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आया बसंत

पद्मा मिश्रा, आदित्यपुर, जमशेदपुर दिग दिगंत महक उठे, सुरभित है गंधवाह डाल डाल पुष्पित हो रक्तिम गुलाल हुई ...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 01:45 PM IST
आया बसंत
पद्मा मिश्रा, आदित्यपुर, जमशेदपुर

दिग दिगंत महक उठे, सुरभित है गंधवाह

डाल डाल पुष्पित हो रक्तिम गुलाल हुई

दूर कहीं गूंजी है प्यार भरी मधुर चंग

भंवरों का गुंजन सुन बगिया निहाल हुई

प्रियतम के आवन की, सुधि मन भावन की

आहट मधुऋतु की ज्यों सावन बरसा गई

लाज भरी चितवन में जागी हैं स्मृतियां

रस-रसाल कुंजों में पुष्पित ज्यों मंजरियां

रसभीनी धरती पर हरियाली छा गई

मुकुलित हैं गंध-सुमन, कली-कली प्रमुदित है

सुरभित समीरण से तन-मन स्पंदित है

पपीहे की टेर मन-प्राणों को भा गई

मदमाते गीतों से गूंज रहा है मधुवन

पुलकित जल-दर्पण में झांक रहा नील-गगन

लहर उठा अंतर्मन नदियां शरमा गईं

धानी रंग चुनर में धरती का रूप सजा

तन-मन की भांवर ने जीवन का गीत रचा

सखी आज कान्हा की सुधियां जगा गईं

बासंती तन मन में सुख की नदियां ंछलकीं

मन के हिंडोले में बहकी सांसें अटकीं

प्रीत की कहानी फिर जीवन महका गई।

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आया बसंत
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