• Home
  • Jharkhand
  • Jamshedpur
  • रंगों का त्योहार होली कल, आज शाम 6.58 बजे के बाद होगा होलिका दहन
--Advertisement--

रंगों का त्योहार होली कल, आज शाम 6.58 बजे के बाद होगा होलिका दहन

होली के रंगों से सराबोर होने को सब तैयार हैं, बस इंतजार है तो बुराई पर अच्छाई की जीत यानी होलिका दहन का। फाल्गुन...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 03:15 AM IST
होली के रंगों से सराबोर होने को सब तैयार हैं, बस इंतजार है तो बुराई पर अच्छाई की जीत यानी होलिका दहन का। फाल्गुन पूर्णिमा पर एक मार्च से होली शुरू होगी। दो दिवसीय होली के पहले दिन गुरुवार को होलिका दहन किया जाएगा। वहीं, दूसरे दिन शुक्रवार को लोग होली खेलने के साथ एक-दूसरे को पर्व की शुभकामना देंगे। ज्योतिषाचार्य पंडित रमेश कुमार उपाध्याय शास्त्री के अनुसार 28 फरवरी की सुबह 9.58 बजे चतुर्दशी शुरू हुई, जो एक मार्च की सुबह 7.53 बजे समाप्त होगी। सुबह में 7.53 बजे तक भद्रा लगेगी। शाम 6.58 बजे के बाद भद्रा समाप्त होने पर होलिका दहन होगा। वहीं, दो मार्च की सुबह होलिका दहन का भस्म धारण कर होली खेली जाएगी।

यहां होगा होलिका दहन : गुजराती सनातन समाज, सत्यनारायण मारवाड़ी मंदिर के सामने, जुगसलाई बाटा चौक, अग्रसेन भवन के सामने, आमबागान, सोनारी एरोड्रम के सामने, भाटिया बस्ती, टेल्को, मानगो, साकची, रिफ्यूजी कॉलोनी, नामदा बस्ती व विभिन्न क्षेत्रों में।

होली के रंगों से सराबोर होने को सब तैयार

राशि के अनुसार अगजा में ये सामग्री डालें

मेष अौर वृश्चिक : लकड़ी, गोइठा के अलावा रक्त चंदन व गुड़।

वृष और तुला : मखाना अगजा में डालें।

मिथुन व कन्या : दूब व साबूत मूंग।

कर्क : पान के पत्ते पर दही व मखाना रखकर अगजा में डालें।

सिंह : गुड़ या गुड़ से बने पकवान डालें।

मकर और कुंभ : तिल व उरद डालें।

मीन : मीठा पकवान अगजा में डालें।

होलिका की परिक्रमा से लाभ

होलिका की परिक्रमा करने से अनेक समस्याओं का निवारण होता है। इस क्रम में शत्रु बाधा निवारण के लिए पांच बार, कार्य में सफलता और विवाह के लिए सात बार, स्वास्थ्य लाभ के लिए 11 बार और धन लाभ के लिए 21 बार होलिका की परिक्रमा करनी चाहिए। होलिका दहन से पहले उसकी पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है। होलिका की पूजा के लिए एक लोटा जल, पुष्प, चावल, हल्दी, मूंग, गुलाल व नारियल जरूरी है।

शुभ मुहूर्त व समय

1 मार्च :
होलिका दहन का मुहूर्त शाम 6.58 बजे से रात 11.30 बजे तक।

1 मार्च : पूर्णिमा तिथि आरंभ सुबह 7.53 बजे से।

1 मार्च : महानिशीथ काल तंत्र साधना व पूजा एक मार्च की रात्रि 11 से 12.30 बजे मध्य में।

2 मार्च : पूर्णिमा तिथि समाप्त सुबह 6.03 बजे।

2 मार्च : रंग वाली होली।

ये भी कर सकते हैं