानव संसाधन विकास विभाग (एचआरडी) की लेटलतीफी की वजह से जिले के स्थापना अनुमति प्रस्वीकृति प्राप्त 24 हाई स्कूलों और 12 प्लस-2 स्कूलों को मिलने वाले फंड के लिए अब एक साल तक इंतजार करना पड़ेगा।

नियमत: वित्तीय वर्ष से पहले सरकार इन स्कूलों को अनुदान दे देती है। इस बार भी एचआरडी ने 2.70 करोड़ रुपए का अनुदान इन विद्यालयों के लिए जारी किया। लेकिन राशि आवंटन 31 मार्च को रात 8 बजे किया गया। तब तक ट्रेजरी ऑफिस बंद हो गए। इस वजह से पूर्वी सिंहभूम समेत राज्य के किसी भी जिले में स्कूलों को राशि जारी नहीं हो पाई। इस राशि के नहीं मिलने से इन स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों का वेतन भी फंस गया है, क्योंकि विद्यालय प्रबंधन सरकार से मिले अनुदान से कई शिक्षकों की भुगतान करता हैै।

शर्तें भी नहीं हो पाई थीं पूरी

एचआरडी ने इन विद्यालयों को जो अनुदान जारी किया था, उसे संबंधित स्कूलों को देने से पहले जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय द्वारा संबंधित स्कूलों का भौतिक सत्यापन कर उनकी आधारभूत संरचना, जमीन की स्थिति, शिक्षकों की संख्या समेत अन्य बिंदुओं पर रिपोर्ट एचआरडी को देनी थी। लेकिन इसके लिए जो समय दिया गया था, वह इतना कम था कि उसे समय पर पूरा नहीं किया जा सकता था। इस वजह से भी राशि का भुगतान नहीं हुआ।

यह होगा प्रभाव : स्कूलों की माने तो उनको पिछले वित्तीय वर्ष का अनुदान नहीं मिलने से बहुत नुकसान होगा। इस अनुदान में एक स्कूल के 6 से 10 लाख रुपए तक मिलते। इस राशि से शिक्षकों को वेतन भुगतान के अलावा आधारभूत संरचना के विकास कार्य किए जाते। अब उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि वे यह सब कैसे करेंगे।

को-ऑपरेटिव कॉलेज के छात्रों ने कहा- बाहरी व्यक्ति को कार्यालय में घुसने नहीं देंगे, कॉलेज के किसी शिक्षक को दी जाए प्रिंसिपल की जिम्मेदारी

जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज में नए प्रिंसिपल की प्रक्रिया भले ही कोल्हान विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरी नहीं की है, लेकिन कॉलेज परिसर में इसे लेकर सरगर्मी बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार, प्रीमियर कॉलेज होने की वजह से केयू प्रशासन को-ऑपरेटिव कॉलेज में स्थायी प्रिंसिपल के पदस्थापना की सोच रहा है। लेकिन इसकी सूचना बाहर आते ही कॉलेज के छात्र भड़क गए हैं। रविवार को छात्रावास में रहने वाले कई विद्यार्थियों ने एनएसयूआई के हरेराम टुडू की अध्यक्षता में बैठक कर बाहरी व्यक्ति के प्रिंसिपल पद पर पदस्थापन का विरोध करने का निर्णय लिया। छात्रों के अनुसार, बाहरी व्यक्ति की जगह कॉलेज के ही किसी वरिष्ठ शिक्षक को प्रिंसिपल का प्रभार मिलना चाहिए। यदि किसी बाहरी शिक्षक को प्रिंसिपल बनाया गया तो इसका विरोध किया जाएगा। मालूम हो कि कॉलेज के प्रभारी प्रिंसिपल डॉ एमआर सिन्हा के 31 मार्च को रिटायर होने के बाद कॉलेज में प्रिंसिपल का पद खाली हो गया है।

इसलिए को-ऑपरेटिव कॉलेज का प्रिंसिपल बनना चाहते हैं बाहरी शिक्षक

को-ऑपरेटिव कॉलेज में प्रिंसिपल की खाली कुर्सी पर बैठने के लिए कई स्थायी व दूसरे शिक्षक दौड़ में शामिल हो गए हैं। इसकी मुख्य वजह इस संस्थान को प्रीमियम कॉलेज के रूप में मिलने वाली 16 करोड़ की राशि है। कॉलेज में कई वरिष्ठ शिक्षक हैं जो प्रिंसिपल बनने के योग्य हैं। लेकिन उन पर बाहरी प्रिंसिपलों व शिक्षकों की पैरवी भारी पड़ रही है।

विलंब के कारण लेट से शुरू होगा नया सत्र

समय पर वार्षिक मूल्यांकन (एसएस-2) नहीं होने के कारण सरकारी प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में एक अप्रैल से नया सत्र प्रारंभ नहीं हो सका। कई शिक्षकों ने बताया- शिक्षा विभाग ने पहले 22 मार्च से परीक्षा की तिथि जारी की थी, लेकिन मैट्रिक-इंटर की परीक्षा के कारण नई तिथि 5 अप्रैल कर दी गई। इस कारण एक अप्रैल से नया सत्र शुरू नहीं हो सका। नई रुटीन के अनुसार, कक्षा -3 से सात तक की परीक्षा दाे पालियों में 5 से 7 अप्रैल तक होगी और रिजल्ट 15 तक घोषित होगा। नया सत्र विलंब से आरंभ होगा।

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