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इस्पात नगरी में फौलाद सा इरादा रखने वाले लोगाें की कमी नहीं है। ऐसी कई शख्सियत हैं, जिन्होंने चुनौतियों का सामना...

Danik Bhaskar | May 01, 2018, 03:10 AM IST
इस्पात नगरी में फौलाद सा इरादा रखने वाले लोगाें की कमी नहीं है। ऐसी कई शख्सियत हैं, जिन्होंने चुनौतियों का सामना किया। परिस्थितियों को अनुकूल बनाया और हालात बदल डाले। शून्य से सफर की शुरुआत की और शिखर तक जा पहुंचे। मजदूर से कॅरियर शुरू किया और रघुवर दास मुख्यमंत्री बनकर राज्य को नई दिशा देने लगे। जिस कंपनी में एक साधारण कर्मचारी थे, उसी में रुसी मोदी चेयरमैन बने। झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री रघुवर दास टाटा स्टील के साधारण मजदूर रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के ठीक पहले कंपनी को अलविदा कहा। कर्मचारी रहते हुए वे राज्य में वित्त, नगर विकास, श्रम एवं नियोजन, भवन जैसे विभागों के मंत्री रह चुके हैं। रुसी मोदी टाटा स्टील के शीट मिल में कामगार थे। 1984 में इसी कंपनी के चेयरमैन सह प्रबंध निदेशक बने। यूके चतुर्वेदी ने कर्मचारी से एमडी का सफर तय किया। एसबी सान्याल, जेबी सिंह ने चीफ बनने में कामयाबी पाई। ठेका मजदूर से एमपी सिंह विधानसभा अध्यक्ष बने। वार्ड ब्वॉय से सुधीर महतो झारखंड के डिप्टी सीएम तक सफर तय किया। प्रदीप बलमुचू टाटा स्टील में कर्मचारी थे। उन्होंने मजदूर राजनीति से शुरुआत की अौर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व झारखंड के मंत्री बने। 1 मई को मजदूर दिवस पर ऐसी शख्सियतों पर खास रिपोर्ट, जो शून्य से शिखर तक पहुंचे।

मजदूर दिवस पर विशेष

शहर की 7 शख्सियत : इन्हांेने शून्य से शुरुआत की, शिखर तक पहुंचे

रघुवर दास : मजदूरी को कर्म बनाया, झारखंड के सीएम बने

रुसी मोदी : साधारण कर्मचारी से टाटा स्टील के चेयरमैन बने

मजदूर से मुख्यमंत्री बने रघुवर दास, एमपी सिंह विधानसभा अध्यक्ष, सुधीर महतो डिप्टी सीएम, प्रदीप और त्रिलोचन मंत्री, रुसी मोदी कर्मचारी से टाटा स्टील के चेयरमैन व यूके चतुर्वेदी ने एमडी तक का सफर तय किया

रघुवर दास को भला कौन नहीं जानता? उन्होंने टाटा स्टील में रोलिंग मजदूर के रूप में अपना सफर शुरू किया और आज झारखंड के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज से बीएससी और विधि स्नातक की परीक्षा पास की। 1977 में जनता पार्टी के सदस्य बने। 1980 में भाजपा की स्थापना के साथ ही वे सक्रिय राजनीति में आए। 1995 में पहली बार जमशेदपुर पूर्व से विधानसभा चुनाव लड़ा और विधायक बने। तब से लगातार पांचवीं बार उन्होंने इसी क्षेत्र से चुनाव जीता। रघुवर दास 15 नवंबर 2000 से 17 मार्च 2003 तक श्रम मंत्री रहे। मार्च 2003 से 14 जुलाई 2004 तक भवन निर्माण और 12 मार्च 2005 से 14 सितंबर 2006 तक वित्त, वाणिज्य और नगर विकास मंत्री रहे। 2009 से 30 मई 2010 तक झामुमो के साथ बनी भाजपा गठबंधन सरकार में वे उप मुख्यमंत्री, वित्त, वाणिज्य, कर, ऊर्जा, नगर विकास, आवास और संसदीय कार्य मंत्री भी रहे।

रुसी मोदी ऐसी शख्सियत में शामिल हैं, जिन्होंने 1939 में टाटा स्टील (तत्कालीन टिस्को) में कर्मचारी के रूप में कॅरियर की शुरुआत की। वे शीट मिल में कामगार थे और कंपनी के चेयरमैन बने। उन्हें जमशेदपुर को विकसित शहर बनाने का श्रेय भी जाता है। रुसी मोदी में जुनून था आगे बढ़ने का। लिहाजा मेहनत की। संघर्ष किया। उनकी क्षमता देखकर कंपनी ने 1953 में कार्मिक निदेशक बनाया। 1965 में कच्चे माल के निदेशक बनाए गए। 1970 में निदेशक संचालन और 1972 में संयुक्त निदेशक बनाया गया। वे 1984 में चेयरमैन बने। रुसी माेदी ने कंपनी कोे ऊंचे मुकाम पर पहुंचाया। उनके उत्कृष्ट कार्यों के कारण 1989 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। रुसी मोदी 1998 में जमशेदपुर लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़े, हालांकि भाजपा उम्मीदवार आभा महतो से हार गए थे। 96 साल की उम्र में रुसी मोदी का 2014 में कोलकाता में निधन हो गया।

जमशेदपुर ने मजदूरों को मुख्यमंत्री, मंत्री विधानसभा अध्यक्ष और सीईओ तक बनाया

एसबी सान्याल

कर्मचारी से टाटा स्पंज के एमडी की कुर्सी पर ताजपोशी

एसबी सान्याल भी ऐसी शख्सियत हैं, जिन्होंने कभी हार न मानी। संघर्ष किया और एक साधारण कर्मचारी से बड़े अधिकारी बने। वे भी टाटा स्टील में असिस्टेंट सेंकेंड हैंड थे। कंपनी में पहले यह पद कर्मचारी की श्रेणी में था। अब खत्म हो चुका है। सान्याल ने एसएमएस वन में काम किया। वे आयरन एंड स्टील के एजीएम बनने में कामयाब रहे। 80 के दशक में एसबी सान्याल की टाटा स्पंज के एमडी के पद पर ताजपोशी हुई।

जेबी सिंह

रिटायरमेंट के बाद भी ली गई कलिंगा नगर में सेवा

जेबी सिंह ने भी टाटा स्टील में असिस्टेंट सेकेंड हैंड के नाते योगदान दिया था। उन्होंने तेजी से स्टील उत्पादन की बारीकी को समझना शुरू किया। मेहनत की, सफलता की ऊंचाई पर चढ़ते चले गए। वे एलडी टू के चीफ बनाए गए। जेबी सिंह रिटायर हुए तो टाटा स्टील कलिंगा नगर में नया प्लांट लगा रही थी। प्रबंध निदेशक टीवी नरेंद्रन के अनुरोध पर सिंह ने रिटायरमेंट के बाद कलिंगा नगर प्लांट में अपनी सेवाएं दी।

यूके चतुर्वेदी : मेहनत की बदौलत तरक्की की, पोर्ट एलबर्ट के प्रबंध निदेशक बने

यूके चतुर्वेदी ने 1969 में टाटा स्टील ज्वाइन किया था। असिस्टेंट सेकेंड हैंड के नाते योगदान दिया था। एसएमएस-3, एलडी शॉप-1, एलडी-2 में काम किया और अपनी मेहनत और काबिलियत के बूते तरक्की के सोपान चढ़ते गए। 1997 में उन्हें स्टील व प्राइमरी मिल का एजीएम बनाया गया। जल्द ही डीजीएम, फिर कंपनी के उपाध्यक्ष बन गए। टाटा स्टील ने यूरोप में कोरस स्टील का अधिग्रहण किया तो चतुर्वेदी को पोर्ट एलबर्ट में एमडी बनाया गया था।

एमपी सिंह : ठेका मजदूर से तय किया विस अध्यक्ष का सफर

70 के दशक में बतौर ठेका मजदूर कॅरियर की शुरुआत की। कई उतार-चढ़ाव देखे। मजदूर रहते साथियों के बीच काफी लोकप्रिय थे। यहां काम करते हुए उन्होंने राजनीति में कदम रखा और सत्ता के शीर्ष तक पहुंचे। जमशेदपुर पश्चिमी से विधायक बने। वे झारखंड के पहले वित्त मंत्री थे, जिन्होंने लगातार तीन साल तक लाभ का बजट पेश किया था। फिर विधानसभा अध्यक्ष बने थे। 25 वर्षों तक भाजपा में रहे। 2005 में पार्टी ने उनका टिकट काट दिया तो नाराज होकर राजद में चले गए थे। हालांकि, उस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लंबी बीमारी के बाद 25 मार्च 2005 में उनका टीएमएच में निधन हो गया था।

सुधीर महतो : शहीद निर्मल महतो के भाई टीएमएच के वार्ड ब्वाय थे, उप मुख्यमंत्री बने

सुधीर महतो उन नेताओं में शामिल हैं जो शून्य से शिखर तक पहुंचे। उनके भाई निर्मल महतो झारखंड आंदोलन की लड़ाई लड़ रहे थे, झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष के दायित्व का निर्वहन कर रहे थे तो उस वक्त सुधीर महतो टीएमएच में वार्ड ब्वाय थे। निर्मल महतो के निधन के बाद सुधीर महतो ने राजनीति में कदम रखा था। वे उप मुख्यमंत्री बने थे। प्रदीप बलमुचू भी टाटा स्टील के कर्मचारी थे। वे भी अविभाजित बिहार में मंत्री रहे।