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नागाडीह और शोभापुर में शांति, लेकिन बाहरी लोगों को जाने में लगता है डर, शक की नजर से देखते हैं ग्रामीण

डीबी स्टार

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 03:10 AM IST

नागाडीह और शोभापुर में शांति, लेकिन बाहरी लोगों को जाने में लगता है डर, शक की नजर से देखते हैं ग्रामीण
डीबी स्टार जमशेदपुर

18 मई 2017 जमशेदपुर और पड़ोसी जिले सरायकेला के लिए वो काला दिन, जब बच्चा चोरी की अफवाह में भीड़ ने एक बुजुर्ग महिला सहित आठ लोगों की हत्या कर दी थी। जमशेदपुर के नागाडीह और सरायकेला के शोभापुर में भीड़ ने आठ निर्दोषों को पत्थर से कूचकर मार डाला था। पुलिस सूझबूझ से काम लेती तो सभी को बचाया जा सकता था। घटना के सालभर पूरे हो गए, लेकिन इसका दाग अब भी नहीं मिटा है। दोनों गांवों में शांति है, लेकिन बाहरी लोगों को जाने में अब भी डर लगता है। ग्रामीण भी उन्हें शक की नजर से देखते है। मामला अदालत में है। कई अारोपी पकड़े गए। कुछ जमानत पर छूट गए, मुख्य आरोपी फरार हैं। कई आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। आयुक्त की अनुशंसा पर मामले में लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर कार्रवाई हुई। सरायकेला डीसी घोलप रमेश, एसपी राकेश बंसल सहित कई अफसरों को निलंबित किया गया। लेकिन सभी निलंबन मुक्त हो गए।

नागाडीह हत्याकांड के चश्मदीद उत्तम वर्मा को इंसाफ का इंतजार है। भीड़ ने उनके दो सगे भाई गौतम वर्मा व विकास वर्मा, मित्र गंगेश गुप्ता की हत्या कर दी थी। तीनों को बचाने गई बुजुर्ग दादी रामसखी देवी को भी नहीं बख्शा था। एक महीना टीएमएच में रहने के बाद उनकी मौत हो गई थी। उत्तम आज भी समझ न पाए कि भीड़ ने चार बेगुनाहों काे क्यों मार डाला?‌ कहते हैं-पुलिस चाहती तो चारों लोगों को बचाया जा सकता था। यही स्थिति शोभापुर की है, शांतिप्रिय लोग हिंसक कैसे हो गए? गांव में शांति बहाली हो गई, लेकिन घटना के चश्मदीद मुर्तजा अंसारी को इस बात का मलाल है कि जिला मुख्यालय सरायकेला से समय पर पुलिस आ जाती तो रिश्तेदार माे. हलीम और उनके साथी मो. नईम, मो. सज्जाद आैर मो. सिराज को बचाया जा सकता है। नागाडीह-शोभापुर हत्याकांड के एक साल पूरे हाेने पर भास्कर रिपोर्टर ने दोनों गांवों का हाल जाना। इन गांवों के ग्रामीण आज भी अन्जान चेहरे को शंका की नजर से देखते हैं। पढि़ए ग्राउंड रिपोर्ट...

बेकाबू भीड़ ने बच्चा चोरी की अफवाह में आठ निर्दोषों की ले ली थी जान, पीड़ित परिवार को इंसाफ का इंतजार, कोर्ट में चल रहा है मामला, खुलेआम घूम रहे मुख्य आरोपी, पुलिस की पकड़ से दूर

नागाडीह|बुजुर्ग रहम की भीख मांग रही थी और भीड़ ने मार डाला

चश्मदीद को खतरा, बेपरवाह पुलिस, बहन को नहीं मिली नौकरी

नागाडीह हत्याकांड के चश्मदीद गवाह उत्तम वर्मा की चिंता पुलिस-प्रशासन को नहीं है। उन्हें बॉडीगार्ड मिला था, एक माह बाद लौटा लिया गया। उत्तम की जान को खतरा है। इसके बावजूद सुरक्षा नहीं देना परिवार वालों के समझ के परे है। घटना के तीसरे दिन उपायुक्त, एडीएम और वरीय अधिकारी उत्तम वर्मा के घर गए थे। पीड़ित परिवार को सहायता के तौर पर प्रशासन ने मुआवजा राशि के साथ छोटी बहन को नौकरी का आश्वासन दिया गया था। कौशल विकास योजना के तहत या टाटा स्टील के सीएसआर के माध्यम से नौकरी देने की बात कही थी, लेकिन पहल नहीं हुई।

 उत्तम वर्मा चश्मदीद गवाह हैं। उनके रिक्वेस्ट पर गवाही के दौरान सुरक्षा के लिहाज से जवान दिए जाते हैं। अन्य दिनों के लिए उत्तम वर्मा या उनके परिवार की आेर से सुरक्षा व्यवस्था नहीं मांगी गई है। अगर उन्हें जरूरत महसूस होगी तो विचार किया जाएगा। फरार जो भी आरोपी हैं, उन्हें पकड़ने का प्रयास चल रहा है।  प्रभात कुमार, सिटी एसपी

दोषी अफसर निलंबित किए गए, फिर हो गए बहाल

नागाडीह-शोभापुर हत्याकांड की जांच आयुक्त प्रदीप कुमार ने की थी। उन्होंने जांच में पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिले के 10 अधिकारियों को दोषी करार दिया था। जांच रिपोर्ट में अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी। अफसरों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई, लेकिन सभी कुछ ही दिनों में बहाल कर दिए गए। उन्हें दूसरे शहरों में तबादला कर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई। सभी को अच्छे जगह पर तैनात कर दिया गया।

वह स्थान, जहां भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी

घटना के बाद सभी आए, अब कोई हाल पूछने वाला नहीं : गुरु प्रसाद

नागाडीह की सुनसान सड़कें। चारों तरफ खामोशी, शांति। इक्का-दुक्का लोग मिले। वे अन्जान चेहरे को शंका की नजर से देख रहे थे। हिंसक भीड़ ने जुगसलाई रामटेकरी रोड निवासी गौतम वर्मा व विकास वर्मा, उनकी दादी रामसखी देवी, गाढ़ाबासा के रहनेवाले गंगेश गुप्ता की हत्या कर दी थी। गुरु प्रसाद वर्मा ने घटना में अपनी प|ी और दो पाेते काे खाेया है। कहते हैं-घटना के बाद मंत्री-संतरी व नेता आए, अब कोई पूछने वाला नहीं है। हत्यारों को सजा नहीं मिली। घर परिवार को खतरा है। सरकार सोई है। बड़े-बड़े वादे किए, कुछ नहीं मिला। मेरे पोते पहलवान थे। उन पर तलवार-फरसा से हमला नहीं किया होता तो कोई मार नहीं सकता था। उत्तम वर्मा ने कहा- मुझे जिंदा रहने का अफसोस है, लेकिन भगवान ने मुझे दोषियों को सजा दिलाने के लिए बचाया है। उत्तम की मां कुंती देवी घटना को भुला नहीं पाई हैं।

10 आरोपीको हाईकोर्ट से जमानत

मामले में जगत मार्डी, विभीषण सरदार, डॉक्टर मार्डी, रंगो पूर्ति मुख्य आरोपी थे, सभी फरार हैं। मामले की सुनवाई जमशेदपुर कोर्ट में चल रही है। चश्मदीद उत्तम गुप्ता की गवाही हुई है। पिता माणिक चंद्र वर्मा की गवाही बाकी है। 29 नामजद में 26 को कोर्ट लाया गया था। एक को छोड़ सभी की पहचान उत्तम वर्मा ने कर ली थी। हाल में जगत मार्डी को एक राजनीतिक कार्यक्रम में देखा गया था।

आयुक्त की रिपोर्ट पर इन अफसरों पर हुई थी कार्रवाई

सरायकेला डीसी घोलप रमेश गोरख, एसपी राकेश बंसल, धालभूम एसडीओ मनोज रंजन, बागबेड़ा थाना प्रभारी आमिष हुसैन, मानगो थाना प्रभारी बुधराम उरांव, मानगो डीएसपी केएन मिश्रा, मानगो अक्षेस के विशेष पदाधिकारी जगदीश यादव, आजादनगर थाना प्रभारी जीतेंद्र ठाकुर, पोटका बीडीओ प्रभात चंद्र दास, कोवाली थाना प्रभारी केएन ओझा, प्रभात चंद्र दास, पोटका सीओ द्वारिका बैठा, राजनगर बीडीओ संतोष कुमार प्रजापति, राजनगर सीओ राजीव नीरज।

शोभापुर|गांव में शांति, रिश्ताें में दरार

राजनगर प्रखंड का शोभापुर गांव। दिन वही, अफवाह वही, यहां भी भीड़ ने चार युवकों को बेरहमी से मार डाला था। गुरुवार को इस गांव में जाते ही लोग शंका की नजर से देखने लगे। दो-तीन ग्रामीणों ने पूछताछ के बाद आगे बढ़ने दिया। शाेभापुर उस काले दिन से उबरने की कोशिश में है, लेकिन टीस अब भी बाकी है। गांव में शांति है, लेकिन रिश्तों में दरार कायम है। 21 लोग जेल गए थे। मुख्य आरोपी धरणीधर ज्योति और तुरूप महतो जेल में हैं। घटना के बाद पुरुष फरार हो गए थे। शोभापुर के पास से हाता-चाईबासा मुख्य मार्ग को जोड़नेवाली सड़क गुजरती है। इससे जाने वाले लोगों में शोभापुर हत्याकांड का खौफ अब भी दिखाई देता है।

सरायकेला कोर्ट में चल रही है सुनवाई

अब ग्रामीणों को पछतावा : तारक

राजनगर निवासी तारकचंद्र ने कहा- शाेभापुर की घटना काफी शर्मनाक थी। बच्चा चोरी की अफवाह इतनी भयावह थी कि लोग कुछ सुनने को तैयार नहीं थे। ग्रामीण काफी आवेश में थे। जो समझाता उस पर भड़क जाते। उनको कुछ सूझ नहीं रहा था। लेकिन अब सबको पछतावा है।

गांव में सन्नाटा।

शोभापुर में मो. मुर्तजा अंसारी के घर उनके रिश्तेदार में मो. हलीम और उनके दोस्त मो. नईम, मो. सज्जाद और मो. सिराज देर रात में कार से आए थे। बच्चा चोरी की अफवाह में 15 गांव के ग्रामीणों ने पीट-पीटकर चारों की हत्या कर दी थी। उन्हें बचाने अाए राजनगर के थानेदार तुलेश्वर कुशवाहा और पुलिस टीम पर भी ग्रामीणों ने हमला किया था। मामले पर चार प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जिसकी सुनवाई सरायकेला कोर्ट में चल रही है।

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