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अब तक जमशेदपुर में 1124.7 एमएम बारिश, औसत से 144 एमएम अधिक

जुलाई में 457.7 एमएम लेकिन अगस्त की झमाझम बारिश ने इस कमी को पूरा कर दिया

Dainik Bhaskar

Sep 01, 2018, 10:45 AM IST
Rain updates and water levels in Jamshedpur

जमशेदपुर. मानसून का तीसरा महीना अगस्त बारिश के लिहाज से अच्छा रहा है। 570 एमएम बारिश हुई। इस माह की औसत बारिश 354.7 एमएम से ज्यादा है। अगस्त में बारिश की बात करें तो पिछले 10 वर्ष में दूसरी बार सबसे अधिक बारिश हुई। इससे पहले 2016 में 1058 एमएम हुई थी। शुक्रवार को खरकई इस सीजन दूसरी बार खतरे के निशान से ऊपर बही। ओड़िसा में भारी बािरश के कारण बाढ़ की स्थिति बनी। जुलाई में 457.7 एमएम लेकिन अगस्त की झमाझम बारिश ने इस कमी को पूरा कर दिया और आंकड़ा औसत के पार पहुंच गया। हालांकि इस बारिश के बाद भी नदियों के जल्द स्तर में कोई खास वृद्धि नहीं हुई है। पिछले वर्ष के अब तक के बारिश के आंकड़ों से तुलना करें तो करीब 300 एमएम कम बारिश हुई।

92 फीसदी हुई धान की रोपनी
जिले में निर्धारित लक्ष्य का 92 प्रतिशत धान की रोपनी का काम पूरा हो चुका है। कृषि पदाधिकारी मिथलेश कालिंदी ने बताया किसान अभी भी धान की रोपनी कर रहे हैं। विभाग देर से हो रही रोपनी की मॉनीटरिंग कर रहा है। देर से हो रही रोपनी के बावजूद पैदावार पर असर नहीं पड़ेगा।

बारिश के साथ गर्मी कायम

शुक्रवार को शहर में दोपहर बाद झमाझम बारिश हुई। आंकड़ा 25 एमएम रिकार्ड किया गया। बािरश के बावजूद शहर का तापमान 30 से 35 डिग्री बना हुआ है।

24 घंटे में 25 एमएम बारिश रिकॉर्ड हुई
अब तक कुल 1124.7 एमएम बारिश हुई। जबकि इसका औसत आंकड़ा 953.5 एमएम है। औसत से कुल 144 एमएम बारिश अधिक हो चुकी है। वहीं शुक्रवार की हुई बािरश से जुगसलाई अंडरब्रिज में जलजमाव हो गया। वाहनों को निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ा।

चांडिल और सीतारामपुर डैम हुए लबालब

चांडिल डैम 181.8 मीटर खतरे का निशान : 180 मीटर
ब्यांगविल डैम 305 मीटर खतरे का निशान : 308 मीटर
सीतारामपुर 22 फीट खतरे का निशान : 22 फीट
खरकई नदी 129.2 फीट खतरे का निशान : 129 फीट
सुवर्णरेखा 118.00 मीटर खतरे का निशान : 121.50 मीटर

अपर एयर साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से अगस्त में अच्छी बारिश

मौसम विभाग की माने तो यह बारिश बंगाल की खाड़ी में उठे अपर एयर साइक्लोनिक सर्कुलेशन से हुआ। हालांकि यह अब झारखंड से यूपी की ओर मुड़ा है। लेकिन इसका असर अभी भी है। इसी की वजह से अगस्त माह में बारिश हुई। जून में सर्कुलेशन नहीं देखने को मिला।

रांची के मौसम वैज्ञानिक रतन कुमार महतो ने बताया कि इस बार मानसून देरी से सक्रिय हुआ। इसकी वजह से सीजन की शुरुआत में कम बारिश हुई। इसकी मुख्य वजह बंगाल की खाड़ी में शुरू के महीनों में अपर एयर साइक्लोनिक सर्कुलेशन का न बनना रहा है।

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