महिलाओं-युवतियों ने होलिका की राख से पिंड बनाकर ईशर व गणगौर की पूजा की
शहर में 16 दिवसीय गणगौर का पर्व शुरू हो गया है। बुधवार को शहर में विभिन्न जगहों पर उत्साह और उमंग के साथ पर्व मनाया गया। इस दौरान राजस्थानी व मारवाड़ी संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। इसमें शहर की विभिन्न समाज की महिलाओं ने भी भाग लिया। इस संबंध में प्रभा पाडिया ने बताया कि होली के दूसरे दिन से ही गणगौर पर्व शुरू हो जाता है। अहले सुबह महिलाएं होलिका की राख अपने घर लाती हैं। इसके बाद मिट्टी गिलाकर उससे 16 पिंडियां बनाती हैं। मिट्टी अाैर राख से शंकर-पार्वती बनाकर 16 दिनाें तक लगातार उनकी पूजा-अर्चना करती हैं।रानी अग्रवाल ने बताया कि कुंवारी युवतियां अच्छे वर के लिए यह पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाती हैं। पर्व के चलते युवतियों और महिलाओं द्वारा शहर के अलग-अलग स्थानों पर शिव और मां गौरी का उपासना की जाती है। इस 16 दिवसीय पर्व पर प्रतिदिन ईशर व गणगौर की पूजन सुहागिन महिलाएं व युवतियों द्वारा किया जाता है। गौर गोमती ईशर पूजे पार्वती, यह गीत लोक संस्कृति के अनुसार पर्व पर महिलाएं व युवतियां ईशर और गणगौर की पूजन करते समय गाती हैं। इस पर्व पर महिलाएं अौर लड़कियां हाथ-पैर में मेंहदी लगाकर सुंदर वस्त्र व गहनों का शृंगार करती हैं।
ढांढ़ण वाली श्री टीडा गेला दादी जी का वार्षिकोत्सव 15 मार्च को
श्री ढांढ़ण शक्ति प्रचार मंडल की बैठक बुधवार को भरतिया एसोसिएशन जुगसलाई में हुई। बैठक में 15 मार्च को ढांढ़ण वाली श्री टीडा गेला दादी जी का वार्षिकोत्सव मनाने का निर्णय लिया गया। श्री राजस्थान शिव मंदिर, एसई स्कूल रोड जुगसलाई में कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसमें 501 महिलाएं मंगलपाठ में शामिल होंगी। गायक विशाल बजाज व विकास भरतिया मंगल पाठ कराएंगे। कार्यक्रम में दादी जी का शृंगार, छप्पन भोग, व फूलों की होली आकर्षण का केंद्र होगा। उत्सव दोपहर 2.30 बजे शुरु होगा, जो रात्रि 8.30 बजे तक चलेगा। इसको लेकर जोर-शोर से तैयारी चल रही है। बैठक में मंडल के सभी सदस्य माैजूद थे।
गणगौर की पूजा करतीं महिलाएं।
पूजन करते समय गाती हैं। इस पर्व पर महिलाएं अौर लड़कियां हाथ-पैर में मेंहदी लगाकर सुंदर वस्त्र व गहनों का शृंगार करती हैं।
युवतियां अच्छे वर के लिए तो महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए करती हैं पूजा