स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड कराकर धाेखाधड़ी
स्क्रीन शेयरिंग एप में एनीडेस्क, टीम व्यूअर, क्विक सपोर्ट और एयरड्रॉयड जैसे एप शामिल होते हैं। शातिर ठग स्वयं को किसी नामी-गिरामी कंपनी का कर्मचारी बताते हुए आकर्षक इनाम या डिस्काउंट का झांसा देते हैं।
इसके बाद लोगों के मोबाइल पर इन एप को डाउनलोड करने के लिए लिंक भेजी जाती है या फिर प्ले स्टोर में जाकर डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है, ताकि व्यक्ति को विश्वास हो जाए। ये एप डाउनलोड करते ही एक पांच अंको का कोड जनरेट होता है, जिसे ठग लोगों से पूछ लेते हैं। इस कोड को ठग अपने मोबाइल में डाल लेते हैं। ऐसे में दोनों मोबाइल आपस में पेयर हो जाते हैं और साइबर ठग उस व्यक्ति का मोबाइल एक्सेस कर सकते हैं। इस आधार पर बैंक डिटेल और यूपीआई तक को ठग ऑपरेट कर लेते हैं। एक शिकायत के आधार पर डीबी स्टार टीम ने मामले की पड़ताल की, तो खुलासा हुआ कि इस तरह से शहर के लोगों के खातों से दस लाख रुपए तक उड़ा लिए गए हैं। चूंकि सारे ट्रांजेक्शन व्यक्ति के स्वयं के मोबाइल से होना दर्शाया जाता है, ऐसे में ठगों को ट्रेस करने में भी खासी परेशानी होती है। जिन खातों में ये पैसा ट्रांसफर किया गया है, सिर्फ उक्त लेन-देन के आधार पर ही ठगों को ट्रेस किया जा सकता है।
बैंक डिटेल और यूपीआई तक को ठग ऑपरेट कर लेते हैं। एक शिकायत के आधार पर डीबी स्टार टीम ने मामले की पड़ताल की, तो खुलासा हुआ कि इस तरह से शहर के लोगों के खातों से दस लाख रुपए तक उड़ा लिए गए हैं। चूंकि सारे ट्रांजेक्शन व्यक्ति के स्वयं के मोबाइल से होना दर्शाया जाता है, ऐसे में ठगों को ट्रेस करने में भी खासी परेशानी होती है। जिन खातों में ये पैसा ट्रांसफर किया गया है, सिर्फ उक्त लेन-देन के आधार पर ही ठगों को ट्रेस किया जा सकता है।
2- क्विक सपोर्ट-यह एप भी रिमोट सॉफ्टवेयर टूल है। इसमें किसी भी मोबाइल, कंप्यूटर या लैपटॉप को आपस में कनेक्ट किया जा सकता है। एक बार कनेक्शन होने के बाद दोनों डिवाइस के बीच महत्वपूर्ण व गोपनीय डाटा ट्रांसफर भी किया जा सकता है। शातिर ठग इस एप का इस्तेमाल यूपीआई के जरिए ठगी में करते हैं।
3- एयरड्रॉयड-इस एप के जरिए किसी भी दूसरे मोबाइल में आ रहे नोटिफिकेशन, एसएमएस को देखा जा सकता है। इस एप की विशेषता यह है कि ये मिररिंग की तर्ज पर काम करता है यानी कि एक डिवाइस में हो रहे किसी भी एप या डाटा में फेरबदल को दूसरे मोबाइल पर देखा जा सकता है।
1- एनीडेस्क-यह रिमोट डेस्कटॉप सॉफ्टवेयर टूल है। इस एप के जरिए शातिर ठग फोन को एक्सेस कर लेता है और फिर किसी भी जगह से आपके फोन की जानकारी डिलीट या कॉपी कर सकता है। बैंकिंग डाटा समेत अन्य जानकारी चुरा सकता है। एप डाउनलोड होने पर एक कोड जेनरेट होता है।
ऐसे काम करते हैं ये एप