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अस्ताद देबू जिस स्कूल के विद्यार्थी रहे उसी में आज करेंगे परफॉर्म, उड़ते ड्रमरों के साथ आज नाचेंगे

कत्थक एवं कथकली नृत्य के ज्ञाता। मगर, शोध कर कत्थक एवं आधुनिक नृत्य शैली का फ्यूजन तैयार किया।

BhaskarNews | Last Modified - Nov 17, 2017, 07:14 AM IST

  • अस्ताद देबू जिस स्कूल के विद्यार्थी रहे उसी में आज करेंगे परफॉर्म, उड़ते ड्रमरों के साथ आज नाचेंगे

    जमशेदपुर.पद्मश्री अस्ताद देबू लोयला स्कूल के छात्र रहे। शुक्रवार को लोयला स्कूल के ऑडिटोरियम में 70 साल की उम्र में नृत्य प्रस्तुत करेंगे। महज 8 साल की उम्र में इसी शहर में कत्थक सीखना शुरू किया था। अब कत्थक एवं कथकली नृत्य के ज्ञाता। मगर, शोध कर कत्थक एवं आधुनिक नृत्य शैली का फ्यूजन तैयार किया। अपनी नृत्य शैली का नाम दिया आधुनिक।


    अस्ताद देबू की विशेषता है कि परंपरागत वाद्य यंत्र और उन्हें बजाने वाले कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले गए और वाह वाही मिली। अस्ताद देबू कहते हैं, झारखंड के परंपरागत वाद्य यंत्र पर आधुनिक नृत्य शैली की खोज हो सकती है। मगर यह एक दो दिन का काम नहीं है। अगर कोई चाहता है तो उसके लिए लगन होनी चाहिए, कई माह मेहनत करनी होगी, लगातार रिहर्सल के लिए तैयार रहना होगा, कई प्रयोग के लिए खुद को तैयार रखना होगा। यह असंभव नहीं है। सेंटल फॉर एक्सीलेंस में गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन में अस्ताद देबू ने कहा कि 16 साल से उनका मणिपुर से नाता रहा है।

    वहां जन्म, शादी, श्राद्ध और मंदिर में ड्रम बजाने वालों को साथ लिया। मार्शल आर्ट थामटा पर अध्ययन किया, उनके कलाकारों को साथ लिया। मणिपुर के ड्रमर के साथ देश विदेश में कई कार्यक्रम किए हैं। चार साल पहले जमशेदपुर कार्निवाल में आए थे तो वही ड्रमर साथ थे जिनकी धुन पर लोग खुद बाग थिरकने लगे थे। उन्होंने कहा स्विटजरलैंड, जापान समेत कई देशों के नृत्य एवं संगीत की शैली पर वे लगातार शोध किए हैं, परंपरागत भारतीय संगीत के साथ उनका फ्यूजन तैयार किए हैं। यही फ्यूजन अलग अनुभव कराता है। उन्होंने कहा कि जब वे महज 6 साल के थे तो टाटा स्टील में कार्यरत उनके पिता ने यूनाइटेड क्लब में भरत नाट्यम सीखने के लिए भेजा। 8 साल के हुए तो कोलकाता के प्रभात दास सप्ताह में दो दिन कत्थक सिखाने के लिए यहां आना शुरू किए। फिर उन्हें लगा कि कुछ नया प्रयोग करना चाहिए। 48 साल हो चुके हैं उन्हें परंपरागत और आधुनिक नृत्य शैली में नए नए प्रयोग करते हुए। यह सिलसिला अागे भी चलता रहेगा। उन्होंने बताया कि ध्रुपद के जानकार भोपाल के गुड़ेचा बंधु, मुंबई के बहावउद्दीन दागर और कोलकाता के उदय भवालकर जैसे कलाकारों के साथ मिल कर नृत्य की नई विधा तैयार करने में लगे हुए हैं।

    उड़ते ड्रमरों के साथ आज नाचेंगे पद्मश्री देबू

    टाटा स्टील की ओर से हो रहे जमशेदपुर विंटर फेस्ट में 17 नवम्बर को मशहूर कन्टेम्परी डांसर अस्ताद देबू के नृत्य का जलवा दिखेगा। लोयोला के फेजी ऑडिटोरियम में होने वाले परफॉर्मेंस में देबू फ्लाइंग ड्रमरों के साथ नृत्य की प्रस्तुति करेंगे। मणीपुर के ये फ्लाइंग ड्रमर्स पुंगचोलम और ढ़ोलचोलम नृत्य की प्रस्तुति करेंगे। रिदम डिवाइन नाम के इस परफॉर्मेंस में देबू नृत्य के आध्यात्मिक पक्ष को उजागर करेंगे। लोयोला स्कूल के पूर्व छात्र रहे देबू ने भारत के कई लोक नृत्यों के साथ ही बैले नृत्य के साथ फ्यूजन कर नृत्य की अपनी खास शैली बनाई है।

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Web Title: Will Dance Today With Flying Drummers Padmshri Debu
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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