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वन भूमि और रहवासी इलाके में चल रही एलपीजी सिलेंडर फैक्ट्री; NOC भी नहीं ली

जमशेदपुर

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 03:10 AM IST
वन भूमि और रहवासी इलाके में चल रही एलपीजी सिलेंडर फैक्ट्री; NOC भी नहीं ली
जमशेदपुर
सुंदरनगर स्थित तुरमाडीह कॉलोनी के बीचोंबीच एलपीजी सिलेंडर बनाने की फैक्ट्री चल रही है। कायदे-कानून को ताक पर रखकर फैक्ट्री संचालित हो रही है। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में इसका खुलासा हुआ है। इंडस्ट्रीज अंडर रेडमेजर पॉल्यूशन कैटेगरी में सूचीबद्ध फैक्ट्री वन भूमि से न्यूनतम 1000 मीटर और रेलवे लाइन से 200 मीटर दूर होनी चाहिए।

आरटीआई के तहत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और वन विभाग से मांगी गई सूचना में अलग-अलग जवाब दिए गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वन क्षेत्र से फैक्ट्री की दूरी 600 मीटर बता रहा है। वहीं वन विभाग मात्र 92 मीटर दूर बता रहा है। एक ही फैक्ट्री को लेकर अलग-अलग जवाब दिए गए हैं। रहवासी क्षेत्र में फैक्ट्री चलाने की मनाही है। तुरमाडीह कॉलोनी में दो बार आगजनी की घटनाएं भी हो चुकी है। बड़े पैमाने पर जानमाल का नुकसान हो चुका है। इस संबंध में मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र और पीएमओ (प्रधानमंत्री कार्यालय) में भी शिकायत की गई है। डीबी स्टार की छानबीन में पता चला कि तुरमाडीह में अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लिए बगैर सिलेंडर फैक्ट्री चल रही है। यह मामला राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के अलावा मुख्यमंत्री जनसंवाद में विचाराधीन है। गलत तरीके से चल रही फैक्ट्री से ग्रामीणों की जान जोखिम में है।

विराेधाभास

सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत चाैकाने वाला खुलासा हुआ है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार सुंदरनगर में चल रही सिलेंडर फैक्ट्री वन क्षेत्र से लगभग 600 मी. दूर है। जबकि वन विभाग द्वारा दी गई रिपोर्ट के अनुसार फैक्ट्री की दूरी वन विभाग से लगभग 92 मीटर है। दोनों के रिपोर्ट में विरोधाभास है।

ये है नियम

साईं सिलेंडर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी इंडस्ट्रीज अंडर रेडमेजर पॉल्यूशन कैटेगरी के एनेक्चर - 1 पार्ट (बी) में सूचीबद्ध है। ऐसे में वन भूमि से एक हजार मीटर की न्यूनतम दूरी और रेलवे लाइन से दो सौ मीटर की दूरी पर फैक्ट्री स्थापित करने का नियम है।

प्रदूषण विभाग के जवाब पर आपत्ति : सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत विभाग द्वारा दी गई जानकारी पर शिकायतकर्ता ने आपत्ति जताई है। सिलेंडर फैक्ट्री के एनओसी आवेदन के आलोक में कनीय पर्यावरण अभियंता राम प्रवेश कुमार, राजीव कुमार सिन्हा, अशोक कुमार यादव ने स्थल का निरीक्षण किया था। टीम की रिपोर्ट पर एनओसी आवेदन को रद्द कर दिया गया था। दूसरी बार विशेषज्ञ समिति की अनुशंसा पर एनओसी प्रदान की गई।

रोजाना बनते हैं दो हजार सिलेंडर

सुंदरहातु में रोजाना दो हजार सिलेंडर टंकी का निर्माण होता है। स्थानीय के बजाय दिल्ली व अन्य राज्यों के मजदूर फैक्टरी में कार्यरत हैं। इलाके में बेकारी की समस्या है। इससे ग्रामीणों में भी रोष है।

रेलवे और वन विभाग के नियमों की भी अनदेखी

मुख्यमंत्री जनसंवाद में तू तू-मैं मैं

गलत तरीके से सुंदरहातु में चल रही सिलेंडर फैक्ट्री की शिकायत मुख्यमंत्री जनसंवाद में की गई थी। इस दौरान हंगामा हुआ था। सूचना अधिकार की रिपोर्ट पर शिकायतकर्ता लगातार इसे गलत ठहरा रहे हैं।

सुंदरनगर में चल रही सिलेंडर फैक्ट्री।

रहवासी क्षेत्र में फैक्ट्री बंद होनी चाहिए

झापीपा जिलाध्यक्ष सह आरटीआई कार्यकर्ता कृतिवास ने कहा- रहवासी इलाके में सिलेंडर फैक्ट्री चल रही है। दो बार हादसे भी हो चुके हैं। आगजनी के चलते बड़े पैमान पर जानमाल का नुकसान हुआ था। ग्राामीणों का बीमा भी नहीं हुआ है। पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है। सीओ ने जांच के नाम पर खानापूर्ति की है।

एनओसी देना हमारा काम नहीं: डीएफओ

 इस संबंध में जिला प्रशासन न गाइडलाइन मांगी थी। वह उपलब्ध करा दी गई है। अनापत्ति प्रमाणपत्र देना प्रदूषण विभाग का काम है। हमारे जंगल में कोई गड़बड़ी होगी तो कार्रवाई करेंगे।  सबा आलम अंसारी, डीएफओ

नहीं उठाया फोन

प्रदूषण विभाग के क्षेत्रीय पदाधिकारी सुरेश पासवान से इस संबंध में पक्ष लेने के लिए फोन किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।

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