बर्फीली आंधी के बीच फोकटे दारा फतह की टीएसएएफ की टीम**
अभियान में शामिल टीएसएएफ की टीम प्रेमलता अग्रवाल के साथ।
ट्रैकिंग करते पर्वतारोही।
टीम के सदस्यों के नाम
प्रेमलता अग्रवाल (टीम लीडर), सीए उमानाथ मिश्रा, दीपक खेमानी, उषा खेमानी, डॉ बिनोद अग्रवाल, बिनीता अग्रवाल, रिद्धीमा अग्रवाल, सीए अरविन्द जैन, एआर डिंपल जैन, अमित हाई टेक, स्वाति चक्रवर्ती,स्वरुप चक्रवर्ती, स्वरुप चक्रवर्ती, हेतल अडेसरा, शिल्पा आमीन, भव्य अडेसरा, कीया अडेसरा, यशना दोदराजका, दीया गुप्ता, कार्तिक गोयल, सात्विक सचदेवा, हर्षवर्धन गर्ग, हिमांशु अग्रवाल, पूजा भावसिंघका।
जमशेदपुर } टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन की 23 सदस्यीय टीम ने सिक्किम में फोकटे दारा की 3,733 मीटर की ऊंचाई पर चढ़ाई पूरी की। दल का नेतृत्व टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन की पद्मश्री प्रेमलता अग्रवाल कर रही थीं। जमशेदपुर से 23 सदस्यीय टीम में आठ बच्चे,आठ महिलाएं और सात पुरुष शामिल थे। टीम 28 फरवरी को न्यू जलपाईगुड़ी होते हुए उत्तराय (छोटा गांव का नाम) पहुंची। टीम चढ़ाई पूरी कर चार मार्च को नीचे उतर गई। पश्चिम सिक्किम में फ़ोकटे दारा ट्रैक जिसकी ऊंचाई 12150 फ़ीट है। काफी मुश्किलों हालातों के बीच दल ने सफलतापूर्वक फतह किया। टीम के एक सदस्य अरविंद जैन ने बताया कि 29 फरवरी को सुबह 8 बजे पूरी टीम ने जोश के साथ पहले दिन का ट्रैक समय पर शुरू किया। स्पोर्ट्स तेनजिंग हिलेरी पार्क होते हुए सब लोग तीन बजे अपने कैंप पहुंचे।
दूसरे दिन एक मार्च की सुबह टीम अपने अभियान पर रवाना हुई। यह ट्रैक करीब पांच घंटे का था और पूरा रास्ता बारिश की वजह से कीचड़ से भरा हुआ था। जिसकी वजह से टीम को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। रास्ते में फिसलन के बावजूद एक दूसरे का मनोबल बढ़ाते हुए सारे सदस्य दो बजे अपने अगले कैंप में पहुंचे। चार गाइड की मदद से पूरा अभियान तैयार किया गया और अचले (जगह का नाम) स्थित कैंप में सभी ने रात बिताई। यहां पर शून्य डिग्री तापमान ता। रात में तापमान गिरता चला गया और बारिश की वजह से सभी ठंड से ठिठुर रहे थे। तीसरे दिन दो मार्च को सुबह 8.30 बजे टीम अचले से कालिंजार होते हुए फ़ोकटे दारा (12150 फ़ीट) 3.30 बजे पहुंची। यह रास्ता काफी संकरा और लम्बा था और पूरा रास्ता एत फ़ीट से दो फ़ीट तक बर्फ से भरा हुआ था। रास्ते में एक तरफ से बर्फ से भरी खाई और दूसरी तरफ बर्फीली पहाड़ से होते हुए टीम के सारे सदस्य सुरक्षित फ़ोकटे दारा कैंप में पहुंचे। यहां पर पहुंचते ही बर्फ़बारी शूरू हो गई और देखते ही देखते यह बर्फीले तूफ़ान में तब्दील हो गया। सारे लोग अपने आप को बचाने के लिए तम्बू के अंदर चले गए टीम काफी थक चुकी थी। पर उत्साह अपने चरम पर था, लेकिन मौसम काफी तेजी से बिगड़ता चला गया और एक के बाद एक-दो टेंट बर्फीली आंधी की वजह से गिर गए।
ओले गिरने और तेज रफ़्तार आंधी की वजह से बाकी टेंट के गिरने का खतरा बढ़ता जा रहा था। जिसकी वजह से टीम लीडर प्रेमलता अग्रवाल ने अपने सूझ बूझ का परिचय देते हुए टीम को वहां से तुरंत सुरक्षित जगह में ले जाने का निर्णय लिया। सारे सदस्य करीब शाम सात बजे घोर अंधेरे में बर्फीले तूफ़ान का सामना करते हुए अपना सारा सामान छोड़कर एक घंटे का सफर तय करने के बाद भारत की सीमा पार करते हुए नेपाल में याक के तबेले में शरण ली। पूरा रास्ता जोखिम भरा था और अंधेरे में कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, पर सदस्यों का मनोबल कम नहीं हुआ और एक दूसरे के मदद करते हुए और हौसला बढ़ाते हुए वे गंतव्य स्थान तक पहुंचे। तापमान करीब 5 डिग्री तक गिर गया था। गर्माहट लाने के लिए टीम ने लकड़ियां जलाई और तबेले में पूरी रात बिती। सुबह तूफ़ान थमने के बाद चार गाइड और 3,4 सदस्यों ने जाकर सबका सामान याक पर लादकर वापस ले कर आए। फिर सबने उसी संकरे रास्ते से उतरना शुरू किया। चौथे दिन तीन मार्च को फ़ोकटे दारा से नेपाल सिक्किम नाईट परिकर आर्मी कैंप पहुंचे।
आर्मी के जवानों ने सबों का दिल से स्वागत किया। फिर दोपहर तीन बजे सारे लोग चितराय पहुंचे। चितराय में आर्मी कैंप में सबने रात बिताई । पांचवे दिन 4 मार्च को चितराय से उतरने के लिए सुबह आठ बजे रवाना हुए। करीब 11 बजे उतरे पहुंचे इतनी कठिनाइयों का सामना करने के बाद हम सब उतरे पहुंचकर काफी खुश थे। आंधी तूफान से भरे इस ट्रैक को सफलतापूर्वक पूरा करने के पीछे बहुत से कारण थे। जिसमें अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण कारण था। पहले दिन से ही सारे सदस्य समय से पहले तैयार होकर ट्रैक के लिए तैयार हो जाते थे और समय पर ट्रैक पूरा कर लेते थे। सदस्य एक दूसरे से तुलना करने के बजाय एक-दूसरे को प्रोत्साहित करते थे। किसी बात की शिकायत नहीं करते थे। खुले में टॉयलेट जाना सबके लिए एक बड़ा चैलेंज था, पर किसी ने शिकायत नहीं की खाने के मैन्यू को लेकर भी सब का रवैया सकारात्मक रहता था। किसी ने नहीं कहा कि तूफान के बीच में हम सफर नहीं करेंगे। कुल मिलाकर टीम के सारे सदस्य के बीच आपसी समन्वय और सौहार्द के वातावरण के साथ यह कठिन ट्रैक सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और इस तरह टीम ने प्रेमलता अग्रवाल के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक कठिनाइयों से ट्रैक को पूरा किया।
(जैसा की अरविंद जैन ने बताया)
दल का नेतृत्व कर रही थी पद्मश्री प्रेमलता अग्रवाल,दल में आठ महिलाएं, आठ बच्चे अौर सात पुरुष शामिल**
फ़ोकटे दारा का**
आंखों देेखा हाल**