स्कूलों की जमीन पर बन गए अपार्टमेंटघर और गोदाम, खुल गए निजी स्कूल
भू-माफिया के कब्जा वाले सात में से तीन स्कूल जमशेदपुर शहरी इलाके में
पूर्वी सिंहभूम जिले के सात सरकारी स्कूलों की जमीन पर भू-माफिया का कब्जा है। सात में से तीन स्कूल जमशेदपुर शहरी इलाके में हैं। इनके जमीन की कीमत करोड़ों रुपए में है। कई अन्य स्कूलों में भी घेराबंदी की तैयारी है। सरकारी स्कूलाें की जमीन पर अवैध कब्जे की जानकारी शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन काे भी है। इसके बावजूद जमीन काे कब्जा मुक्त कराने का काेई प्रयास नहीं हाे रहा है। यह कब्जा एक दाे साल से नहीं बल्कि सालाें से चल रहा है। मिथिला उवि साेनारी की जमीन पर कब्जे का सिलसिला 15 साल पहले से चल रहा है। भ्ू-माफिया के साथ स्कूल के तत्कालीन प्रिंसिपल की भूमिका भी संदेह के दायरे में है। इसका मुख्य कारण संबंधित स्कूलाें की जमीन के कागजात का गायब हाेना है। अब तब जिस स्कूल की जमीन पर कब्जे की बात सामने अायी है, उसमें से अधिकतर के पास स्कूल के भूमि से संबंधित काेई दस्तावेज नहीं है। विद्यालय और भू-माफिया की मिलीभगत से दस्तावेजाें काे गायब कर दिया गया।
जिले के सात स्कूलों में भू-माफिया का कब्जा
जिले के सात स्कूलों में भू-माफियाओं द्वारा अवैध कब्जे की शिकायत मिली है। दो स्कूलों की जमीन बेचने का मामला भी आया है। अतिक्रमण मुक्त कराने की हम हर संभव कोशिश करेंगे। प्रशासन से भी सहयाेग लिया जाएगा। इसमें जिसकी भी भूमिका संदिग्ध पायी जाएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई हाेगी। इस मामले की गहन जांच की जा रही है।
- शिवेंद्र कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी, पूर्वी सिंहभूम।
इन स्कूलाें की जमीन पर अवैध कब्जा : फाउंड्री यूनियन मध्य विद्यालय, मवि रसून चाेपा, अादिवासी उवि बाेड़ाम, मिथिला उवि सोनारी
1 फाउंड्री यूनियन मवि : छह कट्ठा जमीन पर अवैध कब्जा
इस स्कूल की जमीन पर लाेगाें का कब्जा है। जिस जमीन पर कब्जा हुअा है, उसे स्थानीय लाेग अपना बताते हैं। स्कूल के पास 15 कट्ठा से अधिक जमीन उसके पास था। अभी सिर्फ 9 कट्ठा जमीन ही बचा है।
2 मवि रसून चाेपा : स्कूल की जमीन पर बना लिया घर
यहां स्कूल की जमीन पर लाेगाें ने अपना घर बना लिया है। कब्जे का सिललिसा करीब दाे साल से चल रहा है। स्कूल की अाेर से इसकी सूचना शिक्षा विभाग काे भी दी गयी है। लेकिन अभी तक काेई कार्रवाई नहीं हुई है।
3 अादिवासी उवि बाेड़ाम : एक तिहाई जमीन पर ग्रामीणाें का कब्जा
स्कूल के करीब एक तिहाई जमीन पर अवैध कब्जा है। संबंधित स्कूल के पास 5 एकड़ 9 डिसमिल जमीन है।
पूर्वी सिंहभूम जिले के सात सरकारी स्कूलाें पर भू-माफिया का कब्जा
7. राजकीयकृत बिरसा उवि बिरसानगर : स्कूल की जमीन पर गोदाम बनाया, मंदिर बनाने की तैयारी
कब्जा कर स्थानीय लाेगाें ने अपने लिए खेल का मैदान बना लिया है। एक व्यक्ति ने ताे स्कूल की जमीन पर गाेदाम बना लिया है। स्कूल की जमीन पर ही मंदिर बनाने की भी शिकायत की गयी है। स्कूल के पास कुल ढाई एकड़ जमीन है।
पदािधकारी बोलें
5 मिथिला उवि सोनारी: जमीन पर निजी स्कूल के साथ ही बन गया अपार्टमेंट, तो मैदान बना कब्रिस्तान
सोनारी स्थित सरकारी स्कूल, राजकीयकृत मिथिला मॉडल उच्च विद्यालय की सात एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा है। भवन के लिए प्रस्तावित जमीन पर कार्मेल जूनियर कॉलेज (कार्मेल स्कूल) बन गया तो खेल का मैदान कब्रिस्तान। उससे सटी जमीन की घेराबंदी कर माफियाओं ने बेच दी। स्कूल टाटा स्टील से मिली पांच कट्ठा जमीन पर बने भवन में चल रहा है। जांच के लिए कमेटी बनायी गयी है। लेकिन अभी तक जांच शुरू भी नहीं हुअा है।
6 बालिका उच्च विद्यालय घाटशिला : यहां तो विद्यालय की जमीन ही भू-माफिया ने बेच दिया
घाटशिला में करीब 50 साल पुराने सरकारी स्कूल, बलदेव दास संतलाल (बीडीएसएल) बालिका उच्च विद्यालय को भूमि माफिया ने दो साल पहले आशुतोष नामक व्यक्ति काे बेच दिया। आशुतोष ने संबंधित कागजात के आधार पर सारी प्रक्रिया पूरी कर ली, लेकिन कब्जा नहीं ले पाया। न्यायालय का सहारा लिया। पिछले वर्ष जून में स्कूल खाली कराने का काेर्ट का आदेश स्कूल प्रबंधन काे मिला तो शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया।
सब मिले हुए हैं... क्योंकि
{अधिकतर स्कूलाें की जमीन से संबंधित पेपर गायब, एचएम की भूमिका पर संदेह
{15 साल से अधिक समय कब्जा, कितने अफसर बदले लेकिन किसी ने नहीं ली सुध
4 अष्टकाेषी +2 उवि डुमरिया: कब्जे से खेल का मैदान खत्म
स्थानीय लाेगाें ने कब्जा किया गया है। स्कूल के पास कुल 1.5 एकड़ जमीन है। शिकायत करने पर प्रिंसिपल काे धमकी मिली। खेल का मैदान खत्म हाे गया है।
पूर्वी सिंहभूम जिले के सात सरकारी स्कूलों की जमीन पर भू-माफिया का कब्जा है। सात में से तीन स्कूल जमशेदपुर शहरी इलाके में हैं। कई अन्य स्कूलों में भी घेराबंदी की तैयारी है। सरकारी स्कूलाें की जमीन पर अवैध कब्जे की जानकारी शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन काे भी है। इसके बावजूद जमीन काे कब्जा मुक्त कराने का काेई प्रयास नहीं हाे रहा है। यह कब्जा एक दाे साल से नहीं बल्कि सालाें से चल रहा है।