81 साल की मां बेटे की लिखी पुस्तक की कर रहीं मार्केटिंग अंतिम ख्वाहिश- इस किताब का संदेश हर व्यक्ति तक पहुंचे

Jamshedpur News - जमशेदपुर पुस्तक मेले में 81 साल की सुधा भट्ट हर विजिटर्स का गर्मजोशी से स्वागत करती हैं। शहर के लेखकों के स्टॉल...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 06:56 AM IST
Jamshedpur News - marketing of 81 year old mother son39s book is final desire message of this book reaches every person
जमशेदपुर पुस्तक मेले में 81 साल की सुधा भट्ट हर विजिटर्स का गर्मजोशी से स्वागत करती हैं। शहर के लेखकों के स्टॉल सहयोग पर बैठी सुधा भट्ट हर आने वाले को अपने बेटे की पुस्तक द रिवर व्यू मिरर देखने के लिए कहती हैं।

बताती हैं- बेटे ने इंजीनियरिंग पेशे में रहते हुए इस पुस्तक को लिखा है। यह उपन्यास ऐसा आईना है, जिसमें हर किसी को अपना अक्स देखना चाहिए। बकौल सुधा भट्ट, मेरी जिंदगी की ख्वाहिश है कि शहर का हर आदमी इस पुस्तक को पढ़े, ताकि वह अपनी जिंदगी को बेहतर बना सके। यह पुस्तक नैतिक संदेश है कि हम चाहे किसी भी परिस्थिति में हों, मगर हर पल को इंज्वाय करना चाहिए।

की बोझ तले दबे इस ड्राइवर की कहानी अंग्रेज को अंग्रेज को

सिटी रिपोर्टर| जमशेदपुर

जमशेदपुर पुस्तक मेले में 81 साल की सुधा भट्ट हर विजिटर्स का गर्मजोशी से स्वागत करती हैं। शहर के लेखकों के स्टॉल सहयोग पर बैठी सुधा भट्ट हर आने वाले को अपने बेटे की पुस्तक द रिवर व्यू मिरर देखने के लिए कहती हैं।

बताती हैं- बेटे ने इंजीनियरिंग पेशे में रहते हुए इस पुस्तक को लिखा है। यह उपन्यास ऐसा आईना है, जिसमें हर किसी को अपना अक्स देखना चाहिए। बकौल सुधा भट्ट, मेरी जिंदगी की ख्वाहिश है कि शहर का हर आदमी इस पुस्तक को पढ़े, ताकि वह अपनी जिंदगी को बेहतर बना सके। यह पुस्तक नैतिक संदेश है कि हम चाहे किसी भी परिस्थिति में हों, मगर हर पल को इंज्वाय करना चाहिए।

एक टैक्सी ड्राइवर की जर्नी के जरिए जिंदगी जीने का संदेश

सुधा भट्ट के बेटे विनीत भट्ट का यह उपन्यास एक टैक्सी ड्राइवर की जर्नी है, जो हमें जिंदगी जीने का संदेश देती है। भारत के भ्रमण पर आए एक अंग्रेज पर्यटक की भुवनेश्वर में एक ऐसे टैक्सी ड्राइवर से मुलाकात होती है, जो बेहद गरीब है। एक तरफ मां बीमार है तो बहन कुंवारी है और उसकी शादी करने का बोझ उसके कंधे पर है। जिम्मेवारी की बोझ तले दबे इस ड्राइवर की कहानी अंग्रेज को सोचने पर मजबूर करती है। ओडिशा घूमने के बाद जब वह भुवनेश्वर वापस आता है तो उसी टैक्सी ड्राइवर से मिलने की कोशिश करता है, लेकिन उसे पता चलता है कि वह इस दुनिया में नहीं रहा। उसने मां के इलाज और बहन की शादी के लिए अपनी किडनी बेच दी। किडनी तो दे दी, लेकिन खुद को नहीं बचा पाया।

हैदराबाद कार्यरत हैं विनीत

बकौल विनीत, सब कुछ होते हुए भी हम परेशान रहते हैं, लेकिन टैक्सी ड्राइवर की यह कहानी हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हमारे पास जो भी है, उससे सन्तुष्ट रहें और जिंदगी को इंज्वाय करें। शहर के लोयोला स्कूल के छात्र रहे विनीत ने एनआईटी राउरकेला से इंजीनियरिंग करने के बाद एक्सएलआरआई से एमबीए किया है। अभी हैदराबाद में एसबीआई में काम कर रहे हैं।

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