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कचरे से अादित्यपुर अौद्योगिक क्षेत्र की नालियां जाम, संक्रामक बीमारी फैलने का मंडरा रहा खतरा

एक वर्ष पहले
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अादित्यपुर अौद्योगिक क्षेत्र प्राधिकार (अायडा अब जियाडा) एसिया का सबसे बड़ा अौद्योगिक क्षेत्र है, जहां छोटे-बड़े करीब 1500 इकाइयां स्थापित हैं अौर दो लाख से अधिक कामगार काम करते हैं। इसके बावजूद प्राधिकार अौद्योगिक क्षेत्र में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब है। नाली की बनावट एेसी है कि उससे एक भी कंपनी का पानी नहीं निकलता है। नाली में गंदगी के कारण काफी बदबू आता है, जिससे संक्रामक बीमारी भी फैल सकती है। इसके बावजूद कोई सुधि लेने वाला नहीं है।

वहीं, प्राधिकार की अाेर से विशेेष अभियान के तहत अौद्योगिक क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों में एक साल पहले स्ट्रीट लाइट लगाई गई थी। लेकिन, दो महीने जलने के बाद ही लाइट खराब हो गई है। इसको लेकर स्थानीय उद्यमी कई बार प्राधिकार के वरीय पदाधिकारियों से मरम्मत के लिए गुहार लगा चुके हैं। लेकिन, अाज तक कोई सुधि लेने नहीं पहुंचा। वहीं, प्रत्येक महीने स्ट्रीट लाइट का बिल कंपनी के पास भेजा जा रहा है। स्थानीय उद्यमियों के माने तो इन समस्याओं को लेकर प्राधिकार के कोई भी पदाधिकारी गंभीर नहीं हैं। सिर्फ विकास अौर सुविधा के नाम पर उद्यमियों से भारी रकम वसूली जाती है। इस संबंध में जियाडा के उप निदेशक रंजना मिश्रा ने बताया कि स्ट्रीट लाइट अौर लाइट की समस्या है तो उसे ठीक किया जाएगा। उद्यमी उसकी जानकारी उपलब्ध कराएं।

नाली की बनावट के कारण कभी पानी नहीं निकलता, इससे जल जमाव होता है : उद्यमी

उद्यमी डीएस सिंह ने कहा कि नाली की बनावट एेसी है कि उससे कभी भी पानी नहीं निकलता है। इसलिए नाली का पानी अौर कचरा नाली में ही पटा रहता है, जिससे नालियां जाम हैं। इस कारण यहां संक्रामक बीमारी फैल सकती है। उन्होंने कहा कि उषा मोड़ से लेकर उषा कंपनी तक दो साल पहले नाली बनी थी। लेकिन, नाली का बनावट ठीक होने के कारण इस लाइन की कंपनियों का पानी नाली में गिर नहीं पाता है। बारिश या सड़क का जो भी पानी नाली में जाता है वह नाली में भी भरा रहता है। कभी भी सफाई नहीं होती है। नाली से इतनी दुर्गंध अाती है कि नाली के किनारे कंपनी के कार्यालय में बैठना भी मुश्किल हो रहा है।

जियाडा उद्यमियों को सिर्फ लाइट का बिल भेजता है, लेकिन लाइट कभी नहीं जलती: केपी सिंह

अादित्यपुर अौद्योगिक क्षेत्र के उद्यमी केपी सिंह ने कहा कि जियाडा सिर्फ सफाई अौर लाइट के नाम पर बिल भेजता है। कभी भी सफाई नहीं कराता है। औद्योगिक क्षेत्र में कभी भी लाइट नहीं जलती है। उन्होंने बताया कि एक साल पहले उषा मोड़ से लेकर उषा कंपनी तक स्ट्रीट लाइट लगाया गया था। मात्र दो माह तक की ये लाइटें जलीं। लेेकिन अाज तक उसकी मरम्मत नहीं की गई। वहीं जियाडा हर महीने स्ट्रीट लाइट के नाम पर बिजली बिल भेज रहा है। उन्होंने कहा कि लाइटें जलती अौर नियमित रूप से सफाई होती तो बिल देने में कोई परेशानी नहीं होती। लेकिन, बिना सुविधा के प्रत्येक महीने उद्यमियों को बिल का भुगतान करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इन समस्याअाें को जियाडा की मीटिंग में कई बार रखा गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

नालियों में लगा कचरे का अंबार।

जियाडा की मीटिंग में कई बार समस्याओं को रखा गया, लेकिन नहीं हुई कार्रवाई
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