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भवन निर्माण व स्वास्थ्य विभाग के दाव-पेंच में अटका निर्माण; फंड लैप्स, ड्रेनेज की स्थिति जस की तस

डीबी स्टार

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 02:55 AM IST
डीबी स्टार
महात्मा गांधी मेमोरियल अस्पताल में ड्रेनेज सिस्टम, जलापूर्ति, लाॅन्ड्री समेत बिजली आदि दुरुस्त करने के लिए 16.86 करोड़ रुपए जारी हुआ था। तीन किस्तों में फंड का अावंटन हुआ। भवन निर्माण विभाग को ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त करने का जिम्मा दिया गया, लेकिन तकनीकी कारणों का हवाला देकर काम करने में लेतलाली कर दी। नतीजा यह हुआ कि विकास कार्य किए बगैर फंड लैप्स हो गया। डीबी स्टार की पड़ताल में पता चला कि 25 जनवरी को पहली किस्त

के रूप में तकरीबन 12.16 करोड़ रुपए मिला था। इसी तरह और दो किस्त जारी हुई थी।

हर आवंटन पत्र में उल्लेख था कि टेंडर प्रक्रिया के जरिए काम होगा। मगर जिम्मेदार अफसरों ने आदेश की अनदेखी कर दी। एमजीएम अस्पताल की हालत जस की तस है। मसलन इस बार फिर तेज बारिश हाेने पर एमजीएम अस्पताल के बर्न, इमरजेंसी वार्ड, प्रशासनिक भवन समेत ग्राउंड फ्लोर में जलजमाव की समस्या होगी। एक साल पहले एमजीएम की बदहाल स्थिति को देखकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई थी। स्वत: संज्ञान लिया था। तत्काल व्यवस्था को दुरुस्त करने का निर्देश दिया था, लेकिन संबंधित विभाग के अफसरों ने ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा। आठ माह पहले सिर्फ ड्रेनेज सिस्टम के लिए 80 लाख रुपए मिला था। वह भी लैप्स हो गया है। अस्पताल के उपरी तल्ले में पाइपलाइन में गड़बड़ी है। इस मद में 40 लाख रुपए दिए गए थे। वह भी विभागीय दाव-पेंच में फंस कर लैप्स हो गया है। जुस्को की ओर से अस्पताल के बगल में नया गोलचक्कर का निर्माण किया गया है। अस्पताल की फर्श से गोलचक्कर की ऊंचाई ज्यादा है। ऐसे में एक तो ड्रेनेज उपर से बाहर का पानी अस्पताल में प्रवेश करेगा। पहले मेन रोड का पानी बाराद्वारी की ओर चला जाता था अब सीधे अस्पताल परिसर में जाएगा। इस बार जोरदार बारिश होने पर अस्पताल में पानी का सैलाब आना तय है। पिछले साल अस्पताल के बर्न, इमरजेंसी समेत अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर 8 से अधिक बार पानी घुसा था। यह खबर स्थानीय अखबारों में छपने पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर अस्पताल की वस्तुस्थिति की रिपोर्ट मांगी थी। जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने अक्टूबर, 2017 में कोर्ट में हलफनामा दायर कर व्यवस्था ठीक करने का भरोसा भी दिया था। अस्पताल प्रशासन से प्रस्ताव लेकर अस्पताल के ड्रेनेज व जलापूर्ति व्यवस्था ठीक करने के लिए लगभग 1.20 करोड़ रुपए फंड की मंजूरी मिली। लेकिन भवन निर्माण विभाग द्वारा आठ महीने बाद भी काम नहीं कराया

DB Star expose

मेडिसिन, सर्जरी, गायनिक समेत ऊपरी तल्ले में पाइप लाइन की नहीं हुई मरम्मत, पानी के लिए भटकेंगे मरीज

इस राशि का उपयोग हो चुका है

73 लाख

नए भवन में बिजली कनेक्शन के लिए जुस्को को

डीबी स्टार
महात्मा गांधी मेमोरियल अस्पताल में ड्रेनेज सिस्टम, जलापूर्ति, लाॅन्ड्री समेत बिजली आदि दुरुस्त करने के लिए 16.86 करोड़ रुपए जारी हुआ था। तीन किस्तों में फंड का अावंटन हुआ। भवन निर्माण विभाग को ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त करने का जिम्मा दिया गया, लेकिन तकनीकी कारणों का हवाला देकर काम करने में लेतलाली कर दी। नतीजा यह हुआ कि विकास कार्य किए बगैर फंड लैप्स हो गया। डीबी स्टार की पड़ताल में पता चला कि 25 जनवरी को पहली किस्त

के रूप में तकरीबन 12.16 करोड़ रुपए मिला था। इसी तरह और दो किस्त जारी हुई थी।

हर आवंटन पत्र में उल्लेख था कि टेंडर प्रक्रिया के जरिए काम होगा। मगर जिम्मेदार अफसरों ने आदेश की अनदेखी कर दी। एमजीएम अस्पताल की हालत जस की तस है। मसलन इस बार फिर तेज बारिश हाेने पर एमजीएम अस्पताल के बर्न, इमरजेंसी वार्ड, प्रशासनिक भवन समेत ग्राउंड फ्लोर में जलजमाव की समस्या होगी। एक साल पहले एमजीएम की बदहाल स्थिति को देखकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई थी। स्वत: संज्ञान लिया था। तत्काल व्यवस्था को दुरुस्त करने का निर्देश दिया था, लेकिन संबंधित विभाग के अफसरों ने ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा। आठ माह पहले सिर्फ ड्रेनेज सिस्टम के लिए 80 लाख रुपए मिला था। वह भी लैप्स हो गया है। अस्पताल के उपरी तल्ले में पाइपलाइन में गड़बड़ी है। इस मद में 40 लाख रुपए दिए गए थे। वह भी विभागीय दाव-पेंच में फंस कर लैप्स हो गया है। जुस्को की ओर से अस्पताल के बगल में नया गोलचक्कर का निर्माण किया गया है। अस्पताल की फर्श से गोलचक्कर की ऊंचाई ज्यादा है। ऐसे में एक तो ड्रेनेज उपर से बाहर का पानी अस्पताल में प्रवेश करेगा। पहले मेन रोड का पानी बाराद्वारी की ओर चला जाता था अब सीधे अस्पताल परिसर में जाएगा। इस बार जोरदार बारिश होने पर अस्पताल में पानी का सैलाब आना तय है। पिछले साल अस्पताल के बर्न, इमरजेंसी समेत अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर 8 से अधिक बार पानी घुसा था। यह खबर स्थानीय अखबारों में छपने पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर अस्पताल की वस्तुस्थिति की रिपोर्ट मांगी थी। जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने अक्टूबर, 2017 में कोर्ट में हलफनामा दायर कर व्यवस्था ठीक करने का भरोसा भी दिया था। अस्पताल प्रशासन से प्रस्ताव लेकर अस्पताल के ड्रेनेज व जलापूर्ति व्यवस्था ठीक करने के लिए लगभग 1.20 करोड़ रुपए फंड की मंजूरी मिली। लेकिन भवन निर्माण विभाग द्वारा आठ महीने बाद भी काम नहीं कराया

एमजीएम की व्यवस्था सुधारने को मिले 16.86 करोड़ रुपए लैप्स, खर्च करने के लिए अधीक्षक ने विभाग से मांगा समय, लेकिन नहीं मिली मोहलत

इन कामों के लिए मिला था फंड, हो गया लैप्स

80 लाख रुपए

ड्रेनेज सिस्टम

75 लाख

सीएसएसडी

3.75 करोड़ रुपए - ऑक्सीजन गैस प्लान व पाइपलाइन बिछाने के लिए

01 करोड़

1000 केवीए का ट्रांसफॉर्मर

50 लाख - नए भवन, उपकरण और हास्पिटल फर्नीचर के लिए

15 लाख

इलेक्ट्रिकल ब्रेकर

50 लाख - हॉस्पिटल का एप्लिकेशन अौर उपकरण का बदलाव

1.5 करोड़

बर्न यूनिट के लिए फर्नीचर और उपकरण

2.5 करोड़ - गायनिक विभाग को शिफ्ट करने व पुराने भवन की मरम्मत के लिए

2.18 करोड़ अन्य मद में

अस्पताल के पास बन रहे ऊंचे गोलचक्कर बरसात का पानी सीधे अस्पताल परिसर में घुसेगा

40 लाख रुपए

जलापूर्ति व्यवस्था

75 लाख

लांड्री के लिए

1.038 करोड़

बिजली तार बदलने के लिए

75 लाख

पानी पाइप की मरम्मत

75 लाख

अलग-अलग नए भवन में फर्नीचर का इंतजाम करना था

राशि समायोजन न होने पर लौटाना होंगे पैसे

एमजीएम के लिए वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए 18,81,46,000 करोड़ रुपये फंड का आवंटन हुआ था। विभिन्न किस्तों में फंड जारी हुआ था। 25 जनवरी को पहली किस्त

के रूप में तकरीबन 12.16 करोड़ रुपए मिला था। दूसरी किस्त ढाई करोड़ और तीसरी किस्त 2.18 करोड़ रुपये का आवंटन क्रमश: फरवरी के पहले और दूसरे सप्ताह में हुआ था। हर आवंटन पत्र में उल्लेख है कि राशि का उपयोग टेंडर प्रक्रिया के जरिए होगा। साथ ही, इस बात का भी जिक्र था कि राशि समायोजन न होने पर 31 मार्च तक पैसा लौटाना होगा। टेंडर प्रक्रिया में लगभग डेढ़ माह का समय लगता है।

इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए देरी से मिला फंड

 ड्रेनेज सिस्टम और जलापूर्ति व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए फंड मिला था, लेकिन उसका उपयोग नहीं हुआ। इसलिए फंड लैप्स हो गया। हरेक साल तेज बारिश होने पर अस्पताल में पानी घुसने की समस्या आम है। ड्रेनेजे सिस्टम व्यवस्थित करने के लिए भवन निर्माण विभाग को लगभग 50 बार फोन किया गया। आदमी भेजकर चेज कराने की बात कही गई। फिर भी कार्रवाई नहीं हुई। बरसात में बर्न वार्ड समेत दूसरे वार्डों में पानी घुसने की जो गंभीर समस्या है उसका निराकरण नहीं हो सका।  डॉ. बी. भूषण, अधीक्षक एमजीएम अस्पताल