पश्चिम बंगाल के आॅर्केस्ट्रा ग्रुप व डांसर हिसी उर्वशी टुडू ने नृत्य से बांधा समां
खेलकूद प्रतियोगिता के अलावा भूमिज समाज परंपरा के अनुसार हुई नृत्य प्रतियोगिता, आज बाहा नृत्य के साथ रात 10 बजे किया जाएगा नाटक का मंचन
अादिवासी नवयुवक क्लब अौर ग्राम सभा तालसा के संयुक्त तत्वावधान में क्लब की 50वीं वर्षगांठ (गोल्डेन जुबली) के अवसर पर शनिवार को तालसा फुटबॉल मैदान में खेलकूद प्रतियोगिता के अलावा भूमिज समाज परंपरा के अनुसार नृत्य प्रतियोगिता का अायोजन किया गया। तालसा बाहा पाता का दूसरा दिन। इस अवसर पर दुमका संथाल पारगाना से आए जितेंद्र सोरेन, संदीप किस्कू, राजकिशोर टुडू, बालमेन हेंब्रम, रुबीलाल किस्कू उपस्थित थे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जुगसलाई तोरोप पारगाना दसमत हांसदा थे। शनिवार काे पोटका जनुमड़ी के दल ने फिरकाल नाच, बोड़ाम पोटका ने धोंगेड़, गिराय अाेडिशा के दल ने डांठा और छोटा तालसा ने साड़पा पारंपरिक सांस्कृतिक नृत्य का प्रदर्शन कर दर्शकों का मन मोहा। शाम 6-30 बजे से दीदी कल्पना हांसदा आॅर्केस्ट्रा ग्रुप पश्चिम बंगाल ने संगीत संध्या और मशहूर डांसर हिसी उर्वशी टुडू ने शमां बांधा। रविवार काे दोपहर से बाहा नृत्य अाैर रात 10 बजे से रात्रि नाटक होगा।
रीति-रिवाज, धर्म-संस्कृति व व्यवस्था काे सुदृढ़ करने के लिए युवा अागे अाएं
यूसील तुरामडीह काॅलाेनी के सामुदायिक केंद्र में शनिवार काे पारंपरिक सामाजिक स्वशासन व्यवस्था के प्रतिनिधियाें काे दाे दिवसीय विचार गाेष्ठी का अायाेजन किया गया। इसमें नेपाल, असम, दुमका, संथाल परगना, हजारीबाग, पश्चिम बंगाल, सरायकेला, चक्रधरपुर अाैर पूर्वी िसंहभूम के प्रतिनिधियाें ने संथाल के सामाजिक रीति-रिवाज, धर्म-संस्कृति, भाषा, लिपि एवं स्वशासन व्यवस्था के वर्तमान स्थिति पर चर्चा की। माैके पर परगना बाबा ने कहा कि अाधुनिक युग में समाज के लाेग स्वशासन व्यवस्था के मुख्य धारा से भटक रहे हैं। हमारा समाज दूसराें से अतुल्यनीय है। हम प्रकृति के उपासक हैं। हमें अपने समाज के रीति-रिवाज, धर्म-संस्कृति, भाषा, लिपि अाैर स्वशासन व्यवस्था काे सुदृढ़ करते हुए जल, जंगल व जमीन काे बचाना हाेगा। इसके लिए प्रतिनिधियाें काे जागरूक हाेकर युवाअाें काे अागे लाना हाेगा। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माझी परगना व्यवस्था काे सशक्त करने के लिए रविवार काे नाै बजे विचार-विमर्श किया जाएगा। माैकेे पर देश बैजू मुर्मू, राम किस्कू, जिसू हांसदा, नेपाल के मनाेज बास्के अादि माैजूद थे।
पारंपरिक सामाजिक स्वशासन व्यवस्था के प्रतिनिधियाें की दाे दिवसीय विचार गाेष्ठी का हुआ आयोजन
ढोल मांदर की थाप पर नाचते लोग।
आदिवासी नृत्य करते समाज के लोग।
पारंपरिक साड़ी पहन नाचतीं महिलाएं।