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रंगोत्सव में बिखरा प्रेम और प्रकृति का रंगहोली खेले रघुवीरा अवध में...पर झूमे लोग

एक वर्ष पहले
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जमशेदपुर | शहर के विभिन्न सामािजक संगठनों की ओर से रविवार को होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान लोगों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर आपसी सौहार्द का संदेश दिया। रोटरी क्लब ऑफ जमशेदपुर फेमिना,भोजपुरी साहित्य, टैगोर सोसायटी, मिलानी हॉल में सांस्कृतिक कार्यक्रम अायोजित किए। इस दौरान लाेगों ने होली खेले रघुवीरा अवध में.., आजग बिरज में होरी से रसिया...जैसे फाग गीतों पर जमकर थिरकते नजर आए।

राखामाइंस: रोटरी क्लब ऑफ जमशेदपुर फेमिना ने मनाई हाेली

रोटरी क्लब ऑफ जमशेदपुर फेमिना ने राखामाइंस स्थित एक फाॅर्म हाउस में होली मिलन मनाया। पहले सदस्यों ने रंग-बिरंगे फूलों से होली खेली। फिर गले लगाकर एक-दूसरे को महिला दिवस की शुभकामनाएं दी। सदस्यों ने सामूहिक नृत्य और लजीज व्यंजन का आनंद लिया।

तुलसी भवन: कवियों ने एक-दूसरे को अबीर लगा दिया सद्भाव का संदेश

भोजपुरी साहित्य के तत्वावधान में रविवार काे तुलसी भवन में होली मिलन सह काव्य संध्या का आयोजन हुआ। इसमें स्थानीय कवियों द्वारा एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत किया गया। इस दाैरान सभी ने एक-दूसरे काे अबीर-गुलाल लगाकर अापसी सद्भाव का संदेश दिया साथ ही हाेली की अग्रिम शुभकामनाएं दी।

होली मिलन: बीआईटी सिंदरी की पुरानी पहचान को लौटाएंगे

बसंत उत्सव: टैगोर स्कूल अॉफ आर्ट्स के बच्चों के नृत्य पर झूमे दर्शक

कार्यक्रम में बीआईटी के पूर्व छात्र ।

नृत्य प्रस्तुत करतीं छात्राएं।

बीआईटी सिंदरी एल्युमनी एसोसिएशन की ओर से रविवार शाम को गोलमुरी क्लब में पूर्ववर्ती विद्यार्थियों का होली मिलन समारोह आयोजित किया गया। समारोह में बीआईटी सिंदरी से पास आउट हुए सौ से ज्यादा पूर्ववर्ती छात्र और उनके परिजन भाग लिए। पूर्ववर्ती विद्यार्थियों ने कहा कि बीआईटी सिंदरी के स्टूडेन्ट्स देश निर्माण में अहम भूमिका निभा रहे हैं। बीआईटी सिंदरी के जमशेदपुर चैप्टर के संयोजक श्याम भूषण ने कहा कि एक समय था, जब बीआईटी सिंदरी देश का मशहूर इंजीनियरिंग कॉलेज था। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार इस कॉलेज की पुरानी पहचान को फिर से लौटाने के लिए काम कर रही हैं। समारोह में कॉलेज के सदस्यों ने एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाया। मौके पर महावीर राम, अॉटो कलस्टर के एमडी सह एसिया के ट्रस्टी एसएन ठाकुर, उद्यमी रवि टोडी, अमित राय, प्रणव कुमार, पवन ओझा आिद मौजूद थे।

टैगोर सोसायटी की ओर से रविवार को रवीन्द्र भवन साकची में बसंत उत्सव का आयोजन किया गया। प्रेम और प्रकृति के कवि रवीन्द्र नाथ टैगोर की रचनाओं से सज्जित इस उत्सव में बसंत के रूप दिखे। टैगोर एकेडमी और टैगोर स्कूल ऑफ आर्ट्स की सोनारी, टेल्को, बारीडीह और कदमा शाखा के ढ़ाई सौ विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुति देकर बसंत के रंग को उकेरा। टैगोर सोसायटी के महासचिव आशीष चौधरी ने कहा कि बसंत ऋतु का आगमन प्रकृति को नवजीवन और उल्लास से भर देता है। सबसे पहले सुबह 6 बजे बैतालिक (परिक्रमा) का आयोजन हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने रवींद्र भवन कीपरिक्रमा की। कविगुरु की प्रसिद्ध रचना ओरे गृहवासी खोल द्वार खोल...लागलो जे दोल, ओरे भाई फागुन लेगेछे, फागुन हवाएं..की प्रस्तुति विद्यार्थियों ने की। पटमदा से आए संताली कलाकारों ने नृत्य की प्रस्तुति की। बाद में सबने एक दूसरे को प्राकृतिक रंगों से अबीर गुलाल खेला। शाम को बसंत पर आधारित रचनाओं पर संगीत एवं नृत्य का मंचन हुआ।
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