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एक सिलेंडर में ढाई किलो रसोई गैस की चोरी, तौलने की मशीन भी गड़बड़ मिली

मंजीत कुमार पांडेय

Danik Bhaskar | Sep 13, 2018, 03:16 AM IST
मंजीत कुमार पांडेय
घरों में सप्लाई होने वाले गैस सिलेंडर से गैस की चोरी हो रही है। सोमवार को डीबी स्टार की स्टिंग ऑपरेशन में इसका खुलासा हुआ। गैस सिलेंडर की सप्लाई करने वाली ऑटो पर टीम लगातार नजर रख रही थी। सेामवार को गोलमुरी से बर्मामाइंस कंचननगर पहुंची एजेंसी से रजनी कुमारी ने सिलेंडर का वजन करने की मांग की। डिलीवरी ब्वॉय ने विंग स्केल मशीन से सिलेंडर तौल दिया। आशंका होने पर रजनी ने तीन बार सिलेंडर का वजन कराया, हालांकि हरेक बार सिलेंडर का वजन सही मिला। इसके बाद रजनी ने घर पर रखी इलेक्ट्रॉनिक मशीन से सिलेेंडर का वजन किया तो ढाई किलोग्राम कम वजन पाया।

इसके बाद वे हंगामा मचाने लगीं। नोंकझाेंक होता देख भीड़ इकट्ठा हो गई। मौके पर मौजूद लोग डिलीवरी ब्वॉय को घेर लिए। वे लोग उससे एजेंसी संचालक का मोबाइल नंबर मांगने लगे। लेकिन डिलीवरी ब्वॉय ने नंबर देने से मना कर दिया। दूसरा सिलेंडर देते हुए ऑफिस में आकर संचालक से मुलाकात की बात कही। इस दौरान मौका पाते ही वह रफूचक्कर हो गया।

बता दें, शहर में इंडेन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत गैस एजेंसी के दो लाख उपभोक्ता हैं। प्रतिदिन 80 हजार गैस सिलेंडर की डिलीवरी होती है। डिलीवरी ब्वॉय विंग स्केल मशीन में छेड़छाड़ कर दो से ढाई किलो कम वजन वाले गैस सिलेंडर की डिलीवरी करते हैं। इसकी जानकारी पेट्रोलियम विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों को है, लेकिन एजेंसी संचालकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है। आंकड़े पर गौर करें तो प्रतिदिन उपभोक्ताओं को 25 लाख रुपए से ज्यादा की चपत लगाई जा रही है।

डीबी स्टार स्टिंग

बगैर तौल कराए न लें सिलेंडर

यहां करें शिकायत : कम गैस सिलेंडर होने पर सेल्स ऑफिसर के मोबाइल नंबर 7633996384 पर सीधे बात कर सकते हैं। फेडरेशन के महासचिव तारा चंद अग्रवाल के मो. नंबर 9431380335 पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

जिम्मेवार भी मान रहे गैस की कटिंग हो रही, फिर भी नहीं करते ार्रवाई

ऐसे होती है गैस चोरी

गैस चोरी के लिए एक पाइप का इस्तेमाल किया जाता है। पाइप का एक सिरा भरे सिलेंडर के मुंह पर जोड़ दिया जाता है और दूसरा सिरा खाली सिलेंडर के मुंह पर। इसके बाद कुछ देर बाद गैस निकालने के बाद दोबारा सिलेंडर का भार चेक किया जाता है। यह सिलसिला पूरा दिन चलता है। इस दौरान पूरे दिन में 7-8 गैस सिलेंडर भर लिए जाते हैं। इनमें घरेलू सिलेंडर के साथ-साथ कमर्शियल सिलेंडर भी शामिल हैं।

80000 घरेलू गैस सिलेंडर की खपत प्रतिदिन

 सबसे बड़ी बात है कि ग्राहक जागरूक नहीं है। हरेक डिलीवरी ब्वॉय को विंग स्केल दिया गया है। सिलेंडर को वजन कराके ही लें।  तारा चंद अग्रवाल, महासचिव, एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर फेडरेशन, झारखंड

ये हैं गैस डिलीवरी करने वाले वाहन चालक। बर्मामाइंस में हंगामा होने के बाद वाहन लेकर फरार हो गए।





 घरेलू गैस सिलेंडर लगातार कम आ रहा है। इस बार मात्र 15 दिन में ही गैस खत्म हो गई। शिकायत करने पर भी कोई सुधार नहीं हो रहा है।  संजीव कुमार, उपभोक्ता

 होम डिलीवरी के वक्त गैस सिलेंडर को वजन करके नहीं दिया जाता। इलेक्ट्रानिक मशीन की मांग करने पर आनाकानी की जाती है। 20 दिन में गैस खत्म हो जाती है।  गुरमीत कौर, उपभोक्ता

शहर में प्रतिदिन 80 हजार गैस सिलेंडर की डिलीवरी होती है

सिलेंडर पर दो जगह होता है ग्रॉस वेट

सिलेंडर चाहे किसी भी कंपनी का हो, उसमें गैस 14.2 किलो ही होनी चाहिए। सिलेंडर का वजन अलग-अलग हो सकता है। इसकी जांच करने के लिए सिलेंडर में ऊपर की तरफ दो जगह ग्रॉस वेट दिया होता है।

वजन के नाम पर उलझ जाते हैं डिलीवरी ब्वॉय

गोलमुरी में कनिका इंडेन के उपभोक्ता बर्मामाइंस कंचननगर निवासी रजनी कुमारी के घर जब सिलेंडर आया तो शक होने पर उन्होंने गैस का वजन कराया। विंग स्केल में उसका वजन पूरा मिला, जबकि उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स मशीन में वजन किया तो ढाई किलो कम वजन मिला। जब इसकी शिकायत की गई तो डिलीवरी ब्वॉय उनसे उलझ गया।

...तो बनाते हैं बहाना

एजेंसी संचालकों द्वारा प्रत्येक हॉकर को होम डिलीवरी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक मशीन दी जाती है। हॉकर गाड़ी को एक जगह खड़ी कर सप्लाई करते हैं और बहाना बनाते हैं कि उनके पास तोल कांटा नहीं है।

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