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सरकारी प्राइमरी स्कूलों के बच्चे पहले पास हो जाएंगे, फिर होगी पिछली कक्षा की परीक्षा

एजुकेशन रिपोर्टर | जमशेदपुर लगभग हर मंच पर नेता और अधिकारी बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन दिलाने की बात करते हैं।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:40 AM IST

सरकारी प्राइमरी स्कूलों के बच्चे पहले पास हो जाएंगे, फिर होगी पिछली कक्षा की परीक्षा
एजुकेशन रिपोर्टर | जमशेदपुर

लगभग हर मंच पर नेता और अधिकारी बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन दिलाने की बात करते हैं। निजी स्कूलों से आगे निकलने की बातें कही जाती हैं। लेकिन, जरा सोचिए, जो विद्यार्थी पहले ही अगली कक्षा में प्रवेश कर जाए, उसके लिए पिछली कक्षा की परीक्षा का कितना महत्व रह जाएगा। लेकिन, झारखंड में ऐसा ही हो रहा है। पहले बच्चे अगली कक्षा में प्रवेश कर जाएंगे, तब वे पिछली कक्षा की परीक्षा (मूल्यांकन) में बैठेंगे। वे पास हों या न हों अगली कक्षा में प्रवेश पहले से ही तय है।

बात है झारखंड के सरकारी प्राइमरी स्कूलों की। इन स्कूलों को दो अप्रैल से नया सत्र शुरू करने का निर्देश दिया जा चुका है। लेकिन, अब तक रिजल्ट निकलना तो दूर, इन स्कूलों की वार्षिक परीक्षा भी नहीं हुई है। प्राइमरी स्कूलों की वार्षिक (एनुअल) परीक्षा पांच से सात अप्रैल तक आयोजित किए जाने की तिथि तय है। जो लोग निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा देने की बात करते हैं, वे यह जान लें कि निजी स्कूलों में वार्षिक परीक्षा तो ही गई है, रिजल्ट जारी किए जाने के साथ ही बच्चों को रिपोर्ट कार्ड भी दिया जा चुका है। अधिकतर निजी स्कूलों में एडमिशन पूरा हो चुका है। इन स्कूलों में चार अप्रैल से नए सत्र की कक्षाएं भी शुरू हो रही हैं।

डीएसई बोले- अधिकतर शिक्षक बोर्ड एग्जाम में लगाए गए थे, इस वजह से हुई देरी

पहली और दूसरी कक्षा की लिखित परीक्षा ही नहीं होती

सरकारी स्कूलों में पहली और दूसरी कक्षा की परीक्षा ही आयोजित नहीं की जाती है। इन कक्षाओं के बच्चों को सीधे अगली कक्षाओं में प्रमोट कर दिया जाता है। ऐसे में इनका सही मूल्यांकन कैसे किया जा सकता है, यह अहम सवाल है। परीक्षा नहीं लिए जाने के कारण इन दोनों कक्षाओं के बच्चे कभी पढ़ाई पर ध्यान ही नहीं देते। सरकारी स्कूलों में देखा जाता है कि पहली और दूसरी कक्षा के बच्चे पढ़ने कम एमडीएम की खिचड़ी खाने के लिए ज्यादा भीड़ लगाते हैं।

क्या है मामला

राज्य के सरकारी स्कूलों का सत्र एक अप्रैल से शुरू होता है, जो 31 मार्च को खत्म हो जाता है। एक अप्रैल से बच्चे नए सत्र की पढ़ाई में लग जाते हैं। परंतु इस बार झारखंड के सरकारी स्कूलों में 8वीं बोर्ड को छोड़ किसी भी कक्षा की परीक्षा अबतक आयोजित नहीं की जा सकी है। जेसीईआरटी के निदेशक के पत्र की मानें तो एक से नया सत्र शुरू होगा। पहली और दूसरी का मौखिक मूल्यांकन और तीसरी से 7वीं तक का लिखित मूल्यांकन पांच अप्रैल से होना है। तब, तक सभी बच्चे किस क्लास में बैठेंगे? इन्हें खाना कहांं से और कौन खिलाएगा? तय नहीं है।

40हजार स्कूलों में पढ़ते हैं करीब 23लाख बच्चे

7वीं तक के बच्चों को नहीं रोकना है, चाहे पढ़ाई में कमजोर ही हो

शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत पहली से सातवीं कक्षा तक के बच्चों को हर हाल में उसी कक्षा में नहीं रोकना है, चाहे वे पढ़ाई में कितना भी कमजोर क्यों न हों। ऐसे में इन कक्षाओं के बच्चों के लिए परीक्षा का कोई मतलब भी नहीं रह जाता। यदि इनकी परीक्षा लेकर अगली कक्षा में प्रवेश देने का नियम होता तो इन्हें पढ़ानेवाले शिक्षकों का भी मूल्यांकन आसानी से हो पाता। इससे पता चलता कि जिन शिक्षकों मानदेय या वेतन के नाम पर मोटी रकम दी जाती है, उसका सदुपयोग हो रहा है कि नहीं। लेकिन परीक्षा नहीं लेने से शिक्षक भी निश्चिंत रहते हैं।

मजाक बना दिया गया है : अरुण सिंह

शिक्षक नेता अरुण सिंह के अनुसार, नो डिटेंशन के तहत हर हाल में बच्चों को अगली कक्षा में प्रमोट करना ही है। एक तरह से यह शिक्षा व्यवस्था का मजाक है। उन्होंने कहा कि कम-से-कम पांचवीं और आठवीं कक्षा में कमजोर बच्चों को रोका जाना चाहिए, ताकि वे भविष्य में और बेहतर तैयारी कर अगली कक्षा में जा सकें।

इस बार मध्य विद्यालयों के भी बड़ी संख्या में शिक्षक बोर्ड एग्जाम में लगाए गए थे। प्राइमरी स्कूलों का मूल्यांकन एग्जाम लेने में देरी हुई है। पांच से सात अप्रैल तक तीसरी से सातवीं कक्षा के बच्चों का एग्जाम ले लिया जाएगा। हालांकि नया सत्र दो अप्रैल से शुरू हो जाएगा।

-बांके बिहारी सिंह जिला शिक्षा अधीक्षक, जमशेदपुर

राज्य के 40 हजार स्कूलों में तीसरी से 7वीं कक्षा तक लगभग 23 लाख बच्चे पढ़ रहे हैं। इनकी परीक्षा 22 मार्च से होनी थी। लेकिन, समय पर प्रश्न पत्र की छपाई नहीं होने के कारण परीक्षा की तिथि बढ़ा दी गई। ऐसे में अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूलों की बराबरी की बात करना बेमानी ही तो है।

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