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अविद्या का त्याग कर विद्या को करें ग्रहण-आचार्य

खरसावां |राजखरसावां के बडाआमदा स्थिति ठाकुरबाडी प्रांगण में आनंद मार्ग सरायकेला खरसावां के द्वारा एक...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 03:05 AM IST

अविद्या का त्याग कर विद्या को करें ग्रहण-आचार्य
खरसावां |राजखरसावां के बडाआमदा स्थिति ठाकुरबाडी प्रांगण में आनंद मार्ग सरायकेला खरसावां के द्वारा एक आध्यात्मिक विषय पर एक सभा की गई। सभा में मुख्य रूप से पहुचे आचार्य गुणीन्द्रा नंद अवधुत ने कहा कि हमलोग अपने व्यक्तिगत जीवन में दुनियां में देखते है कि हमारी कुछ वृत्तियॉ जड़ वस्तुओं की ओर अर्थात् भोग वस्तुओं की ओर ले जाती हैं। इसको अविद्या माया कहते हैं। ये हमें परमपुरूष से दूर ले जाते हैं। इसी तरह कुछ वृतियॉ हमें परम पुरूष की ओर ले जाने में मदद करती है। इसलिए हमें अविद्या का त्याग कर विद्या को ग्रहण करना चाहिए। विद्या माया को बढानें में सत्संग का बड़ा ही महत्व है। इसके माध्यम से स्वयं ईश्वर मुखी हो जाता है। उन्होंने कहा कि लौकिक जगत में हमलोंग कई काम करते हैं। इन्द्रियों पर नियंत्रण, वाक् संयम, आंख पर संयम, आहार व मन पर संयम करना चाहिए जिसको विवेक कहते है। अर्थात् जो समझ बुझकर किया जाए वही विवेक है। इसी विवेक की बदौलत वैराग्य की उत्पत्ति होती है जो धर्म साधना का प्रथम सोपान है। इस कार्यक्रम को सफल बनानें में गोपाल कुमार बर्मन, गुणधाम महन्त, सुनिल कुमार आदित्य, रथिंद्र आदित्य, सरोज कुमार आदित्य, अरूण आदि थे।

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