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ई-स्कॉलरशिप दिलाने की बात से तीन का खुलवाया बैंक खाता, सदमे से एक की मौत

कैसे हुआ खुलासा : बैंक गए तो ट्रांजेक्शन जान होश उड़ गए

Danik Bhaskar | Nov 30, 2017, 07:08 AM IST

धनबाद. ‘स्कॉलरशिपदिला देंगे। सरकार सीधे बैंक खाते में स्कॉलरशीप भेज रही है। बस बैंक खाता खुलवा लो...’। यह साइबर क्राइम गिरोह के रचे चक्रव्यूह के शब्दबाण हैं। इसके सहारे गिरोह गोविंदपुर के पिछड़े गांवों के दर्जनभर छात्रों का बैंक खाता खुलवा कर उसका इस्तेमाल अपनी ठगी में कर रहा है। कालाडाबर गांव इनकी चंगुल में फंसा एक ऐसा ही गांव है। 4 माह पहले गिरोह का सदस्य सरताज ने यहां के तीन छात्र शरीफ, अर्शिद और इस्माइल का बैंक खाता खुलवाया था। उन्हें कहा था कि वह उनके बैंक खाता में स्कॉलरशिप डलवा देगा। स्कॉलरशिप का सपना दिखाकर सरताज ने तीनों छात्रों का एटीएम अपने पास ही रखा। छात्र बैंक खाते में स्कॉलरशिप आने का इंतजार करते रहे।

इधर, गिरोह इनके खातों के सहारे ठगी करता रहा। खातों में मोटी रकम ट्रांजेक्शन की जानकारी जब तीनों छात्रों को चली तो वे हैरान रह गए। थोड़ी सी पड़ताल में सच उनके सामने था। कानूनी शिकंजे में आने का डर उन्हें बेचैन कर रहा था। यह सदमा छात्र शरीफ नहीं झेल सका। 17 साल का यह युवक 23 अक्टूबर 2017 को हार्ट अटैक से मर गया। उसकी मौत के बाद पूरा मामला गांव वालों के सामने आया। इस जाल में फंसे शेष दो छात्रों ने पूरी बात पुलिस को बताई। पुलिस ने छापेमारी कर खाता खुलवाने वाले सरताज को गिरफ्तार कर लिया है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

गिरोह ने कालाडाबर के तीनों छात्रों के खातों से एक साल में 17.43 लाख रुपए का ट्रांजेक्शन किया। इसकी जानकारी छात्रों को तब हुई, जब बैंक ने उन्हें केवाईसी अपडेट करने के लिए बुलाया। वहां पहुंच उन्हें पता चला कि शरीफ के खाते से 1.90 लाख, अरशीद के खाते से 8.56 लाख और इस्माइल के तीन खाते से 6.97 लाख रुपए का ट्रांजेक्शन किया गया है। मोटी रकम के ट्रांजेक्शन की बात ने उनके होश उड़ा दिए।

पिता का दर्द : साइबर अपराधियों ने मेरे बेटे की जान ले ली
शरीफदो भाईयों में छाेटा था। पिता माजिद अंसारी और भाई समीद अंसारी मजदूरी करते हैं। शरीफ 12 वीं कक्षा का छात्र था। पिता माजिद अंसारी कहते हैं कि उन्हें अपने पुत्र शरीफ से बहुत उम्मीदें थी। उसे पढ़ा कर बड़ा आदमी बनाना चाहते थे। पर उनका सपना अधूरा ही रह गया। उनके पुत्र को धोखे में रख साइबर गिरोह ने बैंक खाता खुलवाया और उसका इस्तेमाल किया। यह सदमा उनका पुत्र नहीं झेल सका। हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई। पिता ने कहा कि साइबर अपराधियों ने उनके बेटे की जान ले ली।

ई-स्कॉलरशिप के नाम से खाता खुलवाया गया था। गांव के रहने वाला फरहान ने इफ्तेखार और सरताज से मुलाकात कराई थी। सरताज ने झांसा दिया कि जल्द पैसे उनके खाते में जाएंगे। केवाईसी जमा करने बैंक गए तो हमें रुपए के ट्रांजेक्शन की जानकारी हुई। हम समझ गए कि गलत लोगों के चक्कर में फंस गए हैं। आज तक खाते से हमने किसी तरह का ट्रांजेक्शन नहीं किया है। अर्शिदऔर इस्माइल (भुक्तभोगी छात्र)

बैंक में खाता खुलवाया
गिरोह ने गरीब छात्रों को ई-स्कॉलरशिप की जानकारी दी। ई-स्कॉलरशिप पाने के लिए बैंक खाते की जरूरत बतायी। विश्वास में लेकर उनसे जरूरी कागजात प्राप्त कर लिया। उन्हीं कागजात के आधार पर तीनों का बैंक खाता खुलवा लिया।

खातों को अपने नंबर से जोड़ा
गिरोह के सदस्य सरताज ने तीनों छात्रों के बैंक खाते को अपनी मोबाइल नंबर से जोड़ दिया। ताकि रुपए के ट्रांजेक्शन से छात्र अनभिज्ञ रहें।

एटीएम कार्ड, पासबुक पास रखा
गिरोह ने तीनों छात्रों का एटीएम और पासबुक अपने पास रखा। भुक्तभोगी छात्र इस्माइल ने बताया कि गिरोह ने एक्टिवेट होने के बाद एटीएम देने की बात कही थी।