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यूनियन के सामने अस्तित्व बचाने की होगी चुनौती, इंडस्ट्री में होगा बड़ा बदलाव: त्रिपाठी

एक वर्ष पहले
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टाटा वर्कर्स यूनियन की शताब्दी वर्ष पर ‘टुमॉरो यूनियन’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कॉनक्लेव के समापन के मौके पर कंपनी की वीपी (एचआरएम) सुरेश दत्त त्रिपाठी ने बड़े बदलाव को उदाहरण देकर समझाया। इससे स्थिति की भयावहता का आभास हुआ। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इंडस्ट्री में सबसे बड़ा बदलाव होने वाला है। शायद कंपनी में कोई कर्मचारी नहीं रहेगा। इसकी जगह गिग वर्कर होंगे। पहले भी गिग वर्कर होते थे। वे सभी संस्थानों या कंपनियों से जुड़े रहते थे। फ्रीलांसर होते थे। कंसल्टेंट होते हैं जो किसी संस्थानों से जुड़े नहीं रहते हैं। आने वाले दिनों में जब कर्मचारी ही नहीं रहेंगे तो यूनियन कैसे बनेगी। वे रविवार को टाटा वर्कर्स यूनियन की शताब्दी समारोह के समापन पर आयोजित ‘भविष्य का यूनियन’ विषय पर दो दिवसीय कॉनक्लेव के समापन समारोह में मुख्य अतिथि थे।

वीपी (एचआरएम) ने कहा कि गांवों में ठेका मजदूर जगह बदल-बदलकर काम करते थे। शहर में कम मजदूर होने की वजह से यहां अधिक दिहाड़ी मिलती थी। इसलिए वे शहर आ जाते थे। लेकिन अब डिजिटल वर्ल्ड में यह अंतर समाप्त हो गया। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवा ऐसा ही जॉब चाहते हैं। वे घर से काम करते हैं। विश्व के किसी भी कोने से वे काम कर सकते हैं। किसी एक कंपनी के ब्रांड में बंधकर रहना नहीं चाहते हैं। इसमें काम की स्वतंत्रता है। संस्थान के बाउंड्री के अंदर काम करने की बाध्यता खत्म रहेगी। उन्होंने कहा- सोचें कि कंपनी में लोग योगदान नहीं दे रहे हैं। कंपनी के वे कर्मचारी नहीं हैं। तब यूनियन कैसे बनेगी। गिग मजदूरों की संख्या बढ़ेगी। तब सस्टनेबिलिटी व डायवर्सिटी पर सोचना पड़ेगा। तब मकसद होगा। उस मकसद के आधार पर यूनियन बनाना होगा। यूनियन गठन के कारण क्या थे और आगे क्या होगा, इसपर विचार करना होगा। आईटी सेक्टर में वर्कर नहीं हैं।

वहां सीनियर एसोसिएट हैं। फिर किसकी यूनियन होगी। उन्होंने कहा कि परंतु एक उद्देश्य होगा जिसपर वे एक होंगे और यूनियन बनेगी। तब एक चैलेंज होगा कि क्या बात करना है किसके पास क्या बात रखनी है। मुद्दे यूनिवर्सल होंगे। वर्तमान स्किल और तरीके समाप्त होंगे। आने वाले दिनों के लिए क्या स्किल और मुद्दे होंगे।

जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट भुवनेश्वर बना विजेता

कॉनक्लेव की थीम पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता के प्रथम विजेता जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट भुवनेश्वर की प्रज्ञन्या पी नायडू व सैयद और अबरार की टीम जिसे 35 हजार पुरस्कार मिला। दूसरे स्थान पर टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस मुंबई की सौमनेश सुनील गोदादे, विश्वेश विवेक की टीम जिसे 25 हजार रुपए पुरस्कार मिला। तीसरे स्थान पर संयुक्त रूप से जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट भुवनेश्वर की शिखा उपाध्याय, रितिका पाठक की टीम और आईआईएम रांची के दर्पण व विवेक साहू की टीम रही जिसे 10-10 हजार रुपए का पुरस्कार दिया गया।

टाटा वर्कर्स यूनियन की ‘टुमॉरो यूनियन’ पर दो दिवसीय कॉनक्लेव का समापन

भविष्य में यूनियन की क्या भूमिका होगी बताना मुश्किल

सुरेश दत्त त्रिपाठी ने कहा कि भविष्य में यूनियन की क्या भूमिका होगी, बताना मुश्किल है। सिर्फ इस संबंध में अनुमान लगाए जा सकते हैं। टाटा स्टील व टाटा वर्कर्स यूनियन ने अपने पूर्व के लीडरशिप की दूरदृष्टि की वजह से सौ साल का सफर तय किया है और उनके अच्छे कार्यों की वजह से हम आगे बढ़ते गए। उन्होंने कहा कि आगे डिफरेंट करना आसान है, लेकिन जब सिद्धांत और मूल्यों की बात आती है तो उसपर आगे बढ़ना मुश्किल होता है। उन्होंने कहा कि अंदर और बाहर दोनों जगह बदलाव होंगे। इसके लिए तैयारी करना होगा। यह नेतृत्व का दायित्व है कि आने वाले बदलाव के लिए कैसे वे तैयार कर सकें। उन्होंने टाटा स्टील में कार्यस्थल पर महिला कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने पर काम चलने की बात भी बात कही।

बदलाव होगा, यह प्रकृति की नियति: आर रवि

टाटा वर्कर्स यूनियन (टीडब्ल्यूयू) की शताब्दी वर्ष के समापन समारोह में ‘भविष्य का यूनियन’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कॉनक्लेव के समापन पर यूनियन के पूर्व पदाधिकारियों को सम्मानित किया गया। साथ ही कॉनक्लेव की थीम पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए यूनियन अध्यक्ष आर रवि प्रसाद ने कहा कि बदलाव होगा। यह प्रकृति की नियति है। टाटा वर्कर्स यूनियन ने कई बदलावों को देखा और उस बदलाव का सफलतापूर्वक सामना भी किया है। 90 के दशक में कई विभाग बंद हुए। फास्ट चेंज के दौर में कर्मचारियों को चेंज करने के लिए प्रबंधन से बात करना चाहिए। आने वाले नए जॉब के लिए कर्मचारियों को दक्ष बनाया जाना चाहिए। इसके लिए ट्रेनिंग हो, क्योंकि कंपनी और कर्मचारी एक-दूसरे पूरक हैं। इसलिए कंपनी और कर्मचारी को बिना पीड़ा के बदलाव के लिए तैयार करना चाहिए। महासचिव सतीश सिंह ने कॉनक्लेव में आए विषयों के निष्कर्षों को बताया। साथ ही भविष्य की चुनौतियों के लिए सभी स्तर पर ट्रेनिंग की महता को बताया। धन्यवाद ज्ञापन डिप्टी प्रेसिडेंट अरविंद पांडेय ने किया। संचालन माइकल जॉन सेंटर के डायरेक्टर जयदेव उपाध्याय ने किया। इससे पहले दो सत्र में पैनल डिस्कशन हुआ। पहले सत्र में एचआर और दूसरे सत्र में यूनियन नेताओं ने कल के यूनियन पर अपने विचार रखे।

इन्हें किया गया सम्मानित : पूर्व अध्यक्ष आरबीबी सिंह, रघुनाथ पांडे, पूर्व महासचिव एसएन सिंह, बीके डिंडा, पूर्व डिप्टी प्रेसिडेंट संजीव कुमार चौधरी टुन्नू, शैलेश कुमार सिंह, पूर्व मानद सचिव के एनपी सिंह और एसके सिंह।

समापन समारोह में उपस्थित वीपी सुरेश दत्त त्रिपाठी, टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष आर रवि प्रसाद व अन्य।
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