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प्रसूता और ऑर्थो के मरीजों के लिए अस्पताल में अलग काउंटर नहीं खुले; घंटों कतार में खड़ा रहने के बाद भी नहीं मिलती दवा

डीबी स्टार

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:10 AM IST

प्रसूता और ऑर्थो के मरीजों के लिए अस्पताल में अलग काउंटर नहीं खुले; घंटों कतार में खड़ा रहने के बाद भी नहीं मिलती दवा
डीबी स्टार जमशेदपुर

महात्मा गांधी मेमोरियल अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराने के बाद दवा के लिए मरीजों को भटकना पड़ रहा है। काउंटर पर एक घंटे तक लाइन में लगने के बाद भी कभी-कभार खाली हाथ लौटना पड़ता है। खासकर गर्भवती महिलाओं को काफी परेशानी होती है। अव्यवस्था का आलम यह है कि कई बार मरीजों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ रही है। एमसीआई ने 13-14 फरवरी को एमजीएम अस्पताल के निरीक्षण के दौरान सभी सरकारी अस्पतालों में प्रसूता और हड्डी के मरीजों के लिए अलग दवा काउंटर खोलने का फरमान जारी किया था।

यह आदेश झारखंड के एमजीएम के अलावा पीएमसीएच धनबाद और रिम्स रांची के लिए भी था। लेकिन लगभग दो महीने समय बीत जाने के बाद भी किसी भी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों आदेश का पालन नहीं किया है।

इलाज कराने के बाद मरीजों को नहीं मिल रही दवाएं

दवा लिए बगैर लौट गए

करनडीह निवासी बिमलेश का दायां पैर फ्रैक्चर हो गया है। सोमवार को टेंपो से एमजीएम में इलाज कराने आया था। एमजीएम में इलाज कराने के बाद टेंपो चालक ललित को दवा के लिए भेजा। सुबह 11.45 से दोपहर 12.30 बजे काउंटर के पास लाइन में खड़ा रहा। लेकिन, काउंटर में दवा देने वाला कर्मचारी गायब था। पूछताछ करने पर उन्हें बताया गया कि अभी सवा घंटे और इंतजार करने पड़ेंगे। अंतत: बिमलेश दवा लिए बगैर लौट गया।

केस-1

दवा के लिए धक्का-मुक्की

भुइयांडीह की रहने वाली संगीता इलाज कराने खासमहल सदर अस्पताल आई थीं। वह छह माह की गर्भवती हैं। इलाज कराने के बाद वह दवा लेने महिला काउंटर के पास गईं तो देखा कि काफी भीड़ लगी है। दवा के लिए लोग धक्का-मुक्की कर रहे हैं। ऐसे में संगीता दवा लिए बिना लौट गईं। संगीता का कहना है कि वे परिजन को पर्ची देकर दवा मंगा लेंगी। मसलन यहां भी एमजीएम जैसी स्थिति है। इलाज कराने के बाद ज्यादातर लोगों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है।

केस-2

काउंटर पर नहीं मिलती दवा

माेइन खान अपने पांच वर्षीय बेटे मो. नासिर का इलाज कराने खासमहल सदर अस्पताल आए थे। मो. नासिर का दायां हाथ फ्रैक्चर हो गया है। इलाज कराने के बाद वे भी दवा लेने के लिए काउंटर के पास गए तो देखा की लंबी लाइन लगी है। काफी शोर-शराबा हो रहा है। ऐसे में नन्हे मो. नासिर को अकेले छोड़कर दवा के लिए लाइन में लगना मुनासिब नहीं समझा। लिहाजा मोइन खान भी दवा लिए बगैर लौट गए। इनके जैसे कितने मरीज प्रतिदिन दवा लिए बगैर लौट जाते हैं।

केस-3

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने 13-14 फरवरी को एमजीएम अस्पताल का निरीक्षण किया था

 एमजीएम समेत सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में प्रसूता और हड्डी के मरीजों के लिए अलग काउंटर खोलने के लिए कहा गया था। इससे ड्रेसिंग, इंजेक्शन और दवा लेेने में आसानी होगी। इस बाबत विभागीय अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है।  डॉ. विभूति भूषण, अधीक्षक, एमजीएम अस्पताल

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