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राज्य का पहला सरकारी स्कूल जहां गांव के बच्चों के विकास के लिए शिक्षक अपनी सैलरी से कोच रखकर सिखा रहे तैराकी और तीरंदाजी

3 वर्ष पहले
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जमशेदपुर से 50 किमी दूर पोटका प्रखंड में ऐसा सरकारी स्कूल, जहां कोच रखकर बच्चों को नि:शुल्क तैराकी-तीरंदाजी सिखाई जाती है। उत्क्रमित मध्य विद्यालय टांगराईन की अपनी वेबसाइट है। इस पर स्कूल की सारी गतिविधियां होती हैं। बच्चे वाल मैगजीन निकालते हैं और स्कूल की होने वाली गतिविधियों को रिपोर्ट करते हैं। स्कूल में बच्चों को भाषाई ज्ञान देने के लिए भाषा प्रशिक्षण केंद्र खोला गया है। स्कूल में स्थानीय भाषा के साथ अंग्रेजी सिखाने के लिए स्पोकन इंग्लिश क्लासेज की शुरुआत की गई है। प्रशिक्षण केंद्र में शनिवार-रविवार को भूमिज, संथाल और बांग्ला की पढ़ाई होती है। यहां फिलहाल 110 बच्चे भाषा का प्रशिक्षण ले रहे हैं। स्कूल में तीरंदाजी व तैराकी प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की गई है। शिक्षकों की इनोवेटिव पहल से यह स्कूल शहर ही नहीं, राज्य में आकर्षण का केंद्र बना है। प्रधानाध्यापक अरविंद तिवारी के अनुसार, यह राज्य का पहला सरकारी मध्य विद्यालय है, जहां ग्रामीण बच्चों के व्यक्तित्व का समग्र विकास के लिए स्कूल के शिक्षक लगातार प्रयास कर रहे हैं, वह भी बिना सरकारी सहयोग के। निजी स्कूलों की तुलना में यहां के छात्र पढ़ाई के बाद हीन भावना से ग्रसित नहीं हों, इसलिए शिक्षण की तकनीकी तैयार की गई है।

बच्चे हीन भावना से ग्रसित न हो इसलिए लिया निर्णय
तीरंदाजी सीखते स्कूली बच्चे।

पढ़ाई के साथ तैराकी अौर तीरंदाजी का प्रशिक्षण केंद्र खोला गया है। स्कूल के पास ही तालाब है, जहां बच्चों को स्वीमिंग की ट्रेनिंग दी जाती है। प्रधानाध्यापक अरविंद तिवारी ने बताया, शनिवार और रविवार को इसकी कक्षाएं होती हैं। जमशेदपुर के तीरंदाजी प्रशिक्षक अनुपम सिंह बच्चों को प्रशिक्षण देते हैं। खर्च खुद वहन कर रहे हैं। यहां डे बोर्डिंग सेंटर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। खेल विभाग से अनुमति मिल गई तो कोच का खर्च मिलने लगेगा।

छात्रों को आगे बढ़ाने के लिए ये पहल की गई
1. पोटका प्रखंड का एकमात्र सरकारी विद्यालय, जहां स्काउट एंड गाइड की यूनिट है।

2. स्कूलों में माहवारी स्वच्छता के लिए बच्चियों के लिए पैड बैंक बनाया गया।

3. बच्चों को मल्टीप्लेक्स में फिल्म दिखाई गई। पहली बार रेल यात्रा कराई।

4. बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए कहो पहाड़ा और पहाड़ा रैली का आयोजन किया।

5. वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए विज्ञान मेला का आयोजन।

6. पढ़ने की क्षमता के विकास के लिए सुब्रतो मुखर्जी रीडिंग कॉर्नर कार्यक्रम की शुरुअात।

7. 3 दिवसीय कहानी मेला का आयोजन कर कहानी के जरिए पढ़ाने की तकनीक बताई गई।

8. बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए नाट्य प्रशिक्षण शिविर लगाया गया।

9. आसपास साफ - सफाई के लिए स्कूल को स्वच्छता विद्यालय पुरस्कार मिला।

स्कूल में खुला भाषा और तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र, तालाब में दी जाती है स्वीमिंग की ट्रेनिंग, अंग्रेजी के लिए चलती हैं स्पोकन क्लासेज
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