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योजना / कोल्हान विश्वविद्यालय को ट्राइबल सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाने का प्रस्ताव



Kolhan university proposes to make Tribal Central University
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Kolhan university proposes to make Tribal Central University
  • ओडिशा व प. बंगाल के आदिवासी छात्रों को फायदा होगा, अनुसंधान कर सकेंगे छात्र 
  • अमरकंटक, मध्य प्रदेश के बाद दूसरा केंद्रीय ट्राइबल विवि बनेगा 

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 10:14 AM IST

जमशेदपुर. कोल्हान विश्वविद्यालय को ट्राइबल सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा देने का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। झारखंड के साथ कोल्हान में आदिवासी समुदाय की बड़ी आबादी को केंद्र में रखकर तैयार किए गए प्रस्ताव में कहा गया है कि 2009 को रांची यूनिवर्सिटी से अलग कर झारखंड सरकार ने कोल्हान विवि की स्थापना की थी। वर्तमान में केयू में 19 अंगीभूत कॉलेज सहित 45 संबद्ध कॉलेज हैं। यह पूर्ण रूप से आदिवासी बहुल इलाका है और यहां पढ़नेवाले अधिकतर विद्यार्थी आदिवासी हैं। ऐसे में केयू का ट्राइबल सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दावा सबसे मजबूत है। 

प्रस्ताव से ओडिशा और पश्चिम बंगाल के आदिवासी छात्रों को भी फायदा

  1. केंद्रीय यूनिवर्सिटी के पोषित इलाके का क्षेत्रफल दिखाते हुए कहा गया है कि प्रस्ताव से ओडिशा और पश्चिम बंगाल के आदिवासी छात्रों को भी फायदा होगा। 2011 की जनगणना का हवाला देते हुए जिले की आबादी में महिलाओं (खासकर आदिवासी) की संख्या और कम साक्षरता दर का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, ट्राइबल यूनिवर्सिटी में सभी जाति व समूह के विद्यार्थी शिक्षा ले सकेंंगे। प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो यह झारखंड का पहला और देश का दूसरा ट्राइबल विश्वविद्यालय होगा। अभी देश में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक, मध्य प्रदेश के बाद देश का दूसरा केंद्रीय ट्राइबल विवि बनेगा।  

  2. योजना का मकसद

    • मुख्य रूप से भारत की जनजातीय आबादी को उच्च शिक्षा और अनुसंधान की सुविधाएं प्रदान करना। 
    • आदिवासी कला में शिक्षण और अनुसंधान सुविधाओं, परंपरा, संस्कृति, भाषा, औषधीय प्रणाली, सीमा शुल्क, वन आधारित आर्थिक गतिविधियों, वनस्पति, जीव और जनजातीय क्षेत्रों के प्राकृतिक संसाधनों का अध्ययन कर उसका प्रसार करना। 
    • विशेष रूप से सांस्कृतिक अध्ययन और आदिवासी समुदायों पर अनुसंधान करने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों और संगठनों के साथ सहयोग करना। 
    • आदिवासी केंद्रित विकास के मॉडल तैयार करने के लिए रिपोर्ट और मोनोग्राफ प्रकाशित और जनजातियों से संबंधित मुद्दों पर सम्मेलनों और सेमिनारों का आयोजन करने के लिए और विभिन्न क्षेत्रों में नीतिगत मामलों को जानकारी उपलब्ध कराना। 
    • सक्षम जनजातीय समुदायों के सदस्यों को बढ़ावा देने का प्रबंध विश्वविद्यालय के माध्यम से करने के साथ ही उन्हें उच्च शिक्षा तक पहुंचाना। 
    • अनुशासनात्मक अध्ययन और शोध में नए विचारों को बढ़ावा देने के लिए उपयुक्त कदम उठाने के साथ ही सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से पिछड़े अनुसूचित जनजातियों लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराना। 

  3. यह फायदे होंगे

    • सेंट्रल ट्राइबल यूनिवर्सिटी बनने से केंद्र से अतिरिक्त फंड के साथ विश्वविद्यालय को अधिक स्वायत्तता मिल जाएगी। 
    • केंद्रीय विवि का दर्जा मिलने से विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा बढ़ेगी और इसके प्रति छात्रों का आकर्षण बढ़ेगा। 
    • अगर केंद्र सरकार प्रस्ताव को स्वीकार्य करता है तो यह इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (अमरकंटक, मध्य प्रदेश) के बाद देश का दूसरा व राज्य का पहला केंद्रीय ट्राइबल विवि बन जाएगा। 

  4. ट्राइबल यूनिवर्सिटी बनाने के आधार

    • इलाके का क्षेत्रफल 10863 वर्ग किमी है। प्रस्ताव में कहा गया है कि इससे ओड़िशा, बंगाल में रहने वाले आदिवासी समाज को लाभ मिलेगा। 
    • विवि के माध्यम से आदिवासी भाषा, कला व संस्कृति संरक्षण के साथ ही विकास का मार्ग प्रशस्त हाेगा, जो अभी विलुप्त होने के कगार पर है। 

  5. मुख्यमंत्री व राज्यपाल से मिलकर विवि का प्रस्ताव देंगी वीसी

    केयू काे ट्राइबल यूनिवर्सिटी बनाने के प्रस्ताव को वीसी डॉ शुक्ला मोहंती राज्यपाल अौर सीएम के समक्ष पेश करेंगी। मंजूरी के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने में अड़चन न हो। इसके लिए योजना बनाकर काम किया जा रहा है। कोल्हान विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉक्टर एके झा ने कहा कि ट्राइबल यूनिवर्सिटी बनने से कोल्हान आदिवासी शिक्षा केंद्र के रूप में उभर कर सामने आएगा। हालांकि ये सभी भविष्य की योजनाएं हैं। इस पर अभी कुछ करना जल्दबाजी होगी। 

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