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आवागमन का एकमात्र साधन होती थी बैलगाड़ी

Jamshedpur News - 2 जनवरी 1902 को भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड चेल्म्स फोर्ड साकची आए थे। तब मोटरगाड़ी नहीं थी। उन्हें कालीमाटी...

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 03:25 AM IST
आवागमन का एकमात्र साधन होती थी बैलगाड़ी
2 जनवरी 1902 को भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड चेल्म्स फोर्ड साकची आए थे। तब मोटरगाड़ी नहीं थी। उन्हें कालीमाटी स्टेशन से साकची बैलगाड़ी से लाया गया था। जमशेदजी टाटा के सम्मान में चेल्म्स फोर्ड ने शहर का नाम जमशेदपुर रखा था।

टीएमएच : 1908 में बना टेंट अस्पताल, डाॅ. शांतिराम थे पहले डॉक्टर

1908 में डॉ. शांतिराम चक्रवर्ती के नेतृृत्व में टेंट हॉस्पिटल की शुरुआत की। चोटग्रस्त मजदूरों और बीमार लोगों का टेंट हॉस्पिटल मेंे इलाज होता था। 1910 में जेनरल ऑफिस के बगल में पक्का निर्माण कर हॉस्पिटल बनाया गया। वहां वर्तमान में स्टील सिटी प्रेस है। 2 डॉक्टरों और 9 बिस्तरों से शुरू हुए अस्पताल का नाम साकची हॉस्पिटल रखा गया। 1919 में डॉ. एसएम सेन के नेतृृत्व में हॉस्पिटल का विस्तार हुअा।

कालीमाटी स्टेशन : इक्का-दुक्का पैसेंजर गाड़ियां ही रुकती थी

हावड़ा-मुंबई मुख्य रेलमार्ग पर स्थित कालीमाटी जंक्शन 1910 में एक छोटा सा स्टेशन था। गिनती के पैसेंजर होते थे। इक्का-दुक्का गाड़ियां रुका करती थीं। इसे तब झंडी दिखाने वाले स्टेशन के रूप में जाना जाता था। 2 जनवरी 1919 को इस स्टेशन को नई पहचान मिली। भारत के तत्कालीन वायसराय लार्ड चेल्म्स फोर्ड ने जमशेदजी टाटा के नाम पर ‘कालीमाटी’ रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर ‘टाटानगर’ रखा था।

1921 की जनगणना में जमशेदपुर की आबादी 57 हजार थी जो 2018 में 14 लाख पार कर गई

जेएन टाटा के सपनों के शहर जमशेदपुर ने 100 साल में काफी तरक्की की। व्यवस्था में सुधार और खुद में बदलाव लाने की कला शहर से सीखी जा सकती है। आैद्योगिक उन्नति के साथ शहर ने लंबी विकास यात्रा तय की। चौड़ी सड़कें, पार्क, हरियाली, विश्वस्तरीय नागरिक सुविधाएं जो यहां हैं वो कहीं और नहीं मिलेंगी। अंग्रेजी लेखक लोबार्ट फ्रेजर ने 1908 में लिखा था ‘यह दुनिया के उच्च कोटि के शहरों में एक होगा।’

ऐसे बढ़ता गया आकार

1912 में जुगसलाई में खुला पहला थाना, धालभूम अनुमंडल

1908 के अंत तक साकची की जनसंख्या 5 हजार के करीब थी। 1921 की जनगणना के अनुसार जमशेदपुर की आबादी 57360 हो गई थी जो अब 14 लाख काे पार कर गई है। शहर का पहला थाना जुगसलाई में बना था, 1912 में। इसके बाद बिष्टुपुर, साकची और गोलमुरी में थाने स्थापित किए गए। 1912 में बिष्टुपुर में पहला पोस्टऑफिस खुला। पहले सीनी से डाक आता था। यहां जनसंख्या बढ़ने के साथ विवादों की संख्या भी बढ़ती गई। 1913 में कोल्हान अधीक्षक ने मजिस्ट्रेट की हैसियत से महीने में दो बार साकची के नाॅर्दन टाउन निरीक्षण भवन में कचहरी का सिलसिला आरंभ किया जो 1920 तक चला। प्रशासकीय पहल में बढ़ोत्तरी तब हुई जब 1920 में धालभूम अनुमंडल बना और उसका मुख्यालय शहर में स्थापित किया गया।

जमशेदजी का विजन : शहर

नगर बनाते समय इस बात का ध्यान रखना कि सड़कें चौड़ी हों। उनके किनारे तेजी से बढ़ने वाले छायादार पेड़ लगाये जाएं। इस बात की भी सावधानी बरतना कि बाग़-बगीचों के लिए काफ़ी जगह छोड़ी जाए। फुटबॉल, हॉकी के लिए भी काफ़ी स्थान रखना। हिन्दुओं के मंदिरों, मुस्लिमों की मस्जिदों तथा ईसाईयों के गिरजाघरों के लिए नियत जगह मत भूलना।

150 साल का टाटा 100 साल का जमशेदपुर

श्रम-कल्याणकारी सुविधाएं जाे आजादी के बाद देश ने अपनाई

कल्याणकारी योजनाएं टाटा सरकार

आठ घंटे दैनिक मजदूरी 1912 1948

निःशुल्क चिकित्सा सुविधा 1915 1948

कल्याण विभाग की स्थापना 1915 1948

बच्चों के लिए चिकित्सा सुविधा 1917 1948

कल्याणकारी योजनाएं टाटा सरकार

वर्क्स कमेटी का गठन 1919 1947

सवैतनिक अवकाश 1920 1948

प्रोविडेन्ट फंड योजना एक्ट 1920 1952

प्रसव सुविधा 1928 1946

कल्याणकारी योजनाएं टाटा सरकार

प्रॉफिट शेयरिंग बोनस 1934 1965

रिटायरिंग ग्रेच्यूटी 1937 1972

पेंशन योजना 1983 1995

कामगारों के लिए इंस्टिट्यूट 1921 1961

1915 में पहला स्कूल शुरू हुआ, 1919 में बना स्पोर्टिंग एसोसिएशन

1915 में मिसेज केएम पेरिन ने पहला प्राइमरी स्कूल खोला। बाद में कंपनी ने 1916 में एक रात्रि पाठशाला आरंभ किया। इसमें कई इच्छुक कर्मचारियों को दिन में ड्यूटी करने के बाद रात में शिक्षा दी जाती थी। गणित पर विशेष ध्यान दिया जाता था ताकि कर्मचारी अपनी कमाई का ठीक ढंग से लेखा-जोखा रख सकें। 1918 में वाणिज्यिक विद्यालय की स्थापना की गई जिसमें टाइपिंग और शार्टहैंड की शिक्षा दी जाती थी। उसी से संबंधित 3 पुस्तकालय आरंभ किए गए। आरंभिक दौर में 11 प्राइमरी स्कूल, एक प्राइमरी इंग्लिश स्कूल, एक प्राइमरी गर्ल्स स्कूल और मैट्रिक स्तर के दो उच्च विद्यालयों को स्थापित कर शैक्षणिक व्यवस्था को सुचारू रूप से आरंभ किया गया। शहर में पहली बार 1919 में खेलकूद प्रेमियों और कंपनी के सहयोग से ‘स्पोर्टिंग एसोसिएशन’ की स्थापना की गई। इसके बाद शिक्षा और खेल के मामले में इस शहर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। कीनन, जेआरडी स्टेडियम शहर की शान। यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबले होते हैं।

भास्कर टीम : संयोजन - राकेश परिहार, डिजाइन - दीपक सिंह, फोटो - सुदर्शन शर्मा

सड़कें चौड़ी और छायादार पेड़ लगाए जाएं

तब

अब

तब

तब

चौथी रेल लाइन का सर्वे हवाई यात्रा से जुड़ा शहर

हवाई सफर : सोनारी से कॉमर्शियल विमान सेवा की शुरुअात

जमशेदपुर ने 100 सालों में काफी तरक्की की है। 1919 में कालीमाटी स्टेशन आने-जाने के लिए बैलगाड़ी सहारा थी। आमलोगों को पैदल जाना होता था। अब कोलकाता के लिए कॉमर्शियल विमान सेवा शुरू हो रही है। चौथी रेल लाइन का सर्वे हो रहा है।

बर्न में ख्यात : 200 डॉक्टर, बिहार-झारखंड का एकमात्र कैंसर अस्पताल भी

अब

1922 में साकची हॉस्पिटल की क्षमता बढ़ाकर 72 बेडों की गई। वही अस्पताल ‘टीएमएच’ के रूप में विख्यात है। फिलहाल इस अस्पताल की क्षमता 750 बेड की है। टीएमएच में 200 से ज्यादा डॉक्टर और करीब 400 कर्मचारी हैं। इसे ईस्ट जोन के बड़े अस्पतालों में शामिल किया जाता है। बर्न केस के लिए यह अस्पताल झारखंड में ऊंचा स्थान रखता है। यहां झारखंड-बिहार का एकमात्र कैंसर अस्पताल है।

अब

टाटानगर : यहां से होकर गुजरती हैं 66 जोड़ी ट्रेन

टाटानगर आज साउथ ईस्टर्न रेलवे के प्रमुख स्टेशन में शामिल हैं। इसे मॉडल स्टेशन का दर्जा प्राप्त है। यहां से होकर 49 जोड़ी एक्सप्रेस व 19 जोड़ी पैसेंजर ट्रेन गुजरती हैं। 25 हजार से ज्यादा यात्री प्रतिदिन सफर करते हैं। देश के हर कोने के लिए यहां से गाड़ियां मिलती हैं। चक्रधरपुर रेल मंडल में यह आयरन ओर सहित खनिजों की ढुलाई में सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला स्टेशन है। फिलहाल थर्ड लाइन का विस्तार किया जा रहा है।

जमशेदपुर, गुरुवार 01 मार्च, 2018

भारतीय और कुत्तों का प्रवेश वर्जित यह देख जमशेदजी ने लिया संकल्प

मुंबई के ‘ताजमहल होटल’ के निर्माण के पीछे जेएन टाटा की देशभक्ति की रोचक कहानी छिपी है। सिनेमा के जनक लुमायर भाइयों ने अपनी खोज के छह महीनों बाद 7 जुलाई, 1896 को मुंबई के वोटसन होटल में अपनी छह फिल्मों के शो आयोजित किए। होटल के बाहर तख्ती लगी रहती थी, जिस पर लिखा होता था कि ‘भारतीय और कुत्ते होटल में नहीं आ सकते हैं।’ जेएन टाटा फिल्में देखना चाहते थे, लेकिन उन्हें होटल में प्रवेश नहीं मिला। इस घटना के दो साल बाद ही उन्होंने ‘ताजमहल होटल’ का निर्माण शुरू करवा दिया। 1903 में ताजमहल होटल बनकर तैयार हो गया। कुछ समय तक इस होटल के दरवाज़े पर एक तख्ती भी लटकती थी, जिस पर लिखा होता था कि- ‘ब्रिटिश और बिल्लियां अंदर नहीं आ सकतीं।’

ऐसे बना होटल ताज

दैिनक भास्कर

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