बुजुर्गों के साथ युवाओं में बढ़ रही पार्किंसन की बीमारी: डाॅ. ऋषिकेश

Jamshedpur News - पार्किंसन की बीमारी अब बुजुर्गों के साथ युवाओं में भी तेजी से फैल रही है। दिमाग में जब न्यूरॉन कोशिकाएं डोपामिन...

Nov 11, 2019, 06:50 AM IST
पार्किंसन की बीमारी अब बुजुर्गों के साथ युवाओं में भी तेजी से फैल रही है। दिमाग में जब न्यूरॉन कोशिकाएं डोपामिन रासायनिक पदार्थ का निर्माण कम करती है तो इससे दिमाग शरीर के विभिन्न अंगों पर नियंत्रण रख पाने में पूरी तरह सक्षम नहीं होता है। यह कहना था डाॅ. ऋषिकेश का। वह झारखंड न्यूरोसाइंसेज सोसाइटी की ओर से आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक सेमिनार एनीकॉन-2019 के समापन समारोह में बाेल रहे थे। कोलकाता के डॉ. ऋषिकेश ने कहा कि इस बीमारी में हाथ-पैर कांपता है। आदमी झुककर चलने लगता है। इस बीमारी को लोग बुढ़ापा समझ लेते हैं, जबकि यह बीमारी है। देश में 1 लाख में 150 लोगों को यह बीमारी है।

उन्होंने कहा कि आज के समय में हार्ट, किडनी बीमारी पर रिसर्च हो रहे हैं, लेकिन ब्रेन की बीमारियों पर ध्यान लोगों का कम है। उन्होंने कहा कि पार्किंसन आनुवांशिक कारणों से भी संभव है। प्रदूषण, बढ़ती आयु, बेतरतीब जीवनशैली से बीमारी फैल रही है। कार्यक्रम में डॉ जीसी रॉय अाैर डाॅ टीके घोष अवार्ड के लिए कुल 26 पेपर प्रस्तुत िकए। इसमें कोलकाता के डॉ अप्रतिम चटर्जी को डॉ बीसी रॉय अवार्ड दिया गया। साथ ही डॉ दिलीप रॉय, डॉ श्रीकांत दास, डॉ विराट हर्ष, डॉ देव दत्ता, डॉ गौतम दत्ता, डॉ निशांत कुमार गुप्ता सहित एक दर्जन से ज्यादा डॉक्टरों को सम्मानित किया गया। साथ ही सोसाइटी द्वारा डॉ आर बी शर्मा, डॉ नारायण उपाध्याय, डॉ यूके मिश्रा, डॉ ए बी बलसारा को भी सम्मानित किया गया। इस दौरान डॉ एमएन सिंह, डॉ अजय कुमार, डॉ संजय कुमार, डॉ एस राउल, डॉ एबी बलसारा, डॉ एफ बी सिंह मौजूद थे।

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