गले में वायरल इंफेक्शन के मरीज बढ़े, सर्दी-खांसी और बुखार जल्द ठीक न हो तो स्वाइन फ्लू होने की आशंका
बिन मौसम बारिश से गले में वायरल इंफेक्शन से इन दिनों अधिकतर लोग पीड़ित हैं। शायद ही एेसा कोई घर बचा है, जिसका कोई सदस्य सर्दी, खांसी, बुखार से पीड़ित ना हो। इसका मुख्य कारण है-मौसम में बदलाव।
कभी गर्मी तो कभी ठंड। वैसे यह वायरल इंफेक्शन है। लेकिन, प्रदूषण की वजह से एलर्जी से भी इस तरह की समस्या हो सकती है। यदि सिर्फ सर्दी-खांसी है, तो यह वायरल इंफेक्शन है और बुखार हो तो यह बैक्टिरियल इंफेक्शन में तब्दील हो जाता है। इसलिए ठंड से परहेज करने की जरूरत है। गले को बचाने के लिए गर्म कपड़ा लपेट कर रखें। रात में पंखा या एसी नहीं चलाएं। कुछ लोग हल्की गर्मी का अहसास होने पर पंखा और एसी चला देते हैं। हल्के गर्म पानी का सेवन करें। आइसक्रीम या अन्य ठंडे पेय पदार्थ के सेवन से बचें। वरीय फिजिशियन डॉ. उमेश खान ने कहा- अधिकतर लोग गले में वायरल इंफेक्शन की वजह से पीड़ित हैं। यह समस्या ठंड और एलर्जी की वजह से उत्पन्न हुई है। इस बदलते मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
एमजीएम उपाधीक्षक डाॅ. नकुल चौधरी ने कहा कि लोग कोरोना वायरस को लेकर चिंतित हैं। लेकिन, अभी स्वाइन फ्लू को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। दिल्ली, मुंबई अादि शहरों में स्वाइन फ्लू के मामले मिले हैं। वहां से होली की छुट्टियों में काफी लोग शहर अाए हैं। उनसे भी यहां के लोगों को स्वाइन फ्लू का इनफेक्शन लगने की आशंका रहेगी। स्वाइन फ्लू में भी साधारण इनफ्लूएंजा का लक्षण मिलता है। स्वाइन फ्लू भी कोरोना से कम खतरनाक नहीं है। यदि यह इलाज के बाद भी सर्दी, खांसी, छींक, नाक से पानी अाना, बुखार कम नहीं होता है तो स्वाइन फ्लू की आशंका हो सकती है।
करें परहेज, गले में गर्म कपड़ा लपेटकर रखें, रात में पंखा-एसी ना चलाएं