घटना / प्रेमी ने शादी से इनकार किया तो नाबालिग ने लगा ली आग; अस्पताल में नहीं था स्ट्रेचर, चादर में ले गए



पहले पीड़िता को चादर में उठाया। पहले पीड़िता को चादर में उठाया।
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पहले पीड़िता को चादर में उठाया।पहले पीड़िता को चादर में उठाया।

  • बिरसानगर में जली नाबालिग के इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल में परेशान रहे परिजन 

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 12:20 PM IST

जमशेदपुर. बिरसानगर जोन नंबर-8 में प्रेमी के शादी से इनकार करने पर 16 वर्षीय नाबालिग ने शनिवार को खुद पर केरोसिन डालकर आग लगा ली। गंभीर हालत में घरवालों ने उसे एमजीएम अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में परिजन मदद के लिए चिल्लाते रहे। काेई नहीं आया। घरवाले खुद डॉक्टर के पास ले गए। डॉक्टर के अनुसार वह 90% जल चुकी है। हालत गंभीर है। उसे बर्न यूनिट में भर्ती किया गया है। 

पीड़िता की बड़ी बहन ने दी जानकारी

  1. वजन उठा नहीं पाए, फर्श पर गिरी पीड़िता।

    पीड़िता की बड़ी बहन ने बताया कि वह बारीडीह गई थी। दोपहर 12:30 बजे पति घर आए। तभी छोटी बहन की सहेली ने घटना की सूचना दी। पिता घर पर नहीं थे। छोटी बहन अकेली थी। पति ने बहन को अस्पताल पहुंचाया। वह साकची के एक कॉलेज में पढ़ती है। किसी लड़के से प्रेम प्रसंग चल रहा है। वह उससे शादी करना चाहती है। शनिवार को लड़के ने शादी से इनकार कर दिया तो आग लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की। 

  2. बर्न यूनिट ले जाने के लिए न वार्ड ब्वॉय मिले न स्ट्रेचर

    फर्श पर गिरने के बाद पीड़िता को फिर से उठाकर वॉर्ड तक पहुंचाया गया।

    कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में मरीजों की जान आफत में है। अस्पताल में मरीजों को न स्ट्रेचर मिल रहा है, न वार्ड पहुंचाने के लिए वार्ड ब्वॉय हैं। स्वास्थ्य विभाग ने आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या कम कर दी है। कार्यरत पारा मेडिकल स्टाफ हड़ताल में हैं और इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। शनिवार को एमजीएम के इमरजेंसी में बिरसानगर से 90% जली हुई नाबालिग को लाया गया। चिकित्सकों ने देखा और उसे बर्न वार्ड रेफर कर दिया। वार्ड ले जाने के लिए स्ट्रेचर नहीं मिल सका। पीड़िता के तीन परिजनों ने उसे चादर में लपेटा और बर्न वार्ड ले जाने लगे। वे वजन संभाल नहीं पाए और गिर गई। जलने की पीड़ा और गिरने की कराह सुनकर वहां मौजूद लोग सिहर उठे।

  3. अधीक्षक बोले : चुनाव आचार संहिता के कारण अभी सरकार के हाथ बंधे हैं

    नए अधीक्षक डॉ. अरुण कुमार ने कहा-मैं रातोरात बदलाव नहीं कर सकता। अस्पताल कर्मचारियों की मानसिकता में जब तक बदलाव नहीं होगा, व्यवस्था नहीं सुधरेगी। अस्पताल में एमसीआई की गाइडलाइन के अनुसार 600 कर्मचारियों की कमी है। जो हैं वे गुटों में बंटे हुए हैं। अभी चुनाव आचार संहिता लागू है। ऐसे में सरकार के हाथ भी बंधे हैं।

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