खुलासा / जमशेदपुर के 30 हजार बच्चे नशे की गिरफ्त में; मानगो में सबसे ज्यादा, सोनारी में सबसे कम



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  • संस्थान ने नशाखोरी पर सामाजिक सर्वेक्षण किया, 10 से लेकर 16 साल तक के उम्र के बच्चों को सर्वे में किया शामिल 
  • कोल्हान में पूर्वी सिंहभूम जिले में सबसे ज्यादा 30735 बच्चे, दूसरे स्थान पर सरायकेला खरसावां जिला 
  • बड़े घरों के बच्चे भी नशाखोरी के आदी, 9 महीने में 12 हजार लाेगों से की गई बात 
  • मानगो में निम्न आय वर्ग के लोग अधिक, इसलिए बाल मजदूरी सबसे ज्यादा 
     

Dainik Bhaskar

Jun 03, 2019, 11:58 AM IST

जमशेदपुर. जमशेदपुर में 30 हजार बच्चे नशे की गिरफ्त में हैं। मानगो थाना क्षेत्र में सबसे ज्यादा चार हजार जबकि सबसे कम सोनारी में 115 बच्चे नशाखोरी करते हैं। इसका खुलासा रविवार को बाल मजदूर मुक्ति सेवा संस्थान ने की। बच्चों के लिए काम करने वाली सामाजिक संस्था ने 10 से लेकर 16 वर्ष तक के उम्र के बच्चों का सर्वे किया। कोल्हान के तीन जिले पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला खरसावां और पश्चिम सिंहभूम में सर्वे किया। रिपोर्ट के मुताबिक कोल्हान के जिलों में पूर्वी सिंहभूम जिले में सबसे ज्यादा 30735 बच्चे नशे की गिरफ्त में हैं। 

 

सरायकेला खरसावां दूसरे स्थान पर
दूसरे स्थान पर सरायकेला खरसावां जिला है। यहां के 27642 बच्चे नशाखोरी के शिकार हो चुके हैं। पश्चिम सिंहभूम के 14666 बच्चे नशे के आदी हैं। पूरे कोल्हान के लगभग 73043 बच्चे नशा कर रहे हैं। संस्थान के अध्यक्ष सदन ठाकुर ने बताया कि यह सर्वे डोर-टू-डोर किया गया है। उनका दावा है कि जिस तरह से नाबालिग बच्चे नशे का शिकार हो रहे हैं, ये दुर्भाग्य की स्थिति है। इसके लिए बड़ी मुहिम चलाने की जरूरत है। 

 

कोल्हान के जिलेवार नशे के आदी हो चुके बच्चों की संख्या 

जिला बालक बालिका कुल बच्चे 
पूर्वी सिंहभूम 24786 5049 30735 
सरायकेला 23387 4255 27642 
पश्चिम सिंहभूम 7818 6848 14660 


जमशेदपुर के थानावार बच्चों की संख्या, जो नशे की गिरफ्त में हैं 

थाना क्षेत्र बच्चे 
मानगो 4000 
आजादनगर 2000 
उलीडीह 1500 
एमजीएम 800 
पटमदा 200 
जुगसलाई 1500 
बागबेड़ा 800 
सुंदरनगर 300 
साकची 1800 
सिदगोड़ा 1300 
सीतारामडेरा 1900
टेल्को 1700 
गोविंदपुर 1500 
बिरसानगर 1500 
गोलमुरी 1200 
बर्मामाइंस 1700 
बिष्टुपुर 1800 
कदमा 700
सोनारी 115 

 

आयोडेक्स से लेकर पेट्रोल का सेवन कर रहे बच्चे 
बच्चे दर्द निवारक आयोडेक्स, पेंट, पेट्रोल, हेरोईन, स्मैक जैसी नशा भी ले रहे हैं। बाल मजदूर मुक्ति सेवा संस्थान की रिपोर्ट में बताया गया है कि बच्चे गांजा, बीड़ी, सिगरेट, सिगार, हुक्का, तंबाकू, गुटखा, भांग, आयोडेक्स, कफ सिरप कोरोक्स, ह्वाइटनर, साबुदाना पत्ती, पराग चाकलेट, इमली दाना, तितली चार्ट, केला पानी, पोस्तु, अफीम, मेंटक, आम लट्ठा, नेल पॉलिस, केचुआ चार्ट, पेंट, थिनर, मिट्टी तेल, पेट्रोल, हड़िया-रासी, गुलाब का फुल, शराब, बैगनपत्ता, चरस, हेरोइन, स्मैक, कोकिन, ब्राउनसुगर, ताड़ी, चिचोरी जैसे पदार्थों का उपयोग नशे के लिए कर रहे हैं। 

 

संस्थान के मुख्य संयोजक का है कहना
बाल मजदूर मुक्ति सेवा संस्थान के मुख्य संयोजक सदन ठाकुर का कहना है कि बच्चों में नशे की लत काफी बढ़ गई है। अफीम तक का सेवन कर रहे हैं, बच्चों को आसानी से उपलब्ध कराया जा रहा है। नौ महीने तक तीनों जिलों में सर्वे किया गया। डोर-टू-डोर पूछताछ करने का बाद सर्वे किया गया है। बच्चों को नशा मुक्ति के लिए मुहिम शुरू करने की जरुरत है। अपराध भी बढ़ रहा है। 

 

रिपोर्ट: बच्चे काम के दौरान सबसे अधिक नशा करते हैं 
सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक मानगो में सबसे ज्यादा बच्चे नशा का सेवन करते हैं। इस इलाके में सबसे ज्यादा बाल मजदूर हैं। जो गैरेज, होटलों और अन्य जगहों पर काम करते हैं। इसके अलावे मानगो में निम्न आय वर्ग के लोग अधिक है। एेसे बच्चे नशे के आदी अधिक है। वे काम के दौरान या इसके बाद भी नशा करते हैं। 

 

माता-पिता और बच्चों से बात की 
बाल मजदूर मुक्ति सेवा संस्थान ने 335 कार्यकर्ता को सर्वे के काम में लगाया था। हर कार्यकर्ता को थाना क्षेत्र के इलाके में सक्रिय किया गया था, जो डोर टू डोर सर्वे करने के लिए माता-पिता और बच्चे से बात की, 12 हजार से अधिक लोगों से इस दौरान संपर्क किया गया। लगभग 9 महीने में सर्वे का काम पूरा हुआ और नशा करने वाले बच्चे की पहचान हो सकी। 

 

हर वर्ग के बच्चों का हुआ सर्वे 
सर्वे में हर आय वर्ग के घरों के बच्चों को शामिल किया गया है। इसमें स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर मजदूरी कर रहे बच्चों की पड़ताल की गई। इसके आधार पर आंकड़े दर्ज किए गए। साभ्रांत घरों के बच्चों में भी नशाखोरी पाई गई है।

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