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17 साल में नहीं बदले हालात, अब भी विकास का इंतजार

सरायकेला| 17 साल पहले जिला बने सरायकेला-खरसावां को अब भी विकास का इंतजार है। स्थानीय जनता की बहुप्रतीक्षित...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:15 AM IST

सरायकेला| 17 साल पहले जिला बने सरायकेला-खरसावां को अब भी विकास का इंतजार है। स्थानीय जनता की बहुप्रतीक्षित आकांक्षा और स्थानीय स्वशासन को लेकर 30 अप्रैल 2001 को सिंहभूम जिले से अलग होकर सरायकेला-खरसावां जिला बना था। विकास के नाम पर बने सरायकेला-खरसावां जिले की आधी से अधिक आबादी आज भी विकास की राह ताक रही है। 17 वर्षों में भी सिंचाई की व्यवस्था अधूरी है। किसान बदहाल हैं। जिले में मौजूद ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल सहित मनोरम वादियां पर्यटन एवं स्थानीय रोजगार के लिए व्यापक अवसर प्रदान करते हैं। बीते 17 वर्षों से लोग पर्यटन के विकास और रोजगार की आस लगाए हुए हैं। कायनाइट और एस्बेस्टस सहित कई अन्य खनिजों से संपन्न जिले में खनन और उद्योग का समुचित विकास लोगों का सपना बना हुआ है। परंतु पेट और परिवार के ना मानने से रोजगार तलाशने बाहर जाने के लिए भी लोग विवश हो रहे हैं। स्वास्थ्य की हालत जिले में कुछ इस कदर बयां की जा सकती है कि चिकनी सड़क पर आए दिन हो रही सड़क दुर्घटना में लोगों के हड्डी टूटने के बाद भी जिले में हड्डी का डॉक्टर तक नहीं है। इतना ही नहीं आग से जलने के बाद लोगों के इलाज और बचाने के लिए बर्न यूनिट तक जिले में उपलब्ध नहीं है।

ये भी जानें

जिले का क्षेत्रफल 2724.55 वर्ग किलोमीटर

कुल जनसंख्या 1063458

पुरुष 5,44,411

महिला 5,20,323

जिले का स्थापना दिवस एक महत्त्वपूर्ण अवसर है। जब जिले की विकास यात्रा को के आगामी कार्यक्रमों की तैयारियां जोश के साथ की जाती है। ऐसी स्थिति में स्थापना दिवस को भूला देना अफसोसजनक है। - मनोज चौधरी, झामुमो नेता सह उपाध्यक्ष सरायकेला नगर पंचायत।

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