अादित्यपुर में श्रम कानून का उल्लंघन, 5 साल से कार्यरत ठेका मजदूरों को ईएसअाईसी-पीएफ की सुविधा नहीं

Jamshedpur News - मजदूरों ने कहा- सेफ्टी और स्वास्थ्य का भी नहीं रखा जाता कोई ख्याल, परिवार के मजबूरन कर रहे काम अादित्यपुर...

Feb 22, 2020, 07:20 AM IST
Jamshedpur News - breach of labor law in adityapur contract workers working for 5 years do not have esic pf facility
मजदूरों ने कहा- सेफ्टी और स्वास्थ्य का भी नहीं रखा जाता कोई ख्याल, परिवार के मजबूरन कर रहे काम

अादित्यपुर अौद्योगिक क्षेत्र अब जियाडा एसिया के सबसे बड़े अौद्योगिक क्षेत्र में से एक है। जहां खुलेअाम श्रम कानून का घोर उल्लंघन हो रहा है। लेकिन कोई सुधी लेने वाला नहीं है। अौद्योगिक क्षेत्र में लगभग 1500 छोटी बड़ी कंपनियां हैं। इसमें लगभग 1.50 लाख ठेका मजदूर प्रत्यक्ष व प्रत्यक्ष रूप से काम करते हैं। इसमें से लगभग 50 प्रतिशत मजदूरों को ईएसअाईसी अौर पीएफ की सुविधा नहीं मिल रही है। ना ही उनका सेफ्टी अौर सुरक्षा का कोई ख्याल रखा जा रहा है।

गुरुवार को एक कंपनी के मजदूरों ने टिफिन के दौरान में चावल मोड़ पर खाना खाने के लिए बाहर निकले। उसमें से सभी मजूदरों ने एक स्वर में कहा - वो इंद्रानी कंपनी में 5 वर्ष से ठेकेदार के अंदर में काम करते अा रहे हैं। लेकिन अाज तक ईएसअाईसी अौर पीएफ की सुविधा नहीं मिली है। उनकी सेफ्टी अौर स्वास्थ्य का कोई ख्याल नहीं रखा जाता है। न्यूनत्तम मजदूरी भी नहीं मिलती है। लेकिन परिवार के लालन-पालन करने की जिम्मेेवारी है। इसलिए ठेकेदार जो देता है उसी में काम कर रहे हैं। इसमें मजदूर मो. जहागीर, निसार मलिक, ऊसूफ अंसारी, अलाउद्दीन अंसारी, सलीम अंसारी, इसलाम अंसारी शामिल हैं।

परिवार चलाने के लिए ही कर रहे हैं काम

 इंद्रानी कंपनी में ठेका मजदूर के रूप में 5 साल से हूं। लेकिन ईएसाईसी व पीएफ नहीं मिल रहा है। हम लोहा लोडिंग अौर अनलोडिंग जैसे खतरनाक काम करते हैं। लेकिन सेफ्टी अौर स्वास्थ्य का कोई ख्याल नहीं रखा जाता है।  मो. जहागीर, मजदूर


पीएफ अौर ईएसअाईसी की सुविधा देखना हमारी जिम्मेदारी नहीं : लेबर अॉफिसर


गम्हरिया प्रखंड के लेबर अॉफिसर सत्येंद्र सिंह ने कहा कि मजदूरों को ईएसअाईसी अौर पीएफ नहीं मिल रहा है तो इसे देखने की जिम्मेदारी हमारी नहीं है। यह जिम्मेदारी ईएसअाईसी अौर पीएफ के अधिकारी की है। जहां तक नया कानून के तहत लाभ दिलाने की बात है तो केंद्र सरकार ने जो ऑक्यूपेशनल, सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड बिल 2019 (ओएसएच कोड बिल) लागू किया है उसे राज्य सरकार अभी लागू नहीं किया है।

देश में 77.3% मजदूरों को समय पर नहीं मिलता वेतन

जानकारों की माने तो आर्थिक सर्वेक्षण 2019 के अनुसार देश में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की संख्या 93 प्रतिशत है। श्रम मंत्रालय की 2015 की रिपोर्ट में कहा था कि कृषि और गैर-कृषि क्षेत्र में काम करने वाले 82 फीसदी मजदूरों के पास नौकरी का कोई लिखित कांट्रैक्ट नहीं होता। 77.3 फीसदी को सही समय पर वेतन और छुट्टी नहीं मिलती जबकि 69 फीसदी को कोई सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिलता। सरकार का कहना है कि ये नए श्रम कानून इन्हीं असंगठित मजदूरों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं।

मजदूरों के लिए केंद्र में पास हुआ बिल, नहीं मिल रहा फायदा

केंद्र सरकार ने वेजेज कोड बिल के साथ ही संसद अौर राज्य सभा में ऑक्यूपेशनल, सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड बिल 2019 (ओएसएच कोड बिल) पास हो गया है। यह कानून बन गया है। इस बिल में मजदूरों के बेहतर काम करने की स्थिति और उनके स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण अधिकारों को शामिल करने की बात की गई। लेकिन इस कानून का राज्य में अभी तक लागू नहीं किया गया। राज्य सरकार इतना संवेदनहीन है कि अभी तक इस कानून को बनाने की प्रक्रिया भी शुरू नहीं की है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने इससे संबंधित दो और बिल पास करने की तैयारी कर रखी है, जिसमें सोशल सिक्योरिटी बिल और कोड ऑन इंडस्ट्रियल रिलेशन शामिल है। सरकार का कहना है कि ये चार कोड पुराने जटिल 44 श्रम कानूनों की जगह लेंगे और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करेंगे।

 न्यूनत्तम मजदूरी भी नहीं मिलता है तो ईएसअाईसी व पीएफ के बारे मेें क्या बात करेंगे। परिवार व बच्चों का पालन करने के लिए लाचारी है। इसलिए जो पैसा मिलता है उसमें भी काम करना पड़ता है।  मो. निसार मलिक, मजदूर

फैक्ट फाइल

{स्थापित इकाइयों की संख्या लगभग 1500

{स्थापित इकाइयों की संख्या लगभग 1500

अपनी समस्या को बताते मजदूर।

क्षेत्र में 1500 कंपनियां, जिसमें करीब प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से डेड़ लाख ठेका मजदूर करते हैं काम

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