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खेलने के दौरान खुले गड्डे में डूबने से पांच साल की बच्ची और बच्चे की मौत

डोभा से निकालकर डाॅक्टर के पास लेकर गए, तब-तक दोनों की मौत हो चुकी थी।

Danik Bhaskar | Nov 30, 2017, 07:02 AM IST

बगोदर. अड़वारा पंचायत के धवैया गांव में बुधवार को मनरेगा से निर्मित डोभा में डूबकर दो आदिवासी बच्चों की मौत हो गई। मृतकों में महेश मुर्मू के बेटी ममता कुमारी (5) शिबू मांझी का बेटा रोशन बेसरा (5) शामिल है। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में मातम का माहौल बना हुआ है। अचानक दोनों के शव को तालाब में तैरता देख लोगों की नजर बच्चों पर पड़ी तब हो-हल्ला हुआ और आसपास के लोग जुटे। दोनों को डोभा से निकालकर डाॅक्टर के पास लेकर गए, तब-तक दोनों की मौत हो चुकी थी।

रोशन मुर्मू के पिता शिबू मांझी ने बताया कि घटना के आधे घंटे पहले दोनों बच्चे घर में खेल रहे थे। बच्चे डोभा तरफ कब गए और कब डूबे उन्हें कुछ भी पता नहीं चला। अचानक दोनों बच्चों की लाश दिखी तक जानकारी मिली। जबकि घर से डोभा की दूरी भी करीब 400 गज है। घटना की खबर पूरे इलाके में फैल गई और बड़ी संख्या में लोग धवैया पहुंचे। मौके पर पहुंचे बगोदर विधायक नागेन्द्र महतो पूर्व विधायक विनोद कुमार सिंह भी धवैया पहुंचे। विदित हो कि मृतक ममता कुमारी दो भाई बहन में बड़ी थी, जबकि रोशन बेसरा दो भाइयों में बड़ा था।

डीडीसी किरण कुमारी पासी ने कहा कि जिले के सभी निर्मित डोभा की बांस से घेराबंदी करने का आदेश काफी पहले दिया जा चुका है। ऐसे में बगोदर के धवैया में निर्मित डोभा की घेराबंदी क्यों नहीं की गई थी, इसकी जांच होगी और दोषी अधिकारियों कर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

विधायक ने की डीसी से बात, मिलेगा मुआवजा
दाेनोंबच्चों की मौत पर बगोदर विधायक नागेंद्र महतो ने डोभा में डूबने से दो बच्चों की मौत पर गहरी संवेदना जताते हुए उपायुक्त से दूरभाष पर बात की और सरकार से मृतक के परिवार को मिलने वाले 50 हजार रुपए मुआवजा की बात बताई। जिस पर उपायुक्त उमाशंकर सिंह ने सहमति दे दी है। कहा कि दोनों बच्चों के परिजनों को 50-50 हजार रुपए का मुआवजा दिया जाएगा।

23 नवंबर को भी डूबे थे दो बच्चे
बगोदरथाना क्षेत्र के पत्थलडीहा गांव में भी 23 नवंबर को तालाब में डूबने से सगे मासूम भाई-बहन की मौत हो गई थी। सुदेश कुमार (5) शिवरानी (3) खेलने के क्रम में तालाब में डूब गई थी। जहां मौके पर ही दोनों की मौत हो गई थी। इसके बाद बुधवार को अड़वारा में मनरेगा से निर्मित डोभा में डूबकर दो मासूम की मौत हो गई।

नियम के मुताबिक बांस से किया जाना है घेराबंदी
डोभामें डूबने से मासूमों की हुई मौत के बाद लोगों के द्वारा डोभा के बनावट पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। पिछले चार महीनों के दौरान कई बच्चों की डोभा में डूबने से मौत हो चुकी है। सबसे बड़ी बात है कि डोभा निर्माण के साथ ही उसकी बांस से घेराबंदी की जानी थी। लेकिन यह योजना कागजों पर ही दफन हो गया। सिर्फ जहां-तहां असुरक्षित तरीके से डोभा का निर्माण कर छोड़ दिया गया। जिसका परिणाम है कि कभी जानवर तो कभी इंसान उसमें समा रहे हैं। धवैया में जिस डोभा में ममता रोशन की मौत हुई, शायद घेराबंदी रहता तो ये घटना नहीं होती।