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साइकिल से हाइड्रोसिल का अॉपरेशन कराने पहुंचा ; जरूरी दवा नहीं दी, इन्फेक्शन से मौत

गुस्सा शांत करने को नर्स ने शव को चढ़ा दी ऑक्सीजन, डाॅक्टर पर लापरवाही का आरोप, केस की मांग।

Danik Bhaskar | Nov 17, 2017, 07:06 AM IST

|जमशेदपुर. एमजीएम अस्पताल में पांच दिन पहले एक व्यक्ति साइकिल चलाकर हाइड्रोसिल का ऑपरेशन कराने पहुंचा। उम्मीद थी, ऑपरेशन कराकर वह एक-दो दिन में घर लौट जाएगा। डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया लेकिन इलाज में चूक की। गुरुवार को उसने दम तोड़ दिया। डाॅक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजन ने शाम को करीब दो घंटे हंगामा किया। बस्ती के लोग वार्ड में मौजूद डॉ. एमके सिन्हा व नर्स को मारने दौड़े।

परिजन डाॅ. सिन्हा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग कर रहे थे। गुस्सा शांत कराने के लिए नर्स ने शव को आॅक्सीजन लगा दिया। हादसा न्यू उलीडीह, मानगो निवासी सुखदेव राम (57) के साथ हुआ। उसे हाइड्रोसिल का सामान्य ऑपरेशन कराना था। कुछ दिनों बाद बड़े बेटे की शादी करना थी, इसलिए सोचा पूरी तरह फिट हो जाऊंगा। शुक्रवार को वह भर्ती हुआ। उसी दिन डॉ. लक्ष्मण हांसदा ने ऑपरेशन किया। परिजन को बताया गया था कि एक-दो दिन में छुट्टी कर दी जाएगी। सोमवार को तबीयत बिगड़ने लगी। पेट फूलने लगा। परिजन को ब्लड का इंतजाम करने को कहा, इस बीच मौत हो गई। शाम 4.30 बजे परिजन, बस्तीवासी अस्पताल में इकट्ठा हो गए। जमकर हंगामा किया। उनका आरोप था कि डॉक्टर और अस्पताल की लापरवाही ने जान ली है। आक्रोशित भीड़ आॅपरेशन थिएटर में सर्जरी के एचओडी व नर्स को मारने दौड़े।

बेटा बोला- डॉ. समय पर सही दवा देते तो बच जाती जान

बड़े बेटे विश्वकर्मा वर्मा ने कहा पिताजी को हाइड्रोसिल था। वे शुक्रवार को घर से साइकिल से यह कहकर निकले थे कि एमजीएम के डॉक्टर ने आॅपरेशन के लिए बुलाया है। साधारण ऑपरेशन है। मैं जा रहा हूं, तुम लोग पीछे से आना। डाॅक्टरों ने बताया कि हाइड्रोसिल के साथ हार्निया का ऑपरेशन किया है। दो दिन के बाद छुट्टी दी जाएगी। सोमवार उन्हें गैस की शिकायत हो गई थी। डाॅक्टरों ने कहा एक दिन और देखते हैं। मंगलवार को तबीयत और बिगड़ने लगी। पेट फूल गया था। डाॅक्टरों ने कहा सब ठीक है, एक-दो दिन और देखते हैं। गुरुवार को डॉ. एमके सिन्हा ने कहा- स्थिति ठीक नहीं है आॅपरेशन करना होगा। मरीज की आंत सड़ गई है। ब्लड की व्यवस्था कर ही रहे थे कि मौत की सूचना दी गई। अगर वे समय पर दवा देते तो मेरे पिता की जान नहीं जाती।

बचाव के लिए डॉक्टर करने लगे मोर्चाबंदी

अधीक्षक : पहले कहा- डॉक्टर से चूक हुई, फिर बोले-आंत सड़ गई थी
परिजन के हंगामे के बीच अस्पताल अधीक्षक बी भूषण ने स्वीकार किया कि इलाज में चूक हुई है। बाद में वे बयान से मुकर गए, कहा - अस्पताल की लापरवाही नहीं है। आंत सड़ जाने की वजह से मरीज की मौत हुई है।

सर्जन : अस्पताल में पर्याप्त दवा नहीं थी

ऑपरेशन करने वाले डॉ. हांसदा ने कहा इन्फेक्शन के लिए सिप्ट्रैक्स, सेप्ट्रैक्शन, सीप-जेड व मेरोपेनियम आदि दवा है। इनसे इन्फेक्शन ठीक नहीं होता। बाहर की दवा मंगाने पर पाबंदी है।

सर्जरी हेड : दोबारा आपरेशन में देरी

सर्जरी हेड डॉ. सिन्हा ने कहा डॉ. हांसदा इलाज कर रहे थे। उन्होंने सहयोग के लिए बुलाया। मरीज की स्थिति ठीक नहीं थी। मैंने आॅपरेशन का सुझाव दिया। परिजन तैयार नहीं थे। बाद में वे राजी हुए।

हाइड्रोसिल आॅपरेशन से नहीं होती मौत- डॉ. नागेन्द्र सिंह
प्राइवेट प्रैक्टिशनर सर्जन डॉ. नागेंद्र सिंह ने कहा हाइड्रोसिल, हार्निया के आॅपरेशन से मरीज की मौत नहीं होती है। यह छोटा आपरेशन होता है। आॅपरेशन के दौरान मरीज को ज्यादा इन्फेक्शन हो जाए, एनेस्थेसिया को डोज अधिक हो जाए या फिर हार्ट में कोई परेशानी है तो ही मौत हो सकती है।